प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस: बिना पीएचडी और नेट के भी अब बन सकेंगे यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर

UGC Teacher Guidelines: UGC की प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस योजना के तहत अब अनुभवी विशेषज्ञ बिना पीएचडी के भी यूनिवर्सिटी में पढ़ा सकेंगे, जिससे छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान और इंडस्ट्री का अनुभव मिल सकेगा।
Professor of Practice: Become a University Professor Without PhD or NET under UGC Rules
लोक गायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी (सोर्स-सोशल मीडिया)
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New UGC Professor Recruitment Rules: शिक्षा जगत में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने एक क्रांतिकारी बदलाव की शुरुआत की है जिसके तहत अब उच्च डिग्रियों की अनिवार्यता समाप्त हो गई है। अगर आपके पास अपने कार्यक्षेत्र में वर्षों का अनुभव है तो आप बिना पीएचडी या नेट पास किए भी बड़े विश्वविद्यालयों में पढ़ा सकते हैं। इस नई पहल का नाम 'प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस' रखा गया है जिसका मुख्य उद्देश्य किताबी ज्ञान और व्यावहारिक दुनिया के बीच की दूरी कम करना है। न्यू यूजीसी प्रोफेसर रिक्रूटमेंट रूल्स के तहत अब विशेषज्ञता को ही सबसे बड़ी डिग्री के रूप में मान्यता दी जा रही है।

कौन बन सकते हैं प्रोफेसर?

प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस वे अनुभवी पेशेवर होते हैं जिन्होंने अपने विशिष्ट क्षेत्र में महारत हासिल की हो और समाज में अपना एक विशेष स्थान बनाया हो। इसके लिए पारंपरिक शैक्षणिक योग्यता के बजाय व्यक्ति का कम से कम 15 साल का कार्य अनुभव देखा जाता है ताकि वे छात्रों का मार्गदर्शन कर सकें। इसमें अनुभवी पत्रकार, कलाकार, उद्योगपति, रिटायर्ड सेना अधिकारी या तकनीकी विशेषज्ञ जैसे लोग शामिल होकर शिक्षा प्रणाली को अधिक समृद्ध बना सकते हैं।

योजना का मुख्य उद्देश्य

अक्सर यह देखा जाता है कि छात्र डिग्री तो प्राप्त कर लेते हैं लेकिन जब वे नौकरी के लिए बाजार में जाते हैं तो उन्हें व्यावहारिक ज्ञान की कमी खलती है। प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस इसी समस्या का प्रभावी समाधान प्रदान करते हैं क्योंकि वे छात्रों को सीधे वही हुनर सिखाते हैं जिसकी वर्तमान बाजार में मांग है। इनके माध्यम से छात्रों को न केवल इंटर्नशिप और प्लेसमेंट में मदद मिलती है बल्कि कैंपस में नए आइडियाज और स्टार्टअप संस्कृति को भी बढ़ावा मिलता है।

नियुक्ति और पात्रता

यूजीसी के नियमों के अनुसार इंजीनियरिंग, विज्ञान, मीडिया, साहित्य और कला जैसे विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ इस सम्मानजनक पद के लिए आवेदन करने के पात्र होते हैं। यह नियुक्ति शुरुआत में आमतौर पर एक वर्ष के लिए की जाती है जिसे बाद में उम्मीदवार के प्रदर्शन के आधार पर और आगे बढ़ाया जा सकता है। इस योजना का लाभ वे सभी लोग उठा सकते हैं जिन्होंने अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है और वे अपनी विशेषज्ञता को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना चाहते हैं।

सीसीएसयू की नई मिसाल

मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (CCSU) ने हाल ही में सुप्रसिद्ध लोक गायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी को प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस नियुक्त करके एक शानदार उदाहरण पेश किया है। मालिनी अवस्थी के पास लोक संगीत और भारतीय संस्कृति का दशकों का लंबा अनुभव है जो अब विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए एक बड़ी प्रेरणा बनेगा। उनके जुड़ने से छात्रों को कला के क्षेत्र में रोजगार के व्यावहारिक गुर सीखने को मिलेंगे और क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण को भी एक नई दिशा प्राप्त होगी।

शिक्षा में नया बदलाव

यह कदम भारतीय शिक्षा प्रणाली को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने और छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने में एक मील का पत्थर साबित होगा। उद्योगों और विश्वविद्यालयों के बीच का यह अनूठा तालमेल आने वाले समय में देश के युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खोलने की क्षमता रखता है। सरकार का यह मास्टरप्लान शिक्षा को केवल डिग्रियों तक सीमित न रखकर उसे वास्तविक कौशल और अनुभव आधारित बनाने की दिशा में एक साहसिक प्रयास है।

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