SBI ने जारी की तिमाही रिपोर्ट, मुनाफे में मारी बाजी

एसबीआई ने शुक्रवार को तिमाही नतीजों की जानकारी देते हुए कहा कि जुलाई-सितंबर की अवधि में एकल आधार पर उसका शुद्ध लाभ 18,331 करोड़ रुपये रहा है, जो एक साल पहले की समान तिमाही में 14,330 करोड़ रुपये था।
SBIs second quarter profit rises 23 percent to Rs 19,782 crore
एसबीआई (सौजन्य : सोशल मीडिया)
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मुंबई : देश के सबसे बड़े बैंकों में से एक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने हाल ही में अपने तिमाही नतीजे जारी कर दिए है। एसबीआई ने चालू वित्त वर्ष यानी साल 2024-25 की जुलाई से सितंबर महीने के व्यापारिक नतीजे जारी किए हैं। जिसके आधार पर पता चला है कि एसबीआई को सालाना आधार पर नेट प्रॉफिट में तकरीबन 23 प्रतिशत की बढ़त हासिल हुई है। इस बढ़त के बाद मुनाफे का ये आंकड़ा बढ़कर 19,782 करोड़ रुपये तक हो गया है।

अगर इस बैंक के पिछले वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के आंकड़ों के बारे में बात की जाए, तो इस बैंक ने पिछले फाइनेंशियल ईयर की दूसरी तिमाही यानी जुलाई से सितंबर के महीने में करीब 6,099 करोड़ रुपये का एकीकृत नेट प्रॉफिट कमाया था।

एकल आधार पर लाभ

एसबीआई ने शुक्रवार को तिमाही नतीजों की जानकारी देते हुए कहा कि जुलाई-सितंबर की अवधि में एकल आधार पर उसका शुद्ध लाभ 18,331 करोड़ रुपये रहा है, जो एक साल पहले की समान तिमाही में 14,330 करोड़ रुपये था। पिछली तिमाही यानी अप्रैल से जून के महीने में यह 17,035 करोड़ रुपये था।

टोटल इनकम बढ़ी

समीक्षाधीन अवधि में बैंक की टोटल इनकम बढ़कर 1.29 लाख करोड़ रुपये हो गई है, जो एक साल पहले इसी अवधि में 1.12 लाख करोड़ रुपये थी। दूसरी तिमाही में बैंक का टोटल एक्सपेंस बढ़कर 99,847 करोड़ रुपये हो गया है, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 92,752 करोड़ रुपये था।

नए चेयरमैन की हुई नियुक्ति

डूबते हुए कर्ज के लिए बैंक का प्रावधान 1,814 करोड़ रुपये से करीब दोगुना होकर 3,631 करोड़ रुपये हो गया। बैंक का सकल गैर-निष्पादित आस्तियां यानी एनपीए अनुपात 30 सितंबर को 2.13 प्रतिशत रहा, जबकि जून में यह 2.21 प्रतिशत था। उल्लेखनीय है कि सी. एस. शेट्टी को अगस्त में एसबीआई का चेयरमैन नियुक्त किया गया था।

सबसे पुरानी बैंक

एसबीआई भारत की सबसे बड़ी एवं सबसे पुरानी बैंकों में से एक है। 14 सितंबर 2022 को, भारतीय स्टेट बैंक पहली बार भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों पर ₹ 5 ट्रिलियन बाजार पूंजीकरण को पार करने वाला तीसरा ऋणदाता (एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक के बाद) और सातवीं भारतीय कंपनी बन गया था।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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