प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स-सोशल मीडिया)
नवभारत डेस्क: देशभर में दीवाली का पर्व 31 अक्टूबर और 1 नवंबर को मनाया जा रहा है। जिसके लिए घरों में तैयारियां शुरू है। लोग अपने घर को सजाने में लगे हैं। शानदार लाइटिंग और दीपक की मदद से अपने घर को स्वर्ग बना रहे हैं। लेकिन इस दीवाली भारत ने चीन को जोर का झटका दिया है। इस बार भारतवासियों ने चाइनीज प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल बहुत कम किया है, जिसकी वजह से भारतीय बाजारों में इसकी मांग घट गई है और घरेलू सामानों तो तवज्जो मिल रही है।
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक अभियान शुरू किया है, जिसका नाम ‘वोकल फॉर लोकल’ है। जिसका असर इस दीवाली देखने मिल गया है। भारत के लोगों ने चाइनीज सामानों का इस्तेमाल कम करना शुरू कर दिया है। जिसकी वजह से इसकी मांग भी घट रही है। लोग अब दीपाली पर स्वदेशी सामान खरीद रहे हैं। खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स सजावट के सामान लोग ‘मेड इन इंडिया’ चेक करके ही खरीद रहे हैं।
यह भी पढ़ें:- त्रेता जैसी भव्य दिखी रामनगरी अयोध्या, रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद पहले दीपोत्सव का नजारा देख भावविभोर हो जाएंगे आप
ऐसे में अब एक अनुमान लगाया गया है। जिसके अनुसार दीवाली पर चीनी सामानों की बिक्री में जमकर गिरावट आई है। अनुमान लगाया गया है कि इस बहिष्कार की वजह से चीन को करीब 1 लाख 25 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। जो चीन के लिए किसी झटके से कम नहीं है।
जानकारी के लिए बता दें कि पिछले कई सालों से दिवाली के दौरान भारतवासियों ने चीनी सामानों के बहिष्कार किया है। जिसकी वजह से चीन को नुकसान हो रहा है। भारतवासियों ने स्थानीय कारीगरों से मिट्टी के दीये और सजावट के सामान खरीदने शुरू कर दिए हैं और ‘वोकल फॉर लोकल’ मुहिम का समर्थन कर रहे हैं।
स्थानीय कारीगरों को समर्थन अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ ने देशभर के व्यापारिक संगठनों को दिवाली से जुड़ी वस्तुएं बनाने वाली महिलाओं, कुम्हारों, कारीगरों और अन्य लोगों की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया है। इस पहल से उपभोक्ताओं में जागरूकता बढ़ी है, जो अब आयातित उत्पादों के बजाय घरेलू उत्पादों को तरजीह दे रहे हैं। नतीजतन, उपभोक्ता की पसंद में आए इस बदलाव के कारण चीन को करीब 1.25 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
यह भी पढ़ें:- अयोध्या में हुई भव्य दीपोत्सव की शुरुआत; सीएम योगी ने खींचा प्रभु राम का रथ, बोले खत्म हुआ 500 वर्षों का इंतजार