रुपये में ऐतिहासिक गिरावट, डॉलर के मुकाबले 93 के करीब पहुंचा रुपया; क्या अब आपकी जेब पर बढ़ेगा बोझ?

Dollar vs Rupee: अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 92.25 पर खुला। इसके बाद इसमें गिरावट आती गई। एक समय यह 93 रुपये प्रति डॉलर के करीब पहुंच गया।
dollar vs rupee
डॉलर बनाम रुपया, (कॉन्सेप्ट फोटो)
Published on
Updated on

Indian Rupee Falls to 93 Against Dollar: ईरान युद्ध भारत की अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बनकर उभर रहा है। इस युद्ध के चलते मिडिल ईस्ट में तनाव पैदा हो गया है, जिससे कच्चे तेल की कीमत आसमान पर पहुंच गई है। इस कारण अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में बड़ी गिरावट आई है। गुरुवार को रुपया डॉलर के मुकाबले अपने ऐतिहासिक निचले स्तर पर गिर गया। वहीं शेयर बाजार में गिरावट के कारण भी रुपये पर दबाव बना।

बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 92.01 पर बंद हुआ था। गुरुवार को भी यह गिरावट के साथ खुला। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 92.25 पर खुला। इसके बाद इसमें गिरावट आती गई। एक समय यह 93 रुपये प्रति डॉलर के करीब पहुंच गया।

रिजर्व बैंक ने किया हस्तक्षेप

कारोबार के दौरान रुपया 0.3% टूटकर 92.3575 के स्तर पर पहुंच गया। इसने इसी हफ्ते के अपने पिछले रिकॉर्ड निचले स्तर (92.3475) को भी पार कर लिया। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के हस्तक्षेप ने रुपये को और ज्यादा गिरने से बचाने में मदद की। इस बीच छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स 0.24 फीसदी की बढ़त के साथ 99.47 पर रहा।

रुपया गिरने के 2 प्रमुख कारण

मिडिल ईस्ट में तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है। गुरुवार को ब्रेंट ऑयल की कीमत एक बार फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई थी। ईरान ने चेतावनी दी है कि दुनिया 200 डॉलर प्रति बैरल तेल के लिए तैयार रहे। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। तेल महंगा होने से भारत का ट्रेड डेफिसिट (व्यापार घाटा) बढ़ने का डर है। इसका सीधा असर रुपये की वैल्यू पर पड़ता है।

रुपये में गिरावट से क्या असर?

अगर रुपये में गिरावट बनी रहती है तो इससे भारत की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा। इलेक्ट्रॉनिक्स, कच्चा तेल आदि का आयात महंगा हो जाएगा।

  • विदेश में पढ़ाई भी महंगी हो जाएगी क्योंकि विदेशी मुद्रा में भुगतान के लिए ज्यादा रुपये खर्च करने होंगे।
  • माल ढुलाई महंगी होगी जिससे खाने-पीने की चीजों और अन्य सामानों के दाम बढ़ सकते हैं।
  • निफ्टी और सेंसेक्स पर दबाव बना रहेगा, क्योंकि विदेशी निवेशक (FII) कमजोर रुपये के कारण पैसा निकाल सकते हैं। इससे शेयर बाजार में गिरावट की आशंका बनी रहेगी।

कितना हुआ कच्चे तेल का भाव?

गुरुवार को कच्चे तेल की कीमत में फिर से तेजी आई। ब्रेंट ऑयल फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया। भारतीय समयानुसार गुरुवार दोपहर 12 बजे ब्रेंट ऑयल 7 फीसदी से ज्यादा की तेजी के साथ करीब 99 डॉलर प्रति बैरल पर था। वहीं अमेरिकी ऑयल (WTI) में भी 7 फीसदी से ज्यादा की तेजी आई। इस तेजी के साथ यह करीब 94 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com