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SEZ इकाइयों को बड़ी राहत: केंद्र ने सीमा शुल्क में की कटौती, अब घरेलू बाजार में बिक्री होगी आसान
Customs Duty Reduction: केंद्र ने SEZ इकाइयों के लिए सीमा शुल्क में कटौती की है। नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगी, जिससे घरेलू बाजार में निर्मित वस्तुओं की बिक्री अब और भी सस्ती और सुलभ हो जाएगी।
- Written By: प्रिया सिंह

SEZ इकाइयों को बड़ी राहत (सोर्स-सोशल मीडिया)
Government SEZ Tariff Reduction Policy: केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड ने विशेष आर्थिक क्षेत्रों यानी SEZ की इकाइयों के लिए एक बड़े राहत पैकेज का ऐलान किया है। इसके तहत अब घरेलू टैरिफ क्षेत्र में निर्मित वस्तुओं की बिक्री पर रियायती सीमा शुल्क दरें लागू की जाएंगी। बजट 2026-27 की घोषणाओं के अनुरूप यह फैसला वैश्विक व्यापार में जारी तनाव और व्यवधानों को देखते हुए लिया गया है। सरकारी SEZ टैरिफ कटौती नीति के माध्यम से विनिर्माण इकाइयों की चिंताओं को दूर करने का प्रयास किया गया है।
ऐतिहासिक फैसला
केंद्रीय बजट में की गई घोषणा को अब सीमा शुल्क अधिनियम 1962 की धारा 25 के तहत एक नई अधिसूचना के जरिए लागू किया जा रहा है। यह राहत योजना 1 अप्रैल 2026 से लेकर 31 मार्च 2027 तक पूरे एक साल के लिए प्रभावी तरीके से लागू रहेगी। सरकार का मुख्य उद्देश्य घरेलू बाजार में काम करने वाली अन्य इकाइयों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना है।
SEZ शुल्क दरों में कटौती
इस नई योजना के तहत अलग-अलग स्लैब में सीमा शुल्क को काफी कम कर दिया गया है ताकि उत्पादन की लागत को घटाया जा सके। जिन वस्तुओं पर पहले 30 प्रतिशत से 40 प्रतिशत के बीच शुल्क लगता था, उन पर अब केवल 20 प्रतिशत सीमा शुल्क लिया जाएगा। इसी तरह 20 से 30 प्रतिशत के बीच वाले शुल्क को घटाकर अब सीधे 15 प्रतिशत के स्तर पर लाया गया है।
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छोटे स्लैब में बदलाव
सरकार ने मध्यम और छोटे शुल्क दरों में भी महत्वपूर्ण कटौती की है जिससे छोटे उद्योगों को भी अब सीधा लाभ मिल सकेगा। अब 20 प्रतिशत के शुल्क को घटाकर 12.5 प्रतिशत और 12.5 व 15 प्रतिशत वाले शुल्क को घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है। साथ ही 10 प्रतिशत वाले शुल्क को 9 प्रतिशत और 7.5 प्रतिशत वाले को 6.5 प्रतिशत किया गया है।
पात्रता के कड़े नियम
इस राहत योजना का लाभ लेने के लिए SEZ इकाइयों को कुछ अनिवार्य शर्तों और कड़े नियमों का पालन करना बहुत जरूरी होगा। इन इकाइयों द्वारा निर्मित वस्तुओं में कच्चे माल की तुलना में कम से कम 20 प्रतिशत का मूल्यवर्धन होना कानूनी रूप से अनिवार्य है। इससे देश के भीतर विनिर्माण क्षेत्र में गुणवत्ता और उत्पादों के मूल्य में सुधार आने की उम्मीद है।
निर्यात पर मुख्य फोकस
राहत के बावजूद सरकार का मुख्य जोर SEZ इकाइयों द्वारा किए जाने वाले निर्यात को लगातार बढ़ाने पर ही पूरी तरह केंद्रित रहने वाला है। रियायती दरों पर घरेलू बिक्री पिछले तीन वर्षों के उच्चतम वार्षिक एफओबी निर्यात मूल्य के 30 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। यह सीमा इसलिए रखी गई है ताकि इकाइयां विदेशी मुद्रा अर्जित करने के अपने मुख्य लक्ष्य से कभी न भटकें।
पारदर्शी डिजिटल प्रणाली
इस पूरी योजना को केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड की स्वचालित प्रणाली के जरिए ही पूरी तरह से लागू किया जाएगा। घरेलू बाजार के लिए क्लीयरेंस हेतु एंट्री बिलों का मूल्यांकन फेसलेस असेसमेंट प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा जो बहुत ही पारदर्शी होगा। इससे भ्रष्टाचार की संभावना खत्म होगी और काम में तेजी आने के साथ ही मानवीय हस्तक्षेप भी न्यूनतम हो जाएगा।
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व्यापारिक सुगमता का लक्ष्य
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक व्यापार मार्ग प्रभावित हुए हैं जिससे भारतीय निर्यातकों को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा। केंद्र सरकार की इस नई पहल से SEZ इकाइयों को अपनी अतिरिक्त क्षमता का उपयोग अब घरेलू बाजार में करने का अवसर मिलेगा। यह कदम भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और विनिर्माण क्षेत्र को एक नई ऊर्जा प्रदान करने वाला साबित होगा।
Customs duty relief for sez units
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