सरकार की नीयत में खोट, अखिलेश यादव ने आरक्षण बिल को बताया BJP का चुनावी स्टंट, PM मोदी से पूछे कड़े सवाल
Akhilesh Yadav: सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण बिल पर भाजपा को घेरा। उन्होंने पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यकों के लिए अलग कोटे की मांग करते हुए सरकार की नीयत पर सवाल उठाए हैं।
- Written By: अक्षय साहू
Akhilesh Yadav Slams BJP Over Women Reservation Bill: इन दिनों भारत में महिला आरक्षण बिल को लेकर सियासत गर्म है। सत्ताधारी भाजपा इसके संसद में पास नहीं होने पर विपक्षी पार्टियों को महिला विरोधी बता रही है। वहीं विपक्षी दल बिल को लेकर भाजपा की नियत पर निशाना साध रही है। इसी बीच समाजवादी पार्टी के प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी सरकार पर जमकर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक दल इसके समर्थन में हैं और पहले भी यह सर्वसम्मति से पारित हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने इसे जल्दबाजी में लागू किया और राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की। उन्होंने आगे कहा कि, महिला आरक्षण में पिछड़े, दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक समुदायों को भी शामिल किया जाना चाहिए, क्योंकि “आधी आबादी” सभी वर्गों से मिलकर बनती है। उन्होंने डॉ. राम मनोहर लोहिया के विचारों का हवाला देते हुए कहा कि महिलाओं को सामाजिक न्याय के दायरे में व्यापक रूप से देखा जाना चाहिए। उन्होंने नरेंद्र मोदी के संबोधन पर भी सवाल उठाए और कहा कि लोगों को उम्मीद थी कि भविष्य में महिला नेतृत्व को लेकर स्पष्टता मिलेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
Akhilesh Yadav Slams BJP Over Women Reservation Bill: इन दिनों भारत में महिला आरक्षण बिल को लेकर सियासत गर्म है। सत्ताधारी भाजपा इसके संसद में पास नहीं होने पर विपक्षी पार्टियों को महिला विरोधी बता रही है। वहीं विपक्षी दल बिल को लेकर भाजपा की नियत पर निशाना साध रही है। इसी बीच समाजवादी पार्टी के प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी सरकार पर जमकर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक दल इसके समर्थन में हैं और पहले भी यह सर्वसम्मति से पारित हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने इसे जल्दबाजी में लागू किया और राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की। उन्होंने आगे कहा कि, महिला आरक्षण में पिछड़े, दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक समुदायों को भी शामिल किया जाना चाहिए, क्योंकि “आधी आबादी” सभी वर्गों से मिलकर बनती है। उन्होंने डॉ. राम मनोहर लोहिया के विचारों का हवाला देते हुए कहा कि महिलाओं को सामाजिक न्याय के दायरे में व्यापक रूप से देखा जाना चाहिए। उन्होंने नरेंद्र मोदी के संबोधन पर भी सवाल उठाए और कहा कि लोगों को उम्मीद थी कि भविष्य में महिला नेतृत्व को लेकर स्पष्टता मिलेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
