सत्य की जीत हुई…शराब घोटाला केस से जस्टिस स्वर्णकांता के अलग होने पर बोले अरविंद केजरीवाल
Arvind Kejriwal: शराब घोटाले की सुनवाई से जस्टिस स्वर्णकांता के अलग होने पर अरविंद केजरीवाल ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा- सत्य की जीत हुई।
- Written By: अर्पित शुक्ला
अरविंद केजरीवाल, (सोर्स- सोशल मीडिया)
Arvind Kejriwal on Justice Swarnkanta: शराब घोटाला केस से जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के अलग होने पर अरविंद केजरीवाल ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा, “सत्य की जीत हुई. गांधी जी के सत्याग्रह की एक बार फिर जीत हुई।” दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने बृहस्पतिवार को आम आदमी पार्टी (आप) के 5 नेताओं अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, दुर्गेश पाठक, संजय सिंह, सौरभ भारद्वाज के खिलाफ आबकारी नीति मामले के संबंध में उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर अपमानजनक पोस्ट करने के लिए आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की है।
जस्टिस शर्मा ने कहा कि दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कानूनी उपायों का सहारा लेने की जगह उनको बदनाम करने के इरादे से सोशल मीडिया पर एक सुनियोजित अभियान चलाया गया। जस्टिस शर्मा ने स्पष्ट किया कि सभी आरोपियों को आरोपमुक्त किए जाने के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर अब दूसरी बेंच सुनवाई करेगी।
सत्य की जीत हुई। गांधी जी के सत्याग्रह की एक बार फिर जीत हुई। — Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) May 14, 2026
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क्या कहा जस्टिस स्वर्ण कांता ने?
जस्टिस शर्मा ने कहा, अगर आप कोर्ट को धमकाएंगे कि आप मेरे हक में फैसला नहीं करोगे तो हम आपको बदनाम करेंगे, तो कोर्ट के पास भी ऐसे हथियार है कि वे ऐसी धमकियों से न डरें। भारत का कानून हमेशा निडर रहा है और हमेशा रहेगा, ऐसे हमलों के सामने कभी नहीं झुकेगा।
आप नेताओं के खिलाफ आपराधिक मानहानि का केस
जस्टिस स्वर्णकांता ने कहा, अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, दुर्गेश पाठक और संजय सिंह को आपराधिक मानहानि के लिए जिम्मेदार पाया गया है। सौरभ भारद्वाज ने पोस्ट कर कहा कि जस्टिस स्वर्ण कांता का यह रिश्ता क्या कहलाता है…तो मेरा जवाब है कि कंटेंप्ट कहलाता है। उन्होंने कहा कि ये आदेश किसी गुस्से या दुर्भावना से नहीं आया है, ये कंटेंम्नर की अपनी हरकतों की वजह से है।
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बता दें कि दिल्ली हाई कोर्ट ने जवाब दाखिल न करने के मुद्दे को गंभीरता से लिया है और जज के खिलाफ टिप्पणियों पर नाराजगी जताई है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने उन आरोपों और टिप्पणियों पर भी कड़ा रुख दिखाया, जिन्हें न्यायपालिका और जज के खिलाफ अपमानजनक पाया गया।
