ट्रंप के हाथ से फिसल रहा ईरान युद्ध! होर्मुज स्ट्रेट खुलावने के लिए मांगी 7 देशों से मदद, NATO को दी धमकी

US-Iran War: ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट बंद करने से तेल और गैस के दाम बढ़ गए। ट्रंप ने सात देशों से सहयोग मांगा, ईरान को कमजोर बताया और अमेरिकी सैन्य शक्ति के भरोसे सुरक्षा का दावा किया।
Hormuz Strait Crisis
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Hormuz Strait Crisis: ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने के बाद दुनिया भर में तेल और गैस के दाम बढ़ गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की नौसेना और वायुसेना को खत्म करने का दावा किया है और साथ ही इस रणनीतिक जलसंधि को खोलने के लिए अन्य देशों से सैन्य हस्तक्षेप की मांग की है। रविवार को ट्रंप ने बताया कि वह इस मुद्दे पर सात देशों से बातचीत कर रहे हैं।

ट्रंप ने पहले चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अन्य देशों से अनुरोध किया था कि वे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा के लिए युद्धपोत भेजें। इसके अलावा, उन्होंने नाटो देशों को चेताया कि अगर वे अमेरिका की बातों को नजरअंदाज करते रहेंगे, तो नाटो का भविष्य खतरे में पड़ सकता है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस क्षेत्र की रक्षा लंबे समय से कर रहा है, लेकिन अन्य देशों, विशेषकर चीन जैसे देशों, के लिए यह और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उनका अधिकांश तेल इसी मार्ग से आता है।

ऑस्ट्रेलिया ने सेना भेजने से इनकार किया

हालांकि डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि सात देशों से बातचीत हो रही है, लेकिन अभी तक किसी ने अमेरिका का मिडिल ईस्ट में सैन्य समर्थन करने का स्पष्ट संकेत नहीं दिया है। ऑस्ट्रेलिया ने कहा कि वह ट्रंप के अनुरोध के बावजूद होर्मुज स्ट्रेट में नौसेना नहीं भेजेगा। खाड़ी देशों (सऊदी अरब, UAE, क़तर) ने भी रक्षा-उन्मुख नीति अपनाई है और ईरान पर सैन्य कार्रवाई में सहयोग नहीं किया।

ट्रंप ने बताया कि दो हफ्ते पहले उन्होंने UK के प्रधानमंत्री से बात की थी, जब ब्रिटेन अपने दो विमान वाहक जहाज भेजने में हिचकिचा रहा था। अमेरिका की कार्रवाई पूरी होने के बाद ही ब्रिटेन ने जहाज भेजने का प्रस्ताव दिया। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका "याद रखेगा" कि किन देशों ने मदद नहीं की।

होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का कब्जा

अमेरिका अन्य देशों से सहयोग मांग रहा है ताकि वे होर्मुज की निगरानी में मदद कर सकें। ट्रंप का कहना है कि यह मिशन आसान है क्योंकि ईरान अब कमजोर हो चुका है। उन्होंने दावा किया कि ईरान के पास अब बहुत कम मिसाइलें और ड्रोन बचे हैं, और अमेरिका ने उनके नए हथियार बनाने की क्षमता को नष्ट कर दिया है। अमेरिका ईरान के ड्रोन निर्माण स्थलों पर हमले कर रहा है।

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