ट्रेड एग्रीमेंट से भारतीय अर्थव्यवस्था लगाएगी छलांग, आने वाले सालों में पहुंचेगी तीसरे पायदान पर

शनिवार को नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रह्मणयम ने जानकारी दी कि भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की चौथी सबसे बड़ी इकोनॉमी बन गई है। हालांकि कहा जा रहा है कि कुछ सालों में ये दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकती है।
स्विट्जरलैंड की एक कंपनी ने भारत की ग्रोथ रेट को लेकर चालू वित्त वर्ष 2024-25 का अनुमान जारी किया है। ऐसी उम्मीद जतायी जा रही है कि भारत और अमेरिका के बीच होने वाले ट्रेड एग्रीमेंट के कारण जीडीपी बढ़ सकती है।
भारतीय अर्थव्यवस्था (सौ. सोशल मीडिया )
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भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर शनिवार को काफी अच्छी खबर आयी हैं। शनिवार को नीति आयोग के द्वारा ये जानकारी दी गई थी कि भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गई हैं। नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रह्मणयम ने इस बात पर जोर दिया है कि अनुकूल भू-राजनीतिक और आर्थिक माहौल पूरी तरीके से भारत के पक्ष में हैं।

एक्सपर्ट्स ने ये भी कहा है कि अगर अमेरिका, यूके और ईयू से ट्रेड एग्रीमेंट को जल्द अमलीजामा पहना दिया जाता है, तो भारत में ट्रेड सुगमता बढ़ेगी। इससे देश के आर्थिक विकास में और भी तेजी आ सकती है और तीसरी अर्थव्यवस्था का टारगेट 3 साल के अंदर पाना आसान हो सकता है।

जानकारों का मानना है कि अगर दुनिया में लंबे समय तक कोई युद्ध और ट्रेड से जुड़ा कोई टकराव नहीं होती है तो भारत साल 2027 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के टारगेट को आसानी से हासिल कर सकता है। देश की आर्थिक विकास दर भले ही पिछले कुथ सालो की तुलमा में धीमी हो, लेकिन दुनिया के बाकी देशों की तुलना में सबसे ज्यादा है।

भारत के प्रस्तावित ट्रेड एग्रीमेंट

1. भारत वर्तमान समय में अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में काम कर रहा है। इस समझौते का उद्देश्य साल 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 बिलियन डॉलर तक बढ़ाना है।

2. भारत और यूनाइटेड किंगडम फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर सहमति बन गई है। इस समझौते का टारगेट साल 2030 तक 120 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाना है। हर साल द्विपक्षीय व्यापार में 15 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी का अनुमान है।

3. भारत-यूरोपीय संघ यानी ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर चर्चा चल रहा है। इस समझौते के होने पर द्विपक्षीय व्यापार के सालाना 15 से 20 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है।

अर्थव्यवस्था के हिसाब से पॉजिटिव संकेत

1. विदेशी मुद्रा भंडार

आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल के महीने तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 6 महीने के सबसे ऊंचे 686.11 बिलियन अमेरिकी डॉलर के स्तर पर पहुंचा है, जो 11 महीने के इंपोर्ट के लिए पर्याप्त था।

2. राजकोषीय घाटे में लगातार गिरावट

राजकोषीय घाटे में लगातार गिरावट आ रही है। साल 2020-21 में राजकोषीय घाटा 9.2 प्रतिशत था, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 4.8 प्रतिशत हुआ। चालू वित्त वर्ष में ये घटकर 4.2 प्रतिशत करने का टारगेट है। अर्थव्यवस्था के अनुसार राजकोषीय घाटे में कमी आने से अर्थव्यवस्था को कई फायदे हो सकते हैं। इससे मुद्रास्फीति को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है, जिससे ब्याज दरें कम हो जाती हैं।

3. फाइनेंशियल स्टेबेलिटी

भारत का फाइनेंशियल सेक्टर अब स्थिर है। बैंक लोन में लगातार बढ़ोत्तरी आ रही है, जो दर्शाता है कि देश में लोगों के खर्च करने की क्षमता भी लगातार बढ़ रही है।

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