चीन में पाकिस्तान और तालिबान की शांति वार्ता, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Pakistan Taliban Negotiations China: पाकिस्तान ने गुरुवार को आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि वह चीन में अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के साथ शांति वार्ता कर रहा है। बीजिंग इस बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है जिसका मुख्य उद्देश्य हफ्तों से जारी उस घातक लड़ाई को रोकना है जिसमें अब तक सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं और सीमा पार व्यापार व यात्रा पूरी तरह बाधित हो गई है।
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने इस्लामाबाद में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान बताया कि पाकिस्तान ने उत्तरी चीन के शहर उरुमकी में अपना एक प्रतिनिधिमंडल भेजा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम सीमा पार आतंकवाद के स्थायी समाधान खोजने की पाकिस्तान की निरंतर नीति का हिस्सा है। हालांकि, पाकिस्तान ने यह भी साफ कर दिया है कि इस वार्ता की सफलता पूरी तरह से काबुल के रुख पर निर्भर करती है।
पाकिस्तान ने इस वार्ता के दौरान काबुल से स्पष्ट और सत्यापन योग्य कार्रवाई की मांग की है। इस्लामाबाद चाहता है कि तालिबान सरकार लिखित में यह आश्वासन दे कि अफगान धरती का इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ हमलों के लिए, विशेष रूप से प्रतिबंधित समूह तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) द्वारा नहीं किया जाएगा।
काबुल में तालिबान सरकार के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल कहर बल्खी ने पुष्टि की है कि बीजिंग के अनुरोध पर एक मध्यम स्तर का प्रतिनिधिमंडल उरुमकी गया है। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान आपसी सम्मान और गैर-हस्तक्षेप के आधार पर कूटनीतिक जुड़ाव में विश्वास रखता है। वहीं, चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि शी जिनपिंग की सरकार दोनों देशों के बीच मतभेदों को सुलझाने के लिए सक्रिय रूप से मध्यस्थता कर रही है।
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यह शांति वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देशों के बीच तनाव अपने चरम पर है। पाकिस्तान ने हाल ही में अफगानिस्तान के साथ खुली जंग की घोषणा की थी। पिछले महीने काबुल में एक ड्रग-ट्रीटमेंट सेंटर पर हुए पाकिस्तानी हवाई हमले में 400 से अधिक लोगों के मारे जाने का दावा किया गया था। जिसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चिंता में डाल दिया था। हालांकि शांति वार्ता जारी है लेकिन पाकिस्तान ने साफ कर दिया है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में आतंकियों के खिलाफ उसके सैन्य अभियान रुकेंगे नहीं।