RBI का बड़ा फैसला: अप्रैल 2026 से बैंकों के जमा बीमा प्रीमियम में होगा ऐतिहासिक बदलाव

Risk Based Premium Model: RBI अप्रैल 2026 से नया जोखिम आधारित प्रीमियम मॉडल लागू करेगा जिसमें सुरक्षित बैंकों को कम प्रीमियम देना होगा और जमाकर्ताओं की 5 लाख की बीमा सुरक्षा बरकरार रहेगी।
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भारतीय रिजर्व बैंक, (सोर्स- सोशल मीडिया)
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RBI Bank Deposit Insurance 2026: भारतीय रिजर्व बैंक अप्रैल 2026 से बैंक खाता जमा बीमा व्यवस्था में एक क्रांतिकारी परिवर्तन करने की पूरी तैयारी कर चुका है। अब दशकों पुरानी समान दर प्रणाली को समाप्त कर उसके स्थान पर जोखिम आधारित प्रीमियम मॉडल को पूरी तरह लागू किया जाएगा। इस नई व्यवस्था के तहत सुरक्षित और आर्थिक रूप से मजबूत बैंकों को कम प्रीमियम चुकाने का लाभ स्पष्ट रूप से मिलेगा। यह कदम बैंकों को अपने जोखिम प्रबंधन में सुधार करने और बैंकिंग प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए प्रेरित करेगा।

पुरानी व्यवस्था का अंत

भारत में 1962 से चली आ रही समान दर प्रणाली के तहत सभी बैंकों को एक ही दर पर प्रीमियम देना पड़ता था। अब तक हर बैंक को अपनी जमा राशि पर प्रति 100 रुपये पर 12 पैसे का प्रीमियम जमा बीमा निगम को देना होता था। RBI का मानना है कि यह पुरानी व्यवस्था बैंकों को उनकी वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए पर्याप्त प्रोत्साहन नहीं दे पाती थी।

जोखिम आधारित नया मॉडल

नए मॉडल के तहत बैंकों को उनकी पूंजी पर्याप्तता और NPA जैसे मानकों के आधार पर विभिन्न श्रेणियों में बांटा जाएगा। बैंकों की वित्तीय सेहत के अनुसार उन्हें A, B, C और D जैसी चार विशिष्ट जोखिम श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा। सबसे सुरक्षित श्रेणी 'A' के बैंकों को अब 12 पैसे की जगह केवल 8 पैसे प्रति 100 रुपये प्रीमियम देना होगा।

श्रेणीवार प्रीमियम दरें

श्रेणी B के बैंकों को 10 पैसे और श्रेणी C के बैंकों को 11 पैसे का प्रीमियम भुगतान करना होगा। वहीं सबसे अधिक जोखिम वाले श्रेणी D के बैंकों को पहले की तरह 12 पैसे का ही प्रीमियम चुकाना पड़ेगा। इस नई श्रेणी प्रणाली का सबसे बड़ा लाभ उन बैंकों को मिलेगा जिनकी बैलेंस शीट अत्यधिक मजबूत और सुरक्षित है।

जोखिम आकलन के मानक

बैंकों के जोखिम का मूल्यांकन करने के लिए केंद्रीय बैंक द्वारा दो अलग-अलग प्रकार के मॉडल अपनाए जाने की योजना है। व्यावसायिक बैंकों के लिए टीयर-1 मॉडल लागू होगा जिसमें उनके लाभ और संभावित नुकसान के आंकड़ों को आधार बनाया जाएगा। क्षेत्रीय ग्रामीण और सहकारी बैंकों के लिए टीयर-2 मॉडल के तहत मात्रात्मक संकेतकों की बारीकी से जांच की जाएगी।

स्थिर बैंकों को छूट

लंबे समय तक बेहतर रिकॉर्ड बनाए रखने वाले बैंकों को RBI ने 'विंटेज इंसेंटिव' देने का भी प्रावधान रखा है। ऐसी संस्थाएं जिन पर कोई बड़ा प्रतिबंध नहीं लगा है, उन्हें सालाना आधार पर एक प्रतिशत की अतिरिक्त छूट मिलेगी। यह विशेष छूट संचयी रूप से अधिकतम 25 प्रतिशत तक जा सकती है जिससे पुराने बैंकों को बड़ी वित्तीय राहत मिलेगी।

जमाकर्ताओं पर प्रभाव

इस बदलाव का आम जनता की जमा राशि की सुरक्षा पर नकारात्मक रूप से कोई भी प्रभाव नहीं पड़ने वाला है। बैंक डूबने की स्थिति में मिलने वाली पांच लाख रुपये तक की बीमा कवर सीमा पूरी तरह पहले जैसी रहेगी। हालांकि मजबूत बैंकों की लागत घटने से ग्राहकों को भविष्य में FD पर बेहतर ब्याज मिलने की संभावना बढ़ेगी।

अपवाद और सीमाएं

लोकल एरिया बैंक और पेमेंट्स बैंक फिलहाल इस जोखिम आधारित प्रीमियम व्यवस्था के दायरे से पूरी तरह बाहर रखे गए हैं। इन बैंकों को पहले की तरह ही प्रति 100 रुपये की जमा पर 12 पैसे का प्रीमियम देना जारी रखना होगा। डेटा की कमी के कारण इन छोटे बैंकों के लिए सटीक जोखिम मॉडलिंग करना वर्तमान में संभव नहीं हो पाया है।

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