इक्रा ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर की भविष्यवाणी, ग्रोथ रेट 6.2 रहने का अनुमान
भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर रेटिंग एजेंसी इक्रा ने एक रिपोर्ट जारी की है। जिसके आधार पर जीडीपी की ग्रोथ रेट का अनुमान लगाया गया है। इस रिपोर्ट में इक्रा ने इकोनॉमिक ग्रोथ रेट को पहले की तरह ही रखा है।
- Written By: अपूर्वा नायक
भारतीय अर्थव्यवस्था (सौजन्य : सोशल मीडिया)
नई दिल्ली : रेटिंग एजेंसी इक्रा ने इंडियन इकोनॉमी को लेकर अनुमान जारी किया है। इक्रा ने करेंट फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए भारत की ग्रोस डोमेस्टिक प्रोडक्ट यानी जीडीपी की ग्रोथ रेट के अनुमान को 6.2 प्रतिशत पर पहले की ही तरह तय रखा है।
इक्रा एजेंसी ने अनुमान जताया है कि मानसून अच्छा रह सकता है और कच्चे तेल की कीमतें औसतन 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहेंगी। हालांकि, पश्चिम एशिया में जियो पॉलिटिकल टेंशन, वित्तीय बाजारों में अस्थिरता और अनिश्चित व्यापार नीतियों के कारण इस वृद्धि परिदृश्य में नकारात्मक जोखिम पैदा हो रहे हैं। इक्रा ने बुधवार को जारी अपने ‘मैक्रो अपडेट जून-2025′ में यह जानकारी दी है।
आरबीआई ने करेंट ईयर में देश की इकोनॉमिक ग्रोथ रेट 6.5 परसेंट रहने का अनुमान लगाया है। रिपोर्ट के अनुसार, करेंट फाइनेंशियल ईयर के पहले 2 महीने में इकोनॉमिक एक्टिविटी में मिला-जुला रुख देखने को मिला है। इसमें 17 गैर-कृषि संकेतकों में से सिर्फ 9 में पिछले साल की जनवरी-मार्च तिमाही के मुकाबले में सुधार दिखाई दे रहा है। हालांकि, ग्रीष्मकालीन फसलों का उत्पादन अच्छी रफ्तार से बढ़ने का अनुमान है।
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मई, 2025 में मानसून के जल्दी आने से बिजली और खनन क्षेत्रों के प्रदर्शन पर आंशिक रूप से असर पड़ा। इसने कहा कि आयकर राहत, ब्याज दरों में कटौती और खाद्य मुद्रास्फीति में नरमी के कारण शहरी उपभोग की संभावनाएं उज्ज्वल बनी हुई हैं।
रेटिंग एजेंसी ने कहा कि हालांकि, पश्चिम एशिया में जियो पॉलिटिकल टेंशन, वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता और शुल्क नीतियों को लेकर अनिश्चितता के कारण ग्लोबल रिस्क ऊंचा बना हुआ है, जिससे डोमेस्टिक ग्रोथ में परेशानी उत्पन्न हो रही है।
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इक्रा की रिपोर्ट कहती है कि करेंट फाइनेंशियल ईयर के लिए देश की इकोनॉमिक ग्रोथ रेट 6.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। हालांकि, इसके नीचे की ओर जाने का रिस्क बढ़ गया है। इसमें कहा गया है कि अनुकूल मानसून पूर्वानुमान और फूड इंफ्लेशन में संभावित गिरावट के कारण, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई आधारित इंफ्लेशन पिछले वित्त वर्ष के 4.6 प्रतिशत से घटकर चालू वित्त वर्ष में 3.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई के 3.7 प्रतिशत के अनुमान से कम है।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
