दिल्ली के नेचर बाजार में ‘अग्नितांडव’: 40 दुकानें जलकर स्वाहा, सुबह-सुबह आसमान में छाया धुएं का खौफनाक मंजर
Delhi Nature Market Fire: दिल्ली के नेचर बाजार में रविवार सुबह भीषण आग लगने से हस्तशिल्प की करीब 40 दुकानें जलकर राख हो गईं। गनीमत रही कि हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
दिल्ली बाजार में लगी आग, फोटो- सोशल मीडिया
Delhi handicraft Market Fire: रविवार की सुबह दक्षिण दिल्ली का एक लोकप्रिय बाजार अचानक धू-धू कर जल उठा। अंधेरिया मोड़ के पास स्थित ‘नेचर बाजार’ में लगी इस भीषण आग ने देखते ही देखते खुशियों और व्यापार के सपनों को राख में तब्दील कर दिया।
आसमान में काले धुएं का ऐसा गुबार उठा कि कई किलोमीटर दूर से ही इसे देखकर लोग सिहर उठे। यह सिर्फ दुकानों का जलना नहीं था, बल्कि उन दर्जनों हस्तशिल्पकारों के रोजगार पर आई एक बड़ी आपदा थी, जिन्होंने अपनी मेहनत से इस बाजार को एक विशेष पहचान दी थी।
सुबह 7:37 बजे का वो मनहूस वक्त और धुआं-धुआं होता बाजार
दिल्ली अग्निशमन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, आग लगने की पहली सूचना रविवार सुबह ठीक 7:37 बजे प्राप्त हुई। लाडो सराय और अंधेरिया मोड़ के बीच स्थित यह नेचर बाजार अपनी अस्थायी और अर्ध-स्थायी दुकानों के लिए जाना जाता है। चूंकि दुकानें लकड़ी, कपड़े और अन्य ज्वलनशील हस्तशिल्प सामग्री से बनी थीं, इसलिए आग ने बहुत तेजी से विकराल रूप धारण कर लिया। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो कुछ ही मिनटों में आग एक दुकान से दूसरी दुकान तक फैलती चली गई। बाजार परिसर से उठते धुएं के विशाल गुबार ने इलाके में हड़कंप मचा दिया और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।
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दमकल की 10 गाड़ियां और घंटों की मशक्कत, फिर पाया गया काबू
जैसे ही सूचना मिली, दिल्ली अग्निशमन सेवा की टीम बिना किसी देरी के घटनास्थल पर पहुंची। आग की गंभीरता को देखते हुए एक के बाद एक कुल 10 दमकल गाड़ियों को मोर्चे पर लगाया गया। दमकलकर्मियों के लिए चुनौती न केवल आग बुझाना था, बल्कि इसे बाजार के बाकी हिस्सों में फैलने से रोकना भी था।
दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने भी मौके पर पहुंचकर भीड़ को नियंत्रित किया ताकि बचाव कार्य में कोई बाधा न आए। घंटों की भारी मशक्कत और साहस के बाद अंततः आग पर काबू पाया गया, जिसके बाद इलाके में शीतलन अभियान शुरू किया गया ताकि मलबे के नीचे दबी कोई चिंगारी दोबारा आग न भड़का सके।
40 दुकानों के साथ खाक हुए करोड़ों के सपने, आखिर जिम्मेदार कौन?
इस भीषण अग्निकांड में लगभग 40 दुकानें पूरी तरह जलकर नष्ट हो गई हैं। इन दुकानों में रखे कीमती हस्तशिल्प का सामान, फर्नीचर और ढांचागत निर्माण सब कुछ राख में मिल गया है। दुकानदारों के लिए यह एक गहरा वित्तीय और भावनात्मक आघात है, क्योंकि उनकी सालों की कमाई और मेहनत कुछ ही घंटों में धुएं में मिल गई। हालांकि, राहत की सबसे बड़ी खबर यह रही कि इस पूरी घटना में किसी के हताहत होने या घायल होने की कोई सूचना नहीं मिली है। फिलहाल आग लगने के सटीक कारणों का पता नहीं चल पाया है और अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या यह शॉर्ट सर्किट था या लापरवाही का नतीजा।
