जीवीके रेड्डी, (सोर्स- सोशल मीडिया)
GVK Reddy Birthday Special: भारत के आधुनिक बुनियादी ढांचे की जब भी बात होती है, तो एक नाम प्रमुखता से उभरता है डॉ. जीवीके रेड्डी। आंध्र प्रदेश के एक छोटे से गांव से निकलकर दुनिया भर में अपनी पहचान बनाने वाले जीवीके रेड्डी का जीवन संघर्ष, दूरदर्शिता और अटूट संकल्प की एक प्रेरणादायक कहानी है। उनके जन्मदिन के अवसर पर, आइए जानते हैं उनके जीवन के उन पहलुओं को जिन्होंने उन्हें भारत का ‘इंफ्रास्ट्रक्चर किंग’ बनाया।
जीवीके रेड्डी का जन्म 22 मार्च 1937 को आंध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले के कोत्तूर गांव में हुआ था। उनकी शुरुआती शिक्षा वहीं हुई और बाद में उन्होंने हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका के हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से ‘ओनर/प्रेसिडेंट मैनेजमेंट प्रोग्राम’ भी पूरा किया, जिसने उनके व्यापारिक दृष्टिकोण को वैश्विक विस्तार दिया।
रेड्डी ने अपने करियर की शुरुआत एक कॉन्ट्रैक्टर के रूप में की थी। उन्होंने 1990 के दशक में GVK Group की नींव रखी। उनकी पहली बड़ी सफलता तब आई जब उन्होंने आंध्र प्रदेश के जेगुमपाडु में भारत का पहला निजी क्षेत्र का गैस-आधारित बिजली संयंत्र (Power Plant) स्थापित किया। यह भारत के ऊर्जा क्षेत्र में निजी भागीदारी की एक नई शुरुआत थी।
जीवीके रेड्डी को सबसे अधिक ख्याति मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (CSMIA) के आधुनिकीकरण के लिए मिली। उनके नेतृत्व में मुंबई एयरपोर्ट का ‘टर्मिनल 2’ (T2) बनकर तैयार हुआ, जिसे आज दुनिया के सबसे खूबसूरत और कुशल हवाई अड्डों में गिना जाता है। इसके अलावा, उन्होंने बेंगलुरु एयरपोर्ट के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सड़क, ऊर्जा, आतिथ्य (Hospitality) और जीवन विज्ञान जैसे क्षेत्रों में भी जीवीके ग्रुप ने उनकी देखरेख में नए कीर्तिमान स्थापित किए।
व्यापार के अलावा, रेड्डी समाज सेवा में भी अग्रणी रहे हैं। जीवीके फाउंडेशन के माध्यम से उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य किए हैं। विशेष रूप से ‘108 एम्बुलेंस सेवा’ को आधुनिक और सुलभ बनाने में उनका बड़ा योगदान रहा है। भारत सरकार ने व्यापार और उद्योग के क्षेत्र में उनके बहुमूल्य योगदान के लिए उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया।
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जीवीके रेड्डी केवल एक बिजनेसमैन नहीं, बल्कि एक ऐसे राष्ट्र निर्माता हैं जिन्होंने भारत की प्रगति को रफ्तार दी। 88 वर्ष की आयु में भी उनकी ऊर्जा और दृष्टिकोण युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनका जीवन सिखाता है कि यदि आपके पास सपना है और उसे पूरा करने का साहस, तो आप रेगिस्तान में भी गुलाब खिला सकते हैं।