CBSE की नई पहल (सोर्स-सोशल मीडिया)
CBSE AI Based Evaluation System: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने शिक्षा प्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए AI आधारित परीक्षा की शुरुआत की है। इस नई पहल के माध्यम से स्कूलों में तैनात काउंसलरों और वेलनेस शिक्षकों के स्किल एवं उनकी कार्यक्षमता का सूक्ष्म आकलन किया जाएगा। बोर्ड का मुख्य उद्देश्य बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक अधिक सक्षम और संवेदनशील काउंसलिंग ढांचा तैयार करना है। CBSE की AI-आधारित मूल्यांकन प्रणाली के जरिए अब विशेषज्ञों की केवल किताबी जानकारी नहीं बल्कि उनके व्यावहारिक अनुभव को भी परखा जाएगा।
CBSE की इस अनूठी पहल का प्राथमिक लक्ष्य काउंसलरों की क्षमताओं को बढ़ाना और उनके काम की गुणवत्ता में सुधार करना है ताकि वे छात्रों की मदद कर सकें। यह विशेष मूल्यांकन कार्यक्रम यह जांचने के लिए बनाया गया है कि काउंसलर बच्चों की जटिल मानसिक और भावनात्मक परेशानियों को संभालने में कितने सक्षम हैं। बोर्ड चाहता है कि स्कूलों में एक ऐसा वातावरण बने जहां छात्रों को आधुनिक और वैज्ञानिक तरीके से सही मार्गदर्शन और सहायता प्राप्त हो सके।
यह पूरी परीक्षा प्रक्रिया आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘डिजी-एग्जाम’ पर आयोजित की जा रही है जिसमें AI प्रोक्टरिंग तकनीक का बखूबी इस्तेमाल किया जाता है। AI आधारित यह सिस्टम रीयल-टाइम निगरानी सुनिश्चित करता है जिससे परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष और सुरक्षित माहौल में संपन्न होती है ताकि कोई गड़बड़ी न हो। काउंसलरों को यह सुविधा दी गई है कि वे अपने घर से ही इस मूल्यांकन प्रक्रिया में शामिल होकर अपनी प्रोफेशनल योग्यता का प्रदर्शन कर सकते हैं।
इस परीक्षा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें केवल किताबी ज्ञान की परीक्षा नहीं ली जाती बल्कि काउंसलर के वास्तविक व्यवहार को भी जांचा जाता है। सिस्टम यह देखता है कि काउंसलर असल जिंदगी की कठिन स्थितियों को कैसे संभालते हैं और छात्रों की समस्याओं पर उनके निर्णय लेने की क्षमता कैसी है। इसके माध्यम से नैतिक फैसलों और सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण को मापने का प्रयास किया जाता है ताकि काउंसलिंग की गुणवत्ता को वैश्विक स्तर तक ले जाया जाए।
CBSE ने इस वृहद कार्यक्रम के तहत कुल 10,000 काउंसलरों को चरणों में शामिल करने का लक्ष्य रखा है जिसकी शुरुआत फरवरी 2026 से हो चुकी है। इस परीक्षा में वे सभी प्रोफेशनल हिस्सा ले सकते हैं जो CBSE से संबद्ध स्कूलों में सामाजिक, भावनात्मक या वेलनेस शिक्षक के रूप में कार्य कर रहे हैं। स्कूलों को अपने काउंसलरों का सही डेटा पोर्टल पर अपडेट रखने का निर्देश दिया गया है ताकि इस महत्वपूर्ण मूल्यांकन प्रक्रिया में कोई पीछे न छूटे।
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शिक्षा क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का यह उपयोग न केवल पारदर्शिता लाएगा बल्कि शिक्षकों और काउंसलरों को अपनी कमियों को पहचान कर सुधारने का मौका देगा। जब काउंसलर अधिक कुशल होंगे तो छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर इसका सीधा सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और स्कूलों में एक स्वस्थ शैक्षणिक माहौल विकसित होगा। यह पहल साबित करती है कि तकनीक की मदद से मानवीय संवेदनाओं और प्रोफेशनल स्किल के बीच एक बेहतर संतुलन स्थापित किया जा सकता है।