
दिल्ली लाल किले के पास हुए ब्लास्ट की प्रतीकात्मक तस्वीर। इमेज-एआई
Delhi Blast UP and Nepal Connection: दिल्ली धमाके की जांच कर रहीं एजेंसियों को कुछ अहम सुराग मिले हैं। इससे पूरे नेटवर्क का दायरा और गहराई सामने आने लगी है। जांच में मोबाइल, सिम कार्ड, संदिग्ध कारों और डॉक्टरों के बीच हुई बातचीत को लेकर सबूत मिले हैं। एजेंसियां मोबाइल, सिम, वाहनों और संदिग्धों के बीच के हर तार को जोड़कर एजेंसियां बड़े नेटवर्क की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।
जांच में पता चला है कि धमाके को अंजाम देने में जिन मोबाइल का इस्तेमाल हुआ, वे नेपाल से खरीदे गए थे। छह पुराने मोबाइल नेपाल से लाने की पुष्टि हुई है। फोन की खरीद और भारत तक पहुंचाने वाले की तलाश की जा रही है। एजेंसियों को शक है कि अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के जरिए इन फोन को खास साजिश के तहत सीमा पार से भेजा गया।
इन मोबाइल के लिए 17 सिम कार्ड जुटाए गए थे। इनमें से 6 सिम कानपुर के बेकनगंज क्षेत्र के एक व्यक्ति के नाम पर रजिस्टर्ड हैं। यह व्यक्ति अब जांच के दायरे में है। उसने अपनी पहचान का इस्तेमाल खुद किया या किसी ने फर्जी दस्तावेजों से उसका नाम के पर सिम कार्ड लिए हैं, उसकी जांच की जा रही है। बाकी सिम कार्डों का लिंक कहां से जुड़ता है, उसे लेकर भी एजेंसियां तेजी से छानबीन कर रही हैं।
जांच में यह भी मालूम पड़ा है कि धमाके से एक घंटा पहले तक डॉ. उमर की बातचीत डॉ. परवेज, डॉ. मोहम्मद आरिफ और डॉ. फारूक अहमद डार से हो रही थी। यह बातचीत किस लिए हो रही थी? क्या इन डॉक्टरों की सीधी या अप्रत्यक्ष भूमिका है? इन सवालों का जवाब तलाशा जा रहा है। एजेंसियां पूरी गहराई से जांच कर रहीं। कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और लोकेशन की मदद से इन संपर्कों की एक्टिविटी का पता लगाया जा रहा है।
यह भी पढ़ें: दिल्ली ब्लास्ट केस का खुलेगा राज! NIA ने 4 और मुख्य आरोपियों को किया गिरफ्तार
जांच में सामने आया है कि धमाके में शामिल नेटवर्क से संबंधित लोगों ने कानपुर से दो पुरानी कारें खरीदी थीं। ये कारें किसने खरीदीं, उनका भुगतान कैसे हुआ और वे कहां इस्तेमाल हुईं? उसकी जांच जारी है। सुरक्षा एजेंसियां वाहनों की लोकेशन, चेसिस नंबर और अन्य तकनीकी डिटेलों को खंगालने में लगी हैं।






