आर्थिक मोर्चे पर बड़ी सफलता, दुनिया का चौथा सबसे बड़ा इकोनॉमी बना भारत; जापान को पीछे छोड़ा

Indian Economy: 2022 में भारत ब्रिटेन को पीछे छोड़कर दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना था। अब नजर इस बात पर है कि क्या भारत आर्थिक आकार के साथ-साथ लोगों की जिंदगी में भी खुशहाली ला पाएग।
Indian Economy
इंडियन इकोनॉमी, (कॉन्सेप्ट फोटो)
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India's Rank in World Economy: भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। साल के अंत में जारी आर्थिक समीक्षा के मुताबिक, भारत ने अब जापान को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का दावा किया है। सरकार का कहना है कि भारत का कुल सकल घरेलू उत्पाद (GDP) 4.18 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि 2026 में जारी होने वाले अंतिम आंकड़ों के बाद ही होगी।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) का अनुमान है कि 2026 में भारत की GDP 4.51 ट्रिलियन डॉलर हो सकती है, जबकि जापान की 4.46 ट्रिलियन डॉलर, यानी भारत का आगे निकलना लगभग तय माना जा रहा है।

तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी की ओर भारत

सरकार इससे भी आगे की उम्मीद कर रही है। आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि अगर मौजूदा रफ्तार बनी रही तो भारत अगले ढाई से तीन साल में जर्मनी को भी पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। अनुमान है कि 2030 तक भारत की GDP 7.3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है। सरकार का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं और व्यापारिक दबावों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूती बनी हुई है और देश दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।

भारत में प्रति व्यक्ति आय कितनी?

हालांकि, तस्वीर का दूसरा पहलू भी उतना ही अहम है। कुल GDP के मामले में आगे बढ़ने के बावजूद आम भारतीय की आय अभी भी काफी कम है। विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार 2024 में भारत की प्रति व्यक्ति आय सिर्फ 2,694 डॉलर रही, जो जापान से 12 गुना और जर्मनी से करीब 20 गुना कम है। भारत 2023 में चीन को पीछे छोड़कर दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन चुका है और करीब 1.4 अरब की आबादी में से एक चौथाई से ज्यादा लोग 10 से 26 साल की उम्र के हैं। इतनी बड़ी युवा आबादी के लिए अच्छी और स्थायी नौकरियां पैदा करना सरकार के सामने बड़ी चुनौती बना हुआ है।

भारत के सामने अभी भी कड़ी चुनौती

आर्थिक मोर्चे पर दबाव भी कम नहीं हैं। अगस्त में अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर भारी टैरिफ लगाए थे, जिससे व्यापार को लेकर चिंता बढ़ी। इसका असर रुपये पर भी दिखा और दिसंबर की शुरुआत में रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। 2025 में रुपये की कीमत करीब 5 फीसदी गिर चुकी है। इन हालातों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्थिक सुस्ती से निपटने के लिए खपत कर में बड़ी कटौती और श्रम कानूनों में सुधार किए हैं।

2022 में ब्रिटेन को पीछे छोड़ा था भारत

इससे पहले 2022 में भारत ब्रिटेन को पीछे छोड़कर दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका था। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या भारत आर्थिक आकार के साथ-साथ आम लोगों की जिंदगी में भी खुशहाली ला पाएगा।

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