नौकरी रहते हुए भी खोने का डर बढ़ा 58% कर्मचारी ‘FOBO’ का शिकार।
Job Anxiety FOBO Report 2026 : आधुनिक दौर में नौकरी का डर अब सिर्फ नौकरी जाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक नई चिंता तेजी से उभर रही है- FOBO यानी अप्रचलित हो जाने का डर।
ETS की 2026 ह्यूमन प्रोग्रेस रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में 58% कर्मचारी इस बात से चिंतित हैं कि वे अपने ही काम में धीरे-धीरे अप्रासंगिक होते जा रहे हैं। यह चिंता अब एक वैश्विक ट्रेंड बन चुकी है, जहां लोग नौकरी में रहते हुए भी खुद को पीछे छूटता हुआ महसूस कर रहे हैं।
रिपोर्ट में 18 देशों के 32,000 से ज्यादा लोगों की राय शामिल की गई है, जिसमें 61% लोगों ने माना कि उनकी नौकरी कभी भी बदल सकती है या खत्म हो सकती है- चाहे वजह नई टेक्नोलॉजी हो, बदलती स्किल्स हों या कार्यस्थल की नई संरचना।
पिछले एक साल में 67% कर्मचारियों ने अपने काम में बड़े बदलाव महसूस किए हैं, जैसे नए डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल, नई जिम्मेदारियां या काम करने के तरीके में बदलाव। इसका असर यह हुआ है कि कर्मचारी लगातार काम करने के साथ-साथ खुद को अपडेट रखने की दौड़ में भी लगे हुए हैं, जिससे मानसिक थकान बढ़ रही है।
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रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि Gen Z सबसे ज्यादा इस डर से जूझ रही है, जहां 63% युवा कर्मचारियों ने खुद को ‘obsolete’ होने के खतरे में बताया। ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है। कर्मचारियों का मानना है कि अभी उनके 32% काम में AI शामिल है, जो अगले दो साल में 52% तक पहुंच सकता है।
ऐसे में 60% लोग दबाव में AI टूल्स सीख रहे हैं, जबकि 65% इसे सिर्फ प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। FOBO अब सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि बदलते कार्यस्थल का मनोवैज्ञानिक दबाव बन चुका है, जहां सबसे बड़ा डर नौकरी खोने का नहीं, बल्कि समय के साथ पीछे छूट जाने का है।