Dollar 90 Rupee पार… स्मार्टफोन, पेट्रोल सब महंगे! गिरते रुपये से आम आदमी को महंगाई की टेंशन
Rupee Falls 90: डॉलर के मुकाबले रुपया 90 के पार। इससे स्मार्टफोन, पेट्रोल-डीजल और विदेश में पढ़ाई का खर्च महंगा होगा। विदेशी फंड्स का पलायन, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और RBI की नीति इसकी मुख्य वजह हैं।
- Written By: प्रिया सिंह
डॉलर के मुकाबले रुपया 90 के पार (सोर्स- सोशल मीडिया)
Inflation India Impact: बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई। यह पहली बार है जब रुपया 90 के पार चला गया, जिसने आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालना शुरू कर दिया है। फॉरेन फंड्स के बाहर जाने और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने इस गिरावट को और बढ़ा दिया है। रुपये की इस कमजोरी से दैनिक जरूरत की चीजें, ईएमआई और शिक्षा खर्च सब बढ़ने वाले हैं।
गिरते रुपये से महंगाई की टेंशन
बुधवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90 के ऐतिहासिक स्तर को पार कर गया। इस बड़ी गिरावट का असर अब सिर्फ शेयर बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे आम भारतीय परिवारों की जेब पर पड़ने वाला है। भारत अपनी 90% कच्चे तेल की जरूरतें और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी कई जरूरी चीजें आयात करता है, जिसका भुगतान डॉलर में होता है। रुपया कमजोर होने से आयातित वस्तुओं की कीमतें बढ़ जाती हैं, यानी अब हमें वही सामान खरीदने के लिए ज्यादा रुपये चुकाने होंगे।
आम आदमी पर सीधा असर
रुपये की इस कमजोरी से सबसे ज्यादा मार निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों पर पड़ेगी-
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- महंगे होंगे गैजेट्स: आयातित वस्तुएं जैसे लैपटॉप, स्मार्टफोन, फ्रिज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स अब और भी महंगी मिलेंगी।
- बढ़ेगा ईंधन का खर्च: भारत 90% कच्चे तेल और 60% से अधिक खाने के तेल का आयात करता है। कमजोर रुपया पेट्रोल, डीजल और एलपीजी को महंगा कर देगा, जिससे रसोई का बजट बिगड़ेगा।
विदेश में पढ़ाई और कर्ज का बोझ
जो परिवार अपने बच्चों को विदेश में पढ़ा रहे हैं, उनके लिए यह गिरावट एक बड़ा झटका है।
- ट्यूशन फीस में इजाफा: विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों को सालाना 5 से 10 लाख रुपये तक ज्यादा खर्च करने पड़ सकते हैं, क्योंकि ट्यूशन फीस और रहने का खर्च डॉलर में चुकाना होता है। उदाहरण के लिए, 50,000 डॉलर की फीस अब 80 रुपये प्रति डॉलर के मुकाबले 90 रुपये प्रति डॉलर होने पर 5 लाख रुपये ज्यादा हो जाएगी।
- EMI पर दबाव: एजुकेशन लोन पर भी बोझ बढ़ेगा। डॉलर लोन लेने वाले छात्रों को अब रुपये के हिसाब से 12-13% अधिक चुकाना पड़ रहा है, जिससे कई मध्यमवर्गीय परिवारों को अपनी बचत तोड़नी पड़ सकती है।
रुपये में गिरावट के मुख्य कारण
रुपये की कमजोरी के पीछे तीन बड़े कारण हैं-
- निवेशकों का पलायन: विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से साल 2025 में अब तक 17 अरब डॉलर से अधिक की रकम निकाल ली है।
- व्यापारिक तनाव: अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता का असफल रहना और भारतीय निर्यात पर टैरिफ बढ़ाना (कुछ पर 50% तक) भी बाजार का भरोसा कम कर रहा है।
- RBI की नीति में बदलाव: अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत की विनिमय दर व्यवस्था को ‘स्थिर’ से बदलकर ‘रेंगने जैसी’ (crawl-like) श्रेणी में डाल दिया है, जिससे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अब रुपये को सख्ती से बचाने के बजाय नियंत्रित कर रहा है।
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लेकिन इन लोगों के लिए अच्छी खबर
यह गिरावट उन अप्रवासी भारतीयों के लिए अच्छी खबर है जो भारत में अपने परिवार को पैसा भेजते हैं। डॉलर के मुकाबले अब उन्हें ज्यादा रुपये मिलेंगे। उदाहरण के लिए, 500 डॉलर भेजने पर अब लगभग 45 हजार रुपये मिलेंगे।
