ईरान में टूट गई 37 साल पुरानी परंपरा! अमेरिका के डर से मिलिट्री कार्यक्रम में नहीं पहुंचे खामेनेई, बताई ये वजह

US-Iran Tensions: ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई 37 साल में पहली बार सैन्य बैठक में नहीं पहुंचे; अमेरिका से बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को जारी रखने की चेतावनी दी।
Khamenei Missed Military Event on US Threat
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई (सोर्स- सोशल मीडिया)
Updated on

Khamenei Missed Military Event on US Threat: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई को लेकर एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 37 सालों में यह पहली बार हुआ है कि खामेनेई एक अहम सैन्य कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। 8 फरवरी को ईरान के सुप्रीम लीडर ने सेना और वायु सेना के कमांडरों के साथ सालाना बैठक में हिस्सा नहीं लिया।

यह कार्यक्रम खामेनेई के लिए एक परंपरा बन चुका था, जो उन्होंने 1989 में सुप्रीम लीडर बनने के बाद से हर साल अदा किया था। यहां तक कि कोरोना महामारी के दौरान भी उन्होंने इस बैठक को नहीं छोड़ा था। लेकिन इस बार अमेरिका से तनाव के चलते खामेनेई ने इस आयोजन के दूरी बनाना ही बेहतर समझा।

खामेनेई की अनुपस्थिति से उठे सवाल

अब्दुलरहीम मौसवी, जो ईरानी सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ हैं, ने अली खामेनेई की जगह बैठक में हिस्सा लिया। खामेनेई की इस अचानक अनुपस्थिति से कई सवाल उठ रहे हैं, खासकर जब से अमेरिका और ईरान के बीच संबंधों में तनाव चरम पर है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, खामेनेई अभी तेहरान में एक भूमिगत बंकर में छिपे हुए हैं।  यह चर्चा है कि ईरान के उच्च अधिकारियों को अमेरिकी हमलों का डर सता रहा है, खासकर 2025 के हमले के बाद जब अमेरिका ने ईरान के कई शीर्ष अधिकारियों को निशाना बनाया और उसके परमाणु कार्यक्रम को गंभीर नुकसान पहुंचाया।

ईरान ने अमेरिका को दी चेतावनी

इस बीच, ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि वह अपने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को जारी रखेंगे, चाहे उन पर कोई भी दबाव क्यों न डाला जाए। अराघची ने यह स्पष्ट किया कि ईरान किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव में आकर अपनी परमाणु नीति में कोई बदलाव नहीं करेगा।

 उन्होंने कहा, "हम इसे क्यों छोड़ें? क्योंकि हमें किसी से भी हुक्म नहीं मानना है।" ईरान ने साफ किया कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर कोई समझौता नहीं करेगा और अमेरिका के दबाव में आकर अपनी नीति में बदलाव नहीं करेगा। इस घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि ईरान अमेरिका के सामने झुकने को तैयार नहीं है और अपनी नीतियों पर अडिग बना हुआ है।

Navbharat Live
navbharatlive.com