यूपी में अब प्रॉपर्टी रजिस्ट्री टाइटल-बेस्ड सिस्टम से होगी (सोर्स- सोशल मीडिया)
UP Business News: उत्तर प्रदेश में संपत्ति खरीदने वालों के लिए एक बड़ी और ऐतिहासिक राहत की खबर है। अब राज्य में जमीन की रजिस्ट्री केवल कागजी दस्तावेजों के आधार पर नहीं होगी। योगी सरकार ने दशकों पुरानी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को बदलते हुए, अब इसे ‘टाइटल-बेस्ड सिस्टम’ पर आधारित करने का फैसला लिया है। यह मास्टरस्ट्रोक न केवल रियल एस्टेट मार्केट में पारदर्शिता बढ़ाएगा, बल्कि खरीदारों को कानूनी सुरक्षा की एक मजबूत गारंटी भी देगा।
उत्तर प्रदेश में जमीन और प्रॉपर्टी से जुड़े फर्जीवाड़े, धोखाधड़ी और लंबे कोर्ट केस अब जल्द ही अतीत की बात हो सकते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्य में संपत्ति रजिस्ट्री के नियमों में एक ऐतिहासिक और बड़ा बदलाव करने का निर्णय लिया है। यह बदलाव प्रॉपर्टी रजिस्ट्री को केवल ‘डॉक्यूमेंट-बेस्ड’ से बदलकर ‘टाइटल-बेस्ड’ सिस्टम पर ले जाएगा। इसका सीधा मतलब है कि अब केवल कागजात पेश कर देने से रजिस्ट्री नहीं होगी, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड में जमीन के असली मालिक का सत्यापन होने के बाद ही रजिस्ट्री हो सकेगी। यह कदम राज्य के रियल एस्टेट सेक्टर को सुरक्षित और अधिक भरोसेमंद बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।
अभी तक, उत्तर प्रदेश में रजिस्ट्री केवल उन दस्तावेजों के आधार पर होती थी जिन्हें विक्रेता और खरीदार प्रस्तुत करते थे। इस पुरानी व्यवस्था का फायदा उठाकर कई बार जालसाजों ने फर्जी कागजात के दम पर रजिस्ट्री करा ली। इसकी वजह से, एक ही जमीन को कई बार बेच दिया गया, दूसरों की संपत्ति का सौदा कर दिया गया और लाखों मामले अदालतों में सालों तक लटके रहे, जिससे आम जनता की परेशानी बढ़ती गई।
इस गंभीर समस्या को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रजिस्ट्रेशन विभाग को निर्देश दिया कि वह एक ऐसी सुरक्षित और सत्यापन-आधारित प्रणाली लागू करे जो टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके धोखाधड़ी को रोक सके। इसी निर्देश के बाद अब ‘टाइटल-बेस्ड रजिस्ट्री’ का मॉडल लागू किया जा रहा है।
कानूनी जानकारों के अनुसार, टाइटल-बेस्ड रजिस्ट्री के तहत अब संपत्ति की रजिस्ट्री से पहले सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि प्रॉपर्टी को बेचने वाला व्यक्ति ही वास्तव में उसका कानूनी मालिक (Legal Owner) है।
इस प्रक्रिया को मजबूत बनाने के लिए राजस्व विभाग, नगर निकायों और रजिस्ट्री विभाग के सभी रिकॉर्ड्स को आपस में ऑनलाइन लिंक किया जाएगा। अब सब-रजिस्ट्रार सीधे ऑनलाइन रिकॉर्ड में यह देख सकेगा कि जमीन या संपत्ति का ‘साफ-सुथरा टाइटल’ किसके नाम पर है। केवल उन्हीं सौदों को रजिस्टर्ड किया जाएगा, जिनमें विक्रेता के नाम पर स्पष्ट मालिकाना हक उपलब्ध होगा। यह मॉडल पहले से ही दिल्ली और हरियाणा जैसे राज्यों में सफलता से लागू किया जा चुका है।
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योगी सरकार के इस बड़े फैसले से प्रॉपर्टी खरीदारों को सबसे ज्यादा फायदा सुरक्षा और विश्वसनीयता के रूप में मिलेगा।
हालाकि, विशेषज्ञ यह सलाह भी देते हैं कि खरीदारों को रजिस्ट्री के अलावा अन्य गैर-रजिस्ट्री योग्य दस्तावेजों के लिए अपनी तरफ से भी पूरी सावधानी और जांच-पड़ताल करनी चाहिए।