इन 2 कारणों से धराशायी हुआ शेयर बाजार, 3 दिन में निवेशकों के डूबे 8 लाख करोड़; एक्सपर्ट की चेतावनी

Share Market: बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप घटकर 463.82 लाख करोड़ रुपये पर आ गया, जो इसके पिछले कारोबारी दिन यानी मंगलवार को 464.91 लाख करोड़ रुपये रहा था।
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शेयर मार्केट, (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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Why Share Market Crash: घरेलू शेयर बाजार में लागातर तीसरे दिन भी गिरावट का सिलसिला जारी रहा। बुधवार को भी मार्केट लाल निशान में बंद हुआ। पिछले तीन दिनों में निवेशकों की संपत्ति करीब 8 लाख करोड़ रुपये घट गई है। सबसे ज्यादा स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में गिरावट देखी जा रही है, और सबसे ज्यादा नुकसान भी रिटेल निवेशकों को हुआ है, क्योंकि भारतीय रिटेल निवेशक सबसे ज्यादा स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में ही निवेश करते हैं।

दरअसल, बुधवार को कारोबार के अंत में सेंसेक्स 275.01 अंक या 0.32% गिरकर 84,391.27 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 81.65 अंक 0.32 फीसदी लुढ़ककर 25,758 के स्तर पर बंद हुआ। इंडिगो, इटरनल और HDFC बैंक के शेयरों में 3 फीसदी तक की गिरावट देखी गई।

बुधवार को निवेशकों का 1.09 लाख स्वाहा

BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप घटकर 463.82 लाख करोड़ रुपये पर आ गया, जो इसके पिछले कारोबारी दिन यानी मंगलवार को 464.91 लाख करोड़ रुपये रहा था। इस तरह BSE में लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप बुधवार को करीब 1.09 लाख करोड़ रुपये घटा है। निफ्टी 25500 से 26000 अंक के बीच बना हुआ है, लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप में शेयरों में हाहाकार मचा है। लार्जकैप कंपनियों में कम गिरावट हावी है। इसलिए बाजार विश्लेषक अब सुझाव दे रहे हैं कि निवेशक दोबारा अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करें, और फिलहाल मिडकैप और स्मॉलकैप में बहुत ज्यादा निवेश से बचें।

शेयर मार्केट में गिरावट की असली वजह

अगर गिरावट का कारण देखें तो एक्सपर्ट्स के मुताबिक गिरावट की सबसे बड़ी वजह विदेशी निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली रही है। केवल दिसंबर में अब तक विदेशी निवेशक 15 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली कर चुके हैं। मंगलवार को ही विदेशी निवेशकों ने 3,760 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। बुधवार लगातार 10वां दिन है, जब विदेशी निवेशकों ने शेयर बाजार से पैसे निकाले हैं। गिरावट का दूसरा कारण फेडरल रिजर्व (फेड) की नीतियों को लेकर बाजार में डर का माहौल है। निवेशक बाजार में पैसे लगाने से बच रहे हैं।

बाजार यह मानकर चल रहा है कि फेडरल रिजर्व बैंक ब्याज दरों में 0.25 फीसदी की कटौती कर सकता है। हालांकि निवेशक इस बात से अधिक उलझन में हैं कि 2026 में फेडरल रिजर्व की पॉलिसी का क्या रुख रहेगा। इसके अलावा चेयरमैन जेरोम पॉवेल की मई में खत्म होने वाली अवधि के बाद उनके उत्तराधिकारी को लेकर भी असमंजस है।

निवेशकों के लिए मार्केट एक्सपर्ट की चेतावनी

इस बीच सीनियर मार्केट एक्सपर्ट Deven Choksey ने चेतावनी दी है कि भारतीय शेयर बाजार में मिड और स्मॉलकैप शेयरों में जो भूचाल है, वो निवेशकों को परेशान कर रहा है। फिलहाल निवेशकों को इन सेगमेंट्स को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि हाई वैल्यूएशन और कमजोर फंडामेंटल्स के कारण ये गिरावट लंबा खींच सकता है।  चोकसी बताते हैं कि हाल के वर्षों में कुछ कंपनियों में निवेशकों का खास झुकाव था। जिनमें कई स्टॉक्स का प्राइस-टू-अर्निंग (PE) अनुपात बेहद ऊंचा हो गया था। ऐसे over-valuation ने करेक्शन को अनिवार्य बना दिया था।

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