IMF ने पाकिस्तान के सामने रख दी 11 शर्तें, कर्ज चाहिए तो माननी होगी बात; पड़ोसी मुल्क पर बढ़ा दबाव
Pakistan: पाकिस्तान को मई 2026 तक सीमा पार भुगतान के लिए रेमिटेंट कॉस्ट और संरचनात्मक बाधाओं का आकलन पूरा करना होगा, क्योंकि अनुमान है कि रेमिटेंट लागत 1.5 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है।
- Written By: मनोज आर्या
पाकिस्तान के सामने IMF की 11 शर्तें, (कॉन्सेप्ट फोटो)
IMF 11 Conditions to Pakistan: इंटरनेशनल मोनेटरी फंड (आईएमएफ) ने पाकिस्तान के 7 अरब डॉलर के बेलआउट प्रोग्राम में 11 नई शर्तें जोड़ी हैं, जिससे सिर्फ 18 महीनों में कुल शर्तें 64 हो गई हैं। यह शर्ते इसलिए पेश की गई हैं, ताकि पाकिस्तान में भ्रष्टाचार पर रोक लगाने, चीनी सेक्टर को उदार बनाने और बढ़ती रेमिटेंस लागत को ठीक किया जा सके। इसी कारण आईएमएफ इन शर्तों के साथ पाक्स्तिान पर प्रेशर बना रहा है। आइए जानते हैं ये शर्तें कौन-कौन सी हैं।
आईएमएफ के 11 शर्तें कौन-कौन सी?
- दिसंबर 2025 तक सीनियर फेडरल सिविल सर्वेंट्स की एसेट डिक्लेरेशन पब्लिक की जाएंगी। इसके बाद में इसे प्रोविंस तक बढ़ाया जाएगा।
- 10 हाई-रिस्क डिपार्टमेंट्स में करप्शन से निपटने के लिए एक्शन प्लान।
- फाइनेंशियल इंटेलिजेंस तक एक्सेस के साथ मजबूत प्रोविंशियल एंटी-करप्शन यूनिट्स।
- मई 2025 तक रेमिटेंस कॉस्ट और क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट्स में रुकावटों का पूरा असेसमेंट।
- सितंबर 2025 तक लोकल करेंसी बॉन्ड मार्केट रिफॉर्म्स के लिए एक स्टडी और स्ट्रैटेजी।
- एलीट कैप्चर को खत्म करने के लिए जून 2025 तक एक नेशनल शुगर मार्केट लिबरलाइजेशन पॉलिसी।
- दिसंबर 2025 तक KPIs और तीन प्रायोरिटी एरियाज के जरूरी इम्प्लीमेंटेशन के साथ एक कॉम्प्रिहेंसिव FBR रिफॉर्म रोडमैप।
- दिसंबर 2025 तक एक मीडियम-टर्म टैक्स रिफॉर्म स्ट्रैटेजी।
- पावर एंटिटीज HESCO और SEPCO में प्राइवेट-सेक्टर पार्टिसिपेशन के लिए प्री-कंडीशन्स और PSO एग्रीमेंट्स पर साइन करना।
- कंपनीज एक्ट में अमेंडमेंट्स और SEZ एक्ट में रिफॉर्म्स।
- रेवेन्यू कम होने पर अगले साल एक मिनी-बजट लागू करने का एग्रीमेंट।
IMF का कहना है कि नए उपाय गवर्नेंस की कमियों को कम करने, पावर सेक्टर में नुकसान को रोकने, पाकिस्तान की टैक्स मशीनरी में सुधार करने और उन स्ट्रक्चरल कमियों को दूर करने के लिए जरूरी हैं जो आर्थिक सुधार में रुकावट डाल रही हैं।
शुगर सेक्टर में बदलाव के लिए शर्त
आईएमएफ चाहता है कि पाकिस्तान चीनी उद्योग पर पहले से जमे हुए वर्ग के प्रभाव को खत्म करें। जून 2026 तक पाकिस्तान को इसके लिए कुछ शर्तों को पूरा करना होगा। चीनी बाजार के उदारीकरण के लिए एक नेशनल पॉलिसी बनानी होगी। लाइसेंसिंग, प्राइस कंट्रोल, आयात या निर्यात अनुमतियों और जोनिंग से संबंधित सुधारों पर सहमति बनानी होगी।
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फाइनेंस सेक्टर में सुधार के लिए दबाव
पाकिस्तान को मई 2026 तक सीमा पार भुगतान के लिए रेमिटेंट कॉस्ट और संरचनात्मक बाधाओं का आकलन पूरा करना होगा, क्योंकि अनुमान है कि रेमिटेंट लागत 1.5 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है। स्थानीय करेंसी बांड मार्केट के विकास में आने वाली बाधाओं पर एक अलग स्टडी सितंबर 2026 तक पूरा किया जाना चाहिए, जिसके बाद एक रणनीतिक कार्य योजना तैयार की जानी चाहिए।
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11 शर्तों से पाकिस्तान पर बढ़ा दबाव
11 नई शर्तों को शामिल करने से संकेत मिलता है कि आईएमएफ पाकिस्तान की सुधार प्रगति को असमान और अपर्याप्त मानता है, जिससे भविष्य में पैसा देने से पहले अधिकारियों पर दबाव बढ़ रहा है। इस कारण यह 11 शर्तें पाकिस्तान पर रखी गई हैं।
