

RJD Wins Bhojpur-Buxar MLC By-Election: बिहार में नई सरकार की गठन और सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद एनडीए को बड़ा झटका लगा है। दरअसल, राज्य की विधान परिषद की एक सीट पर हुए उपचुनाव में नीतीश कुमार की पार्टी जदयू के उम्मीदवार कन्हैया प्रसाद को हार का सामना करना पड़ा है। यहां से आरजेडी प्रत्याशी ने जीत हासिल की है। अब भोजपुर-बक्सर की एमएलसी सीट पर तेजस्वी यादव की नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनता दल का कब्जा हो गया है।
बता दें कि इससे पहले भोजपुर-बक्सर स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र की विधान परिषद सीट पर जदयू का कब्जा था। इस क्षेत्र से जनता दल यूनाइटेट के राधाचरण साह विधान परिषद के सदस्य थे, जो 2025 विधानसभा चुनाव में विधायक बनने के बाद इस सीट को छोड़ दिया था, जिसके बाद अब उपचुनाव कराया गया।
बिहार के मुख्यमंत्री पद से नीतीश कुमार के इस्तीफे और सम्राट चौधरी के सीएम बनने के बाद यह पहला चुनाव है, जिसमें एनडीए के उम्मीदवार की हार हुई है। भोजपुर-बक्सर के विधान परिषद सीट पर राजद के सोनू कुमार राय ने भारी अंतर से जीत हासिल किए हैं। यह हार जदयू के लिए बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। आरजेडी प्रत्याशी ने 340 वोटों से एमएलसी उपचुनाव में जीत कर पार्टी के कार्यकर्ताओं की खोई हुई आत्मविश्वास को और मजबूत कर दिया है। चुनावी नतीजों ने साफ संकेत दिया है कि एमएलसी के उपचुनाव में वोटर्स (मुखिया, वार्ड मेंबर और बीडीसी आदि) थे, जो कि सत्ताधारी जेडीयू के उम्मीदवार कन्हैया के बजाय राजद के सोनू राय के पक्ष में वोटिंग किए।
सोनू कुमार राय भोजपुर जिले के आरा शहर के मीरगंज इलाके के रहने वाले हैं। राजनीतिक पृष्ठभूमि से आने वाले सोनू कुमार के पिता लालदास राय भी बिहार विधान परिषद के सदस्य रह चुके हैं और वह राजद के वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं। राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए सोनू कुमार ने कन्हैया प्रसाद को हराकर चुनावी मैदान में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। ऐसा कहा जा रहा है कि सोनू कुमार का राजद सुप्रीमो लालू यादव और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव से उनके अच्छे रिश्ते हैं। यही वजह रही कि पार्टी ने उन्हें कठिन उपचुनाव में उम्मीदवार बनाया।
भोजपुर और बक्सर राजनीतिक रूप से काफी सक्रिय और अहम माने जाते हैं। इन दोनों जिले में विधानसभा की कुल 11 सीटें हैं। जिसमें से 10 सीटों पर एनडीए के विधायक हैं। 2025 विधानसभा चुनाव में हार के बाद उपचुनाव में मिली यह जीत राजद के लिए एक एनर्जी बूस्टर के जैसा है। वहीं, जदयू उम्मीदवार की हार एनडीए के लिए एक बड़ा मनोवैज्ञानिक झटका है। आरजेडी लगातार विधान परिषद में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रही है, जिससे सदन में विपक्ष की आवाज को और मजबूती मिल सके। पार्टी के लिए यह जीत इतनी आसान नहीं थी। इसके पीछे तेजस्वी यादव की रणनीति और जदयू के अंदर की भीतरघात भी एक बड़ा फैक्टर है। जिसे समय रहते आरजेडी ने बेहतर तरीके से उपचुनाव में भुनाया।
भोजपुर-बक्सर एमएलसी उपचुनाव में आरजेडी को मिली जीत में तेजस्वी यादव का नया समीकरण ने अहम भूमिका निभाया। पार्टी ने इस सियासी मुकाबले में केवल मुस्लिम-यादव समीकरण के भरोसे रहने के बजाय 'सवर्ण और पिछड़ा' गठजोड़ पर काम किया। भूमिहार समाज से आने वाले सोनू कुमार राय की उम्मीदवारी ने स्थानीय स्तर पर जातिगत दीवारें तोड़ीं। तेजस्वी ने साफ संदेश दिया कि राजद अब केवल एक खास वर्ग की पार्टी नहीं, बल्कि सबको साथ लेकर चलने वाली पार्टी है।
राजद तेजस्वी यादव के नेतृत्व में युवाओं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को साधने में सफल रही। 2025 के विधानसभा चुनाव में तेजस्वी यादवा की पार्टी ने पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय और उनके अधिकारों के मुद्दे को जोर-शोर से उठाया था। महागठबंधन के घटक दलों ने एकजुट किया, जो आरजेडी उम्मीदवार सोनू राय के जीत का आधार बनी। इस जीत के बाद आरजेडी खेमे में जश्न का माहौल है।