‘भारत में बेचो, चीन में खरीदो' की रणनीति अपना रहे FPI, अक्टूबर में शेयर बाजार से निकाले करोड़ों रुपये

इजराइल और ईरान के बीच युद्ध जारी है और थमने का नाम नहीं ले रहा, जिसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ रहा है। इस कारण तेल की कीमतों में वृद्धि हुई और चीनी बाजार के मजबूत प्रदर्शन के कारण विदेशी निवेशकों ने बिकवाली की।
विदेशी निवेशकों ने अक्टूबर में 58,711 करोड़ रुपये शेयर बाजार से निकाले
एफपीआई (सौजन्य-पिनटरेस्ट)
Published on
Updated on

नई दिल्ली: इजराइल और इरान के बीच चल रहे संघर्ष का असर शेयर बाजार में भी बड़ी मात्रा में दिखाई दे रहा है, जिससे विदेशी निवेशक शेयर बाजार से निवेश निकाल रहे है। इस बात का चीन बहुत अच्छी तरह से फायदा उठा रहा है और विदेशी निवेशकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।

अक्टूबर में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक शुद्ध बिकवाल रहे और विदेशी निवेशकों ने इस महीने अब तक 58,711 करोड़ रुपये शेयर बाजार से निकाले। इजराइल और ईरान के बीच युद्ध जारी है और थमने का नाम नहीं ले रहा, जिसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ रहा है। इस कारण तेल की कीमतों में वृद्धि हुई और चीनी बाजार के मजबूत प्रदर्शन के कारण विदेशी निवेशकों ने बिकवाली की।

इक्विटी बाजार में लगाया पैसा

इससे पहले सितंबर में विदेशी निवेशकों ने 57,724 करोड़ रुपये का निवेश किया था। यह नौ महीने का उच्चतम स्तर था। डिपोजिटरी के आंकड़ों की माने तो अप्रैल-मई में 34,252 करोड़ रुपये निकालने के बाद, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने जून से लगातार इक्विटी बाजार में पैसा लगाया। देखा जाए तो कुल मिलाकर, जनवरी, अप्रैल और मई को छोड़कर, FPI इस साल शुद्ध खरीदार रहे हैं। मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर होने वाली गतिविधियां और ब्याज दर को लेकर स्थिति जैसे वैश्विक कारक भारतीय शेयर बाजारों में विदेशी निवेश के प्रवाह को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।''

FPI हुए सतर्क

आंकड़ों के मुताबिक, FPI ने 1 अक्टूबर से 11 अक्टूबर के बीच इक्विटी से 58,711 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की। वेंचुरा सिक्योरिटीज के शोध प्रमुख विनीत बोलिंजकर ने कहा, ‘‘विशेष रूप से पश्चिम एशिया में इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। इससे वैश्विक निवेशक जोखिम से बच रहे हैं। FPI सतर्क हो गए हैं और उभरते बाजारों से पैसा निकाल रहे हैं।''

उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर संकट के कारण ब्रेंट क्रूड का भाव 10 अक्टूबर को 79 डॉलर प्रति बैरल हो गया जबकि 10 सितंबर को यह 69 डॉलर प्रति बैरल था। इससे भारत में महंगाई और वित्तीय बोझ बढ़ने का जोखिम उत्पन्न हुआ है।

‘भारत में बेचो, चीन में खरीदो'

जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार का मानना ​​है कि चीन में धीमी अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने के लिए मौद्रिक और राजकोषीय उपायों की घोषणा के बाद FPI ‘भारत में बेचो, चीन में खरीदो' की रणनीति अपना रहे हैं। FPI चीन में शेयरों में पैसा लगा रहे हैं, जो अब भी अपेक्षाकृत सस्ता है।

कुल मिलाकर इन सब कारणों से भारतीय शेयर बाजार में एक अस्थायी अवरोध पैदा हुआ है। इस साल अब तक FPI ने इक्विटी में 41,899 करोड़ रुपये और बॉन्ड बाजार में 1.09 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया है।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com