

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदलने के लिए कुछ आवश्यक कदम उठाए हैं। जिसके चलते ट्रंप ने दुनिया के सभी देशों पर टैरिफ लगाने का फैसला लिया है। इस टैरिफ वॉर के चलते अमेरिका बाकी देशों से मोटा टैक्स वसूलना चाहता है।
ट्रंप ने चीन पर 145 प्रतिशत तक का टैरिफ लगाया है। साथ ही भारत को ट्रंप ने टैरिफ किंग का खिताब दिया है। इस कारण अमेरिका खुद को इकोनॉमी की रेस में सबसे आगे रखना चाहता है, ताकि उसकी बादशाहत बनी रहे। हालांकि इसे कुछ समय के लिए टाल दिया है।
हाल ही में वर्ल्ड ऑफ स्टेटास्टिक्स ने एक रिपोर्ट जारी की है। जिसके अनुसार साल 2003 से 2023 तक के पेटर्न को समझने का प्रयास करें तो अर्थव्यवस्था और जीडीपी की रेस में चीन और भारत दोनों ही सबसे आगे रहे हैं। जबकि अमेरिका इस दौड़ में 5वें स्थान पर भी नहीं हैं।
साथ ही साल 2025 से अगले 50 साल के पैटर्न को समझने की प्रयास किया जाए तो भारत के इस दौड़ में सबसे अव्वल रहने की आशंका जतायी जा रही है। जबकि चीन और अमेरिका इस रेस में काफी पीछे रह सकते हैं। इसीलिए डोनाल्ड ट्रंप की नींद उड़ी हुई है। डब्ल्यूओएस की रिपोर्ट के अनुसार ऐसा लग रहा है कि ट्रंप को सपना देख रहे हैं उसका पूरा कठिन हैं। एक ऐसा समय भी था, जब भारतीय अर्थव्यवस्था 1 ट्रिलियन की भी आधी थी और चीन अपनी स्पीड बढ़ाने की कोशिश कर रहा था। उस समय अमेरिका और यूरोपीय देश इसमें सबसे ऊपर थे।
पिछले 20 और 22 सालों की रेस में अमेरिका का नाम तो बिल्कुल गायब हो गया है। साल 2003 से लेकर साल 2023 तक चीन की अर्थव्यवस्था की ग्रोथ में तकरीबन 1000 प्रतिशत का इजाफा देखने के लिए मिला है। साल 2023 में चीन की अर्थव्यवस्था का साइज 17.80 ट्रिलियन डॉलर हो चुका था। जबकि साल 2025 में चीन की अर्थव्यवस्था का साइज 19.23 ट्रिलियन डॉलर हो चुका है। इन 20 सालों में चीन ग्रोथ के मामले में सबसे आगे रहा है। साथ ही भारतीय अर्थव्यवस्था के साइज में भी इजाफा देखने के लिए मिला है। आंकड़ों को देखा जाए तो साल 2023 में 3.5 ट्रिलियन डॉलर थी। 20 साल में ग्रोथ का आंकड़ा 500 प्रतिशत से ज्यादा का देखने के लिए मिला है। वर्तमान समय यानी साल 2025 में भारत की अर्थव्यवस्था का साइज 4 ट्रिलियन डॉलर हो चुका है।
अगर आज से तकरीबन 20 से 22 साल पहले की ग्लोबल इकोनॉमी की तस्वीर देखी जाए तो आज ये पूरी तरह से बदल गई हैं। मैक्रोट्रेंड के आंकड़ों के अनुसार, उस समय दुनिया की सबसे बड़ी इकोनॉमी अमेरिका की जीडीपी 11 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा थी। वही दूसरी ओर चीन इस मोर्चे पर काफी पीछे था। फिलहाल मैक्रोट्रेंड के आंकड़ों के अनुसार, चीन की जीडीपी 1.66 ट्रिलियन डॉलर पर रही थी। जिसका साफ मतलब है कि अमेरिका चीन की तुलना में करीब 10 गुना आगे था। साथ ही अगर भारत की बात की जाए तो आज से 20 और 22 साल पहले इस ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी कहीं पर भी नहीं दिखायी देती थी।