बस्तर के इंद्रावती जंगलों से नक्सली खौफ कम होते ही बाघ और पैंगोलिन बने शिकारियों का निशाना

Indravati National Park Wildlife Poaching : इंद्रावती में नक्सलियों का खौफ घटने से वन्यजीवों का शिकार बढ़ा है। बाघ और तेंदुए के बाद अब पैंगोलिन तस्करों के निशाने पर आ गए हैं।
Poaching of tigers, leopards, and now pangolins has risen
इंद्रावती नेशनल पार्क वाइल्डलाइफ पोचिंगसोर्स - नवभारत लाइव
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Highlights

  • बस्तर के इंद्रावती जंगलों में नक्सलियों की हलचल कम हुई है।

  • अब इंसान बेखौफ होकर जंगलों में जा रहे हैं।

  • लेकिन इंसानों के साथ शिकारी भी जंगलों में पहुंच गए हैं।

  • बाघ और तेंदुए के बाद अब पैंगोलिन का शिकार बढ़ा है।

  • वन विभाग के सामने जानवरों को बचाने की बड़ी चुनौती है।

Wildlife Smuggling In Bastar Forest : छत्तीसगढ़ के बस्तर में स्थिति तेजी से बदल रही है। पहले लोग नक्सलियों के डर से जंगलों में नहीं जाते थे। अब वहां नक्सलियों का प्रभाव काफी कम हो गया है। इसके कारण लोगों का आवागमन जंगलों में बढ़ गया है। लेकिन इससे वन्यजीवों के लिए नई मुसीबत पैदा हो गई है। शिकारी अब आसानी से घने जंगलों तक पहुंच रहे हैं।

बाघ के बाद पैंगोलिन निशाने पर

बीजापुर इलाके में हाल ही में बाघ का शिकार हुआ। तेंदुए की खाल की तस्करी के मामले भी सामने आए। अब दंतेवाड़ा के गीदम से पैंगोलिन की खाल बरामद हुई। टीम ने करीब 14 किलो शल्क जब्त किए हैं। अनुमान है कि छह से अधिक पैंगोलिन मारे गए। पुलिस ने इस मामले में छह आरोपियों को पकड़ा है। पकड़े गए पांच आरोपी बीजापुर जिले के रहने वाले हैं।

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नक्सलवाद घटने से बढ़ा नया खतरा

इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान काफी बड़ा है। यह इलाका लंबे समय तक नक्सल प्रभावित रहा। वहां वन विभाग की गश्त कम होती थी। नक्सलियों के डर से आम लोग भी दूर रहते थे। वही डर वन्यजीवों के लिए एक सुरक्षा कवच बना था। अब नक्सली गतिविधियां कमजोर पड़ चुकी हैं। तस्कर अब इस मौके का पूरा फायदा उठा रहे हैं।

दुर्लभ जीवों का आशियाना है इंद्रावती

इंद्रावती टाइगर रिजर्व बेहद खास है। यह केवल बाघों का घर नहीं है। यहां दुर्लभ वन भैंसा भी पाया जाता है। तेंदुआ और भालू भी भारी संख्या में मौजूद हैं। पैंगोलिन जैसे जीवों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग है। इनका शिकार जंगल के संतुलन को बिगाड़ रहा है। पारिस्थितिक संतुलन के लिए यह खतरनाक है।

सुरक्षा के सामने बड़ी चुनौतियां

जंगल में अब पर्यटन शुरू करने की चर्चा है। सफारी शुरू करने से पहले सुरक्षा इंतजाम जरूरी हैं। जंगलों में नियमित गश्त बढ़ाना बेहद आवश्यक है। कैमरा ट्रैप की संख्या बढ़ानी होगी। स्थानीय ग्रामीणों की मदद भी लेनी पड़ेगी। तभी शिकारियों के नेटवर्क को तोड़ा जा सकेगा।

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