कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघ की मौत पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट सख्त, सरकार से 2 हफ्ते में मांगी जांच रिपोर्ट

Kanha Tiger Reserve News : कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई। अदालत ने सितंबर-अक्टूबर 2026 में हुई दो बाघों की मौत की जांच कर दो सप्ताह में रिपोर्ट मांगी।
Madhya Pradesh High Court seeks a report on suspected tiger deaths in Kanha Tiger Reserve
मध्य प्रदेश हाईकोर्टफोटो सोर्स- सोशल मीडिया
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Highlights:

  • कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत पर हाईकोर्ट सख्त।

  • राज्य सरकार से दो सप्ताह में जांच रिपोर्ट मांगी।

  • याचिका में CDV संक्रमण से 20 बाघों की मौत का दावा।

  • पांच बाघों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में वायरस का जिक्र होने का दावा।

  • टाइगर रिजर्व के बजट में कथित कटौती पर केंद्र से भी जवाब तलब।

Madhya Pradesh High Court On Kanha Tiger Death : मध्यप्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) संक्रमण से बाघों की मौत की आशंका पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।

अदालत ने सितंबर और अक्टूबर 2026 में हुई दो बाघों की मौत के कारणों की जांच कर राज्य सरकार को दो सप्ताह में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर 2026 को होगी।

जनहित याचिका पर युगलपीठ में सुनवाई

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे और न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने मामले की सुनवाई की। मुंबई के चेंबूर निवासी अधिवक्ता सुब्रत चक्रवर्ती की ओर से दायर जनहित याचिका में कान्हा में बाघों की संदिग्ध मौतों और संक्रमण की रोकथाम के उपायों पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अंशुमान सिंह और अधिवक्ता प्रतीक रूसिया ने पैरवी की।

याचिका में 20 बाघों की मौत का दावा

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में दावा किया गया कि कान्हा में अब तक 20 बाघों की संदिग्ध मौतें कैनाइन डिस्टेंपर वायरस के कारण हुई हैं। याचिका के मुताबिक, पांच बाघों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में वायरस को मौत का कारण बताया गया है। इसमें यह भी कहा गया कि यह संक्रमण बाघों के अलावा कई अन्य जानवरों के लिए भी घातक हो सकता है। इन दावों के मद्देनजर संक्रमण के कारणों और रोकथाम के उपायों पर सवाल उठाए गए हैं।

क्या है कैनाइन डिस्टेंपर वायरस?

कैनाइन डिस्टेंपर वायरस एक संक्रामक रोग है, जो जानवरों के तंत्रिका तंत्र, व्यवहार और सामान्य गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है। याचिका में आशंका जताई गई है कि संक्रमण से बाघों की शिकार करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। गंभीर स्थिति में संक्रमित बाघ इतने कमजोर हो सकते हैं कि उनके लिए चलना-फिरना भी मुश्किल हो जाए। इसी आशंका के आधार पर संक्रमण की रोकथाम को लेकर प्रभावी कदम उठाने की जरूरत बताई गई है।

दो हजार से अधिक कुत्तों का टीकाकरण

सुनवाई के दौरान संक्रमण के संभावित स्रोत और रोकथाम के उपायों पर भी चर्चा हुई। बाघों में संक्रमण फैलने के संभावित स्रोत के रूप में कुत्तों का मुद्दा उठाया गया। पिछली सुनवाई में राज्य सरकार ने अदालत को बताया था कि कान्हा सहित मध्यप्रदेश के अन्य टाइगर रिजर्व के आसपास दो हजार से अधिक कुत्तों का टीकाकरण कराया गया है। इसके बावजूद बाघों की मौतों का मुद्दा सामने आने के बाद संक्रमण रोकने के उपायों की प्रभावशीलता पर सवाल उठे हैं।

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टाइगर रिजर्व के बजट में कमी का मुद्दा

जनहित याचिका में टाइगर रिजर्व के लिए केंद्र से मिलने वाली राशि में कथित कमी और रिक्त पदों का मुद्दा भी उठाया गया है। याचिकाकर्ता के अनुसार, वर्ष 2016 में मध्यप्रदेश के टाइगर रिजर्व के लिए करीब 120 करोड़ रुपये मिले थे, जबकि 2026 में यह राशि लगभग 30 करोड़ रुपये रह गई। अदालत ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से भी जवाब मांगा है। अब राज्य सरकार को बाघों की मौत के कारणों की जांच रिपोर्ट दो सप्ताह में पेश करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को निर्धारित है।

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