
शेयर बाजार (सोर्स-सोशल मीडिया)
Sensex Nifty Performance January 06: हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली का दौर देखने को मिला जिससे प्रमुख सूचकांक लाल निशान पर खुले। रिलायंस इंडस्ट्रीज और एचडीएफसी बैंक जैसे बड़े शेयरों में गिरावट के साथ-साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई आर्थिक चेतावनियों ने निवेशकों के बीच डर पैदा कर दिया है।
बाजार की शुरुआत में ही सेंसेक्स और निफ्टी ने अपने महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर खो दिए जिससे कारोबारियों की धारणा सतर्क और नकारात्मक बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय दबाव और टैरिफ की अनिश्चितता के बीच घरेलू निवेशकों को वैश्विक संकेतों का इंतजार है जो आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करेंगे।
मंगलवार सुबह शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला BSE सेंसेक्स 431.95 अंक गिरकर 85,007.67 के स्तर पर आ गया जिससे निवेशकों की संपत्ति में भारी कमी आई। इसी तरह 50 शेयरों वाला NSE निफ्टी भी गिरावट से अछूता नहीं रहा और 105.6 अंक टूटकर 26,144.70 के आंकड़े पर पहुंच गया। बाजार में इस गिरावट के पीछे मुख्य कारण रिलायंस और बैंकिंग सेक्टर के दिग्गज शेयरों में देखी गई भारी मुनाफावसूली और विदेशी निवेशकों की निकासी को माना जा रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताजा बयानों ने भारतीय बाजारों पर नकारात्मक दबाव डाला है जिसमें उन्होंने रूसी तेल की खरीद को लेकर नाराजगी जताई है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अमेरिका ‘बहुत जल्द’ भारत से आने वाली वस्तुओं पर टैरिफ यानी आयात शुल्क बढ़ा सकता है जिससे व्यापारिक रिश्तों में खटास आने की आशंका है। एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दी गई इस धमकी ने उन भारतीय कंपनियों के शेयरों को प्रभावित किया है जिनका अमेरिका के साथ बड़ा व्यापारिक लेनदेन होता है।
दिग्गज कंपनियों में ट्रेंट के शेयरों में 7 प्रतिशत से अधिक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई जबकि कंपनी का राजस्व पिछली तिमाही में 17 प्रतिशत बढ़ा था। रिलायंस इंडस्ट्रीज, टाटा मोटर्स और अदानी पोर्ट्स जैसी बड़ी कंपनियां भी गिरावट के साथ पिछड़ने वाले शेयरों की सूची में शामिल रहीं। हालांकि बाजार के इस दबाव के बीच आईसीआईसीआई बैंक, बजाज फिनसर्व और एशियन पेंट्स जैसे कुछ चुनिंदा शेयरों ने लाभ कमाकर बाजार को सहारा देने की कोशिश की।
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वैश्विक स्तर पर ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में 0.24 प्रतिशत की कमी आई और यह गिरकर 61.61 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। एशियाई बाजारों में निक्केई और हैंग सेंग जैसे सूचकांकों में हल्की बढ़त देखी गई लेकिन भारतीय बाजार पर ट्रंप की टैरिफ नीतियों का साया भारी पड़ रहा है। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बाजार से 36.25 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं जबकि घरेलू संस्थानों ने 1,764 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को संभालने का प्रयास किया है।






