‘सरकार के पास सबूत है, तो आरोप साबित करे’, जेल में बंद उमर खालिद मामले पर बोले शशि थरूर; सरकार पर उठाए सवाल
Shashi Tharoor On Umar Khalid: कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने उमर खालिद मामले में न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि आरोपों का फैसला अदालत में जल्द होना चाहिए।
- Written By: अनन्या तिवारी
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स-सोशल मीडिया)
Congress MP Reacts To Umar Khalid Imprisonment: कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने दिल्ली दंगा मामले के आरोपी और पूर्व जेएनयू छात्र उमर खालिद को लेकर केंद्र सरकार और न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति पर गंभीर आरोप हैं, तो उनका फैसला अदालत में होना चाहिए। लंबे समय तक बिना ट्रायल के जेल में रखना न्याय व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। शशि थरूर के इस बयान के बाद इस मामले पर लगातार राजनीतिक बेहस शुरू हो गई है। सोशल मिडीया पर भी लोग इस मामले पर अपनी टिप्पनियां दे रहे हैं।
क्या है शशि थरूर की वायरल पोस्ट
शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि उमर खालिद के खिलाफ आतंकवाद या हिंसा भड़काने के पर्याप्त सबूत हैं, तो सरकार को उन्हें अदालत में पेश कर आरोप साबित करने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि हर भारतीय नागरिक को निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार प्राप्त है और न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक देरी चिंता का विषय है।
थरूर ने यह टिप्पणी उमर खालिद के जेल में रहने के दौरान दिए गए एक इंटरव्यू को शेयर करते हुए दी है। उस बातचीत में उन्होंने अपनी लंबी न्यायिक प्रक्रिया, जेल जीवन और मानसिक स्थिति से जुड़े कई अनुभव साझा किए। उन्होंने दावा किया कि वर्षों से जेल में रहने के बावजूद अभी तक मुकदमे की सुनवाई पूरी तरह शुरू नहीं हो सकी है।
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This moving article on @UmarKhalidJNU in prison prompts a simple question: if he really has incited terrorism, why not prove it in a court of law? Why deny him the basic right of any Indian citizen accused of a crime, the right to a fair trial? Languishing six years behind bars,… — Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) June 30, 2026
यह है मामला
उमर खालिद को सितंबर 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा मामले की कथित साजिश से जुड़े आरोपों में गिरफ्तार किया गया था। उन पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) सहित कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। हालांकि, उन्होंने लगातार अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है। इस बीच, केंद्र सरकार ( भारतीय जनता पार्टी) पहले भी स्पष्ट कर चुकी है कि यह मामला पूरी तरह न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में है और जांच स्वतंत्र एजेंसियों द्वारा कानून के अनुसार की जा रही है। सरकार राजनीतिक प्रतिशोध के आरोपों को खारिज करती रही है।
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6 साल में पहला साक्षात्कार
2020 में जेल जाने के बाद अपने पहले इंटरव्यू में खालिद ने कहा कि जेल में रहते हुए सबसे कठिन होता है सूर्यास्त का समय जब सारे कैदियों को अंधेरा होने तक बाहर खड़ा किया जाता है। इसमें जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि वे मशहूर लेखक दोस्तोयेव्स्की की किताब पढ़ते थे और उन्होंने भी अपनी किताब में सूर्यास्त के समय मन की इस स्थिति का जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि ऐसा इसलिए होता है क्योंकि यह एहसास होने लगता है कि आपकी जिंदगी का एक और दिन कैद में बीत गया है। इस इंटरव्यू में उन्होंने 6 साल तक जेल में रहने से उनके मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य के बदलाव के बारे में भी बताया है।
सुप्रीम कोर्ट में खारिज याचिका
सुप्रीम कोर्ट पहले उमर खालिद की जमानत याचिका और समीक्षा याचिका को खारिज कर चुका है। अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि मामले की सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार आगे बढ़ेगी। फिलहाल शशि थरूर के ताजा बयान के बाद इस मामले को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। एक पक्ष इसे निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार से जोड़कर देख रहा है, जबकि दूसरा पक्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने तक अदालत के फैसले का इंतजार करने की बात कह रहा है।
