हर घटना के बाद ‘अवैध’ करार, लोगों की मौत से पहले कहां रहते जिम्मेदार? दिल्ली अग्निकांड के बाद उठ रहे सवाल
Malviya Nagar Hotel Fire Accident: हर बड़े हादसे की तरह इस बार भी घटना के तुरंत बाद प्रशासन का वही पुराना ढर्रा देखने को मिला, जहां पूरी इमारत और उसके संचालन को 'अवैध' घोषित कर दिया गया।
- Written By: मनोज आर्या
दिल्ली के मालवीय नगर अग्निकांड के बाद उठ रहे सवाल, (सोर्स- AI)
Malviya Nagar Hotel Fire Accident: दिल्ली के मालवीय नगर में बुधवार सुबह एक होटल में भीषण आग लगने से 21 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में ज्यादातर विदेशी नागरिक शामिल हैं, जो सेंट्रल एशिया और अफ्रीकी देशों से भारत आए थे। मरने वालों में कितने विदेशी नागरिक हैं, फिलहाल यह आंकड़े स्पष्ट नहीं है। दिल्ली अग्निश्मन विभाग और प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, होटल के रेस्टोरेंट में सुबह 8:50 बजे आग लगी। जिसके बाद भीषण आग ने ऊपरी मंजिलों पर बने होटल के रूम और बेसमेंट को अपने चपेट में ले लिया।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहीं घटना से जुड़े वीडियो में कुछ लोग जान बचाने के लिए होटल के तीसरे और चौथे फ्लोर से कूदते नजर आ रहे हैं। इन्हें बचाने के लिए स्थानीय लोगों ने जमीन पर गद्दे भी बिछाए थे।
छह महीनों में 66 लोगों की मौत
शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, रेस्क्यू ऑपरेशन के जरिए 40 लोगों को होटल से बाहर निकाला गया है। जिसमें कई लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है। वहीं, होटल के बेसमेंट से भी छह लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। होटल में आग कैसे लगी और इसकी वजह क्या है? इसकी जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है। पिछले छह मीहनों में दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में घटित आग की घटनाओं में 66 लोगों की मौत हो चुकी है।
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2026 में हुए मौतों के आंकड़े
- जनवरी- 6
- फरवरी- 6
- मार्च- 15
- अप्रैल- 5
- मई- 13
- जून- 21
अवैध तरीके से चल रहा था होटल
दिल्ली के मालवीय नगर स्थित जिस होटल में यह घटना हुई उसे अब अवैध बताया जा रहा है। इस गेस्टहाउस को सिर्फ बेड एंड ब्रेकफास्ट कॉन्सेप्ट के तहत लाइसेंस मिला था। जिसके तहत होटर में केवल 6 बेडरूम बनाने की इजाजत थी, लेकिन फिलहाल इस होटल में 25 कमरे की व्यवस्था की गई थी। घटना के वक्त होटल के रेस्टोरेंट के बेसमेंट में भी काफी लोग फंसे हुए थे। इसमें अंदर जाने और बाहर निकलने का रास्ता एक ही था, जो बहुत ही संकरा था। होटल के बास फायल NoC भी नहीं थी। इसके अलावा होटल में आने जाने के लिए सिर्फ एक ही रास्ता था।
गैर इरादत हत्या का केस दर्ज
मालवीय नगर के होटल में हुई अग्निकांड के बाद पुलिस ने गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार, होटल में आने-जाने के लिए सिर्फ एक ही रास्ता था। अब होटल के फायर सेफ्टी एनओसी और सुरक्षा व्यवस्था की जांच की जा रही है। बिल्डिंग के ग्राफंट फ्लोर पर रेस्टोरेंट और ऊपर की मंजिलों पर होटल चल रहा था। आग के कारणों का पता लगाने के लिए जांच जारी है।
#WATCH दिल्ली सरकार में मंत्री आशीष सूद ने मालवीय नगर में आग लगने की घटना पर कहा, “लापरवाही के लिए ज़िम्मेदार इमारत के मालिक को गिरफ़्तार किया जाएगा…” pic.twitter.com/L2XWjjFbEa — ANI_HindiNews (@AHindinews) June 3, 2026
मालवीय नगर अग्निकांड पर बड़ा सवाल
हर बड़े हादसे की तरह इस बार भी घटना के तुरंत बाद प्रशासन का वही पुराना ढर्रा देखने को मिला, जहां जांच शुरू होते ही पूरी इमारत और उसके संचालन को ‘अवैध’ घोषित कर दिया गया। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस होटल को दिल्ली सरकार की ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ योजना के तहत केवल 6 कमरों के संचालन की अनुमति मिली थी, लेकिन नियमों को ताक पर रखकर यहां बेसमेंट समेत कुल 25 कमरे धड़ल्ले से चलाए जा रहे थे।
दिल्ली फायर सर्विस के प्रमुख ने पुष्टि की है कि इस इमारत के पास कोई ‘फायर एनओसी’ नहीं थी और इसका ढांचा ऐसा था कि इसे कभी एनओसी मिल ही नहीं सकती थी। ऐसे में जनता के बीच यह तीखा सवाल उठना लाजिमी है कि जब तक निर्दोष लोगों की सांसें नहीं थमतीं, तब तक नगर निगम, दमकल विभाग और स्थानीय प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी किस गहरी नींद में सोए रहते हैं।
आनन-फानन में सरकार के निर्देश
हादसे के बाद दिल्ली के गृह मंत्री आशीष सूद ने बिना किसी कारण बताओ नोटिस के नियमों का उल्लंघन करने वाले सभी ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ प्रतिष्ठानों को तुरंत सील करने और जांच के लिए उच्च स्तरीय कमेटी बनाने के कड़े निर्देश दिए हैं। पुलिस ने भी होटल मालिक के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर लिया है, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
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लेकिन यह पूरी कवायद उस व्यवस्था की नाकामी को नहीं छिपा सकती, जो भ्रष्टाचार और अनदेखी के चलते रिहायशी इलाकों को बारूद के ढेर में तब्दील होने देती है। जब तक हर गली-मोहल्ले में बिना एनओसी और सिंगल एग्जिट के चल रहे ऐसे अवैध व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर हादसे से पहले कार्रवाई नहीं होगी, तब तक मुआवजे की घोषणाएं और बाद में सीलिंग के खोखले आदेश सिर्फ कागजी खानापूर्ति बनकर रह जाएंगे।
