
कैप्टन शांभवी (Image- Social Media)
Ajit Pawar Plane Crash: महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार की विमान हादसे में हुई मौत ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस हादसे में पायलट सुमित कुमार और फर्स्ट ऑफिसर शांभवी पाठक की भी मौके पर ही जान चली गई। दोनों ही अनुभवी चार्टर पायलट थे और Learjet 45 उड़ा रहे थे।
शांभवी पाठक वर्ष 2022 से VSR Ventures के साथ काम कर रही थीं। उन्होंने मुंबई यूनिवर्सिटी से एयरोनॉटिक्स और एविएशन साइंस में बीएससी की पढ़ाई की थी। इसके बाद 2018-19 में न्यूजीलैंड इंटरनेशनल कमर्शियल पायलट अकादमी से ट्रेनिंग ली और न्यूजीलैंड सिविल एविएशन अथॉरिटी से कमर्शियल पायलट लाइसेंस हासिल किया। वहीं सुमित कुमार भी एक अनुभवी कैप्टन थे।
प्राथमिक जानकारी के अनुसार, यह हादसा घने कोहरे के कारण हुआ। लैंडिंग के दौरान पायलट का विमान से नियंत्रण हट गया और प्लेन एयरपोर्ट के पास एक खेत में क्रैश हो गया। सुमित कुमार और शांभवी पाठक दोनों चार्टर पायलट थे। ऐसे में जानना जरूरी है कि चार्टर पायलट कौन होते हैं और उनका काम क्या होता है।
चार्टर पायलट बड़े कमर्शियल विमानों की बजाय प्राइवेट जेट या छोटे विमानों को उड़ाते हैं। ये पायलट किसी कंपनी, बिजनेसमैन या व्यक्तिगत क्लाइंट के लिए काम करते हैं। कभी ये सिर्फ एक उड़ान के लिए होते हैं, तो कभी पूरे साल के कॉन्ट्रैक्ट पर काम करते हैं। इनके यात्रियों की संख्या कम होती है और ये अक्सर छोटे एयरपोर्ट्स पर भी उड़ान भरते हैं।
चार्टर पायलट बनने के कई रास्ते होते हैं-
चार्टर कंपनी में नौकरी: यह सबसे आम तरीका है। NetJets और Flexjet जैसी कंपनियां प्राइवेट जेट्स का संचालन करती हैं। यहां काम करने के लिए बड़े एयरलाइंस जैसा ही फ्लाइट एक्सपीरियंस चाहिए होता है। अक्सर पायलट पहले फ्लाइट इंस्ट्रक्टर, पाइपलाइन पेट्रोल या रीजनल एयरलाइन में काम करके अनुभव जुटाते हैं।
हाइब्रिड कंपनी मॉडल: कुछ कंपनियां किसी एक क्लाइंट के लिए विमान उड़ाती हैं और जरूरत पड़ने पर उसे चार्टर पर भी देती हैं। यहां पायलट को एक ही तरह के विमान उड़ाने का मौका मिलता है और क्लाइंट भी तय रहता है।
कॉन्ट्रैक्ट पायलट बनना: यह सबसे ज्यादा आजादी वाला विकल्प है। इसमें पायलट किसी एक कंपनी से स्थायी रूप से नहीं जुड़ता, बल्कि जरूरत के हिसाब से काम करता है। जब किसी रेगुलर पायलट की छुट्टी या तबीयत खराब होती है, तब कॉन्ट्रैक्ट पायलट को बुलाया जाता है।
लाइसेंस और ट्रेनिंग: सबसे पहले कमर्शियल पायलट लाइसेंस (CPL) जरूरी होता है। इसके लिए 12वीं में फिजिक्स और मैथ्स होना चाहिए। इसके बाद फ्लाइंग स्कूल से ट्रेनिंग ली जाती है। CPL के साथ इंस्ट्रूमेंट रेटिंग, मल्टी-इंजन रेटिंग और खास विमान के लिए टाइप रेटिंग भी जरूरी होती है।
फ्लाइट टाइम: चार्टर पायलट के लिए भी पर्याप्त टोटल फ्लाइट टाइम और टर्बाइन टाइम जरूरी होता है। शुरुआत में छोटे विमानों या इंस्ट्रक्टर के तौर पर उड़ान भरकर अनुभव बढ़ाया जाता है।
खास विमान का अनुभव: कई चार्टर पायलट किसी एक खास विमान में विशेषज्ञता हासिल कर लेते हैं, जिससे नौकरी के मौके बढ़ जाते हैं।
चार्टर पायलट की जिंदगी रोमांच से भरी होती है। अलग-अलग एयरपोर्ट्स, अलग-अलग विमान और अलग-अलग तरह के यात्री कभी बिजनेस लीडर्स, कभी खास मेहमान, तो कभी फैमिली ट्रिप। यह काम रोज़मर्रा की रूटीन फ्लाइंग से काफी अलग होता है और हर दिन नया अनुभव देता है।
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चार्टर पायलट की कमाई उनके अनुभव, कंपनी और विमान के प्रकार पर निर्भर करती है। शुरुआत में 50 हजार से 1 लाख रुपये प्रति माह तक सैलरी मिल सकती है। अनुभव बढ़ने पर यह 2 से 5 लाख रुपये या उससे ज्यादा भी हो सकती है। बड़े ऑपरेटर्स जैसे NetJets में पैकेज और बेहतर होता है। वहीं कॉन्ट्रैक्ट पायलट अक्सर दिन के हिसाब से भुगतान लेते हैं।






