मेघालय भारत की दूसरी सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था: सीएम कॉनराड संगमा
Conrad Sangma Meghalaya: मेघालय के सीएम कॉनराड संगमा ने कहा, मेघालय तमिलनाडु के बाद देश की दूसरी सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था है। त्रि हिल्स एन्सेम्बल का उद्घाटन कर संस्कृति संरक्षण पर जोर दिया।
- Written By: प्रिया सिंह
मेघालय के सीएम कॉनराड संगमा (सोर्स-सोशल मीडिया)
Meghalaya Fastest Growing Economy: मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने बुधवार को शिलांग में त्रि हिल्स एन्सेम्बल के चौथे संस्करण का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने राज्य की बड़ी आर्थिक प्रगति पर प्रकाश डाला। सीएम संगमा ने घोषणा की कि आर्थिक विकास दर के मामले में मेघालय अब दक्षिणी राज्य तमिलनाडु के बाद देश की दूसरी सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बन गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस आर्थिक प्रगति के साथ ही राज्य की सांस्कृतिक पहचान का संरक्षण भी विकास के केंद्र में रहना चाहिए।
तमिलनाडु के बाद मेघालय की तेज आर्थिक प्रगति
मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने अपने संबोधन में कहा कि मेघालय लगातार तीव्र आर्थिक प्रगति हासिल कर रहा है। उन्होंने बताया कि यह राज्य अब देश की दूसरी सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है, जो केवल तमिलनाडु से पीछे है। यह उपलब्धि राज्य के विकास की गति को दर्शाती है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तेज आर्थिक विकास के बावजूद, सांस्कृतिक पहचान का संरक्षण और संवर्धन राज्य के विकास मॉडल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए।
उन्होंने कला एवं संस्कृति विभाग की सराहना की, जिसने खासी, जयंतिया और गारो समुदायों के शिल्प, संस्कृति और व्यंजनों का जश्न मनाने वाले त्रि हिल्स एन्सेम्बल जैसे महोत्सव का आयोजन किया। यह महोत्सव लोगों को उनकी जड़ों से जोड़ता है और राज्य की विरासत को दुनिया के सामने प्रदर्शित करता है।
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नदियां, जड़ें और पुनरुद्धार, महोत्सव का महत्व
इस वर्ष त्रि हिल्स एन्सेम्बल का विषय है ‘नदियां, जड़ें और पुनरुद्धार’ (‘Rivers, Roots and Revival’)। मुख्यमंत्री संगमा ने इस विषय के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह खोई हुई परंपराओं को फिर से खोजने को दर्शाता है। इसमें डॉकी और अन्य क्षेत्रों में कभी आयोजित होने वाली रोइंग (Rowing) और बोटिंग (Boating) प्रतियोगिताएं शामिल हैं, जिन्हें पुनर्जीवित किया जा रहा है।
सीएम ने जनजातीय इतिहास, भाषाओं, रीति-रिवाजों, नृत्य शैलियों और प्रवास के मूल पर गहन दस्तावेजीकरण (Documentation) की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि गारो संस्कृति में ही वांगाला के लिए ढोल की कई अलग-अलग थापें और कदम हैं, जिन्हें केवल ढोल वादक ही पहचान सकते हैं, लेकिन उनका कोई लिखित दस्तावेज मौजूद नहीं है। उन्होंने अनुसंधान अनुदान जैसी पहलों के माध्यम से आगे अनुसंधान करने का भी आग्रह किया।
सांस्कृतिक विरासत और नायकों का सम्मान
कला एवं संस्कृति मंत्री सैनबोर शुल्लाई ने कहा कि यह महोत्सव खासी, जयंतिया और गारो लोगों की चिरस्थायी विरासत का सम्मान करता है। उन्होंने मेघालय कला और विरासत पुरस्कारों की भी सराहना की, जो पहचान को संरक्षित करने वाले उस्तादों और उत्कृष्टता का प्रतिनिधित्व करने वाले युवा उपलब्धि हासिल करने वालों को सम्मानित करते हैं।
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मुख्यमंत्री संगमा ने स्कूलों को मेघालय के नायकों- तिरोट सिंग, कियांग नोंग्बाह और पा तोगन सांगमा- पर नाटक मंचित करने के लिए प्रोत्साहित किया। इसका उद्देश्य युवाओं में गर्व और एकता की भावना पैदा करना है। उन्होंने सशक्त सांस्कृतिक आदान-प्रदान की आशा व्यक्त की और सांस्कृतिक अनुसंधान और प्रलेखन परियोजनाओं के महत्व को दोहराया ताकि सांस्कृतिक ज्ञान भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित हो सके।
