होर्मुज स्ट्रेट (सोर्स-सोशल मीडिया)
India Fuel Supply Plan 2026: मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। खासकर होर्मुज स्ट्रेट के पास जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर गहरा संकट मंडरा रहा है। भारत सरकार ने इस चुनौतीपूर्ण स्थिति से निपटने के लिए अपना विशेष ‘प्लान-बी’ आधिकारिक तौर पर एक्टिव कर दिया है। सरकारी अधिकारियों ने देशवासियों को आश्वासन दिया है कि भारत के पास पेट्रोल, डीजल और गैस का पर्याप्त भंडार है।
दुनिया के 22 देशों ने ईरान से हमले रोकने और होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने की सामूहिक अपील की है। इस मार्ग के बंद होने की आशंका ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल और गैस की कीमतों में हलचल पैदा कर दी है। भारत सरकार इस पूरी स्थिति पर लगातार पैनी नजर बनाए हुए है ताकि आपूर्ति में कोई बाधा न आए।
केंद्र सरकार ने ईंधन की निर्बाध आपूर्ति और समुद्री व्यापार की सुरक्षा के लिए इमरजेंसी उपाय शुरू कर दिए हैं। शिपिंग मंत्रालय होर्मुज मार्ग से गुजरने वाले भारतीय जहाजों की सुरक्षा के लिए 24 घंटे निगरानी रख रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं क्षेत्रीय नेताओं से बात कर ग्लोबल सप्लाई चेन की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं।
सरकार ने जनता से अपील की है कि वे घबराहट में आकर एलपीजी या पेट्रोल की अतिरिक्त खरीदारी बिल्कुल न करें। अधिकारियों के अनुसार रिफाइनरियां अपनी पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और ईंधन की कोई कमी नहीं है। पैनिक बाइंग को रोकने के लिए आपूर्ति को नियमित रखा गया है ताकि बाजार में स्थिरता बनी रहे।
सरकार ने व्यावसायिक उपयोग के लिए एलपीजी की आपूर्ति में सुधार करते हुए इसे 50 प्रतिशत तक कर दिया है। होटल, रेस्टोरेंट, अस्पताल और सामुदायिक रसोई जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को गैस आपूर्ति में प्राथमिकता दी जा रही है। इस कदम से छोटे और मध्यम व्यवसायों को ऊर्जा संकट के समय में अपना कामकाज चलाने में काफी मदद मिलेगी।
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एलपीजी पर निर्भरता कम करने के लिए गैस कंपनियों को घरों में पीएनजी कनेक्शन देने के निर्देश दिए गए हैं। राज्यों को आदेश दिया गया है कि वे पीएनजी नेटवर्क के विस्तार के लिए मंजूरी की प्रक्रिया को और तेज करें। इमरजेंसी उपायों के तहत केरोसिन का अतिरिक्त आवंटन और कोयले की आपूर्ति बढ़ाने को भी मंजूरी दी गई है।
पेट्रोल और डीजल के रिटेल सेक्टर में फिलहाल किसी भी तरह की किल्लत की कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई है। ऑयल डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियां तय दिशा-निर्देशों के अनुसार नियमित रूप से सभी राज्यों को आपूर्ति भेज रही हैं। सरकार का मुख्य ध्यान इस समय नागरिकों की सुरक्षा और बेरोकटोक समुद्री व्यापार को बनाए रखने पर है।