India South Korea Energy Ties: भारत और South Korea के बीच ऊर्जा संसाधन सुरक्षा को लेकर एक बहुत ही अहम संयुक्त वक्तव्य जारी किया गया है। दोनों देशों ने सोमवार को जारी इस बयान में अपनी विशेष रणनीतिक साझेदारी को और ज्यादा मजबूत करने पर काफी जोर दिया है। इस महत्वपूर्ण समझौते के तहत India-South Korea ऊर्जा संबंध को एक नई दिशा और बहुत भारी मजबूती मिलने वाली है। दोनों देशों ने एक खुले, समावेशी और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए अपने साझा दृष्टिकोण को पूरी तरह से दोहराया है।
संयुक्त बयान में कहा गया है कि भारत और South Korea के बीच आर्थिक और ऊर्जा सहयोग उनकी रणनीतिक साझेदारी का मुख्य आधार है। यह अहम सहयोग पूरी तरह से खुले बाजार, पारदर्शिता और नियमों पर आधारित व्यापार व्यवस्था पर मजबूती के साथ टिका हुआ है। यह दोनों देशों की तेज आर्थिक सुरक्षा और निरंतर विकास के लिए वर्तमान समय में बहुत ही ज्यादा जरूरी माना जा रहा है।
दोनों देशों ने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता के तहत अपने वर्तमान सहयोग को और आगे बढ़ाने की मजबूत प्रतिबद्धता जताई है। इस विशेष समझौते के माध्यम से दोनों देशों के बीच भविष्य में ऊर्जा व्यापार और निवेश को और भी ज्यादा मजबूत करने की योजना है। इससे वैश्विक स्तर पर भी उद्योगों और बाजारों पर पड़ने वाले प्रभाव को बहुत गहराई से समझने में ज्यादा मदद मिलने वाली है।
वर्तमान में व्यापार के मोर्चे पर भारत, South Korea को नैफ्था और अन्य कई महत्वपूर्ण पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति लगातार करता है। इसके बदले में दक्षिण कोरिया भी भारत को अपनी तरफ से कई पेट्रोलियम उत्पाद और लुब्रिकेंट बेस ऑयल आसानी से उपलब्ध कराता है। इस निरंतर आपसी लेन-देन से दोनों ही देशों की ऊर्जा जरूरतों को बहुत ही सुचारू और सुरक्षित रूप से पूरा किया जा रहा है।
किए गए संयुक्त बयान में ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को बहुत ही ज्यादा मजबूत बनाने पर दोनों देशों ने विशेष रूप से जोर दिया है। दोनों देशों ने आपसी क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने, ऊर्जा परिवर्तन को बहुत तेज करने और खुले व्यापार का पूरी तरह से समर्थन करने की बात कही है। इस दूरदर्शी कदम से भविष्य में किसी भी तरह के वैश्विक ऊर्जा संकट से बहुत ही आसानी के साथ निपटने में सहायता मिलेगी।
भारत और South Korea दोनों ही वर्तमान में पूरी दुनिया में प्रमुख एलएनजी उपभोक्ता देशों के रूप में बहुत अच्छी तरह से जाने जाते हैं। इसलिए बाजार की भारी स्थिरता और पूरी पारदर्शिता बढ़ाने के लिए आपसी सहयोग की नई संभावनाओं पर भी बहुत विस्तार से चर्चा की गई है। इससे भविष्य के ऊर्जा बाजार में भारी कीमतों को नियंत्रण में रखने और निरंतर आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने में बहुत बड़ा लाभ मिलेगा।
भारत और South Korea ने यह भी अच्छी तरह से माना है कि मजबूत समुद्री ढांचा ऊर्जा सुरक्षा के लिए इस समय बेहद ही ज्यादा महत्वपूर्ण है। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए दोनों देशों ने जहाज निर्माण क्षेत्र में अपना आपसी सहयोग काफी ज्यादा बढ़ाने पर पूरी सहमति जताई है। इस बड़े समझौते के तहत भारत में नए शिपयार्ड स्थापित करना और मौजूदा शिपयार्ड का तेजी से आधुनिकीकरण करना मुख्य रूप से शामिल है।
जहाज निर्माण के अलावा दोनों देश आपस में बेहतरीन तकनीकी सहयोग और मानव संसाधन विकास पर भी पूरी तरह से फोकस कर रहे हैं। संयुक्त बयान में दोनों देशों ने एक-दूसरे को ऊर्जा संसाधनों की बिल्कुल सुरक्षित और भरोसेमंद आपूर्ति बनाए रखने का कड़ा संकल्प भी दोहराया है। इससे समुद्री व्यापार और ऊर्जा के अत्यंत सुरक्षित परिवहन में आने वाले समय में बहुत ही ज्यादा और अभूतपूर्व क्रांति देखने को मिलेगी।
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भारत और South Korea ने मिलकर अपने सभी क्षेत्रीय साझेदार देशों से भी एक बहुत ही खास और महत्वपूर्ण अपील मजबूती के साथ की है। उन्होंने कहा है कि वे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को पूरी तरह से खुला और स्थिर बनाए रखने में अपना पूरा और सक्रिय सहयोग दें। यह कदम विशेष रूप से इसलिए उठाया गया है ताकि दुनिया के सभी देशों की सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि हमेशा के लिए सुनिश्चित की जा सके।