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जारी रहेगा तेजी का दौर, पर 15% उछाल के बाद कुछ गिरावट संभव
- Written By: विष्णू भारद्वाज

मुंबई. भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) के अनुमान से अधिक ग्रोथ करने से उत्साहित देशी-विदेशी निवेशकों के बढ़ते निवेश से भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) में तेजी का नया दौर शुरू हुआ है। फरवरी-मार्च में पहले गिरावट और फिर आई तेज रिकवरी अब नए बुल रन (Bull Run) में तब्दील हो गयी है। इसी वजह से बाजार नई ऊंचाइयों को छूने लगा है। पिछले साढ़े तीन महीनों में मुख्य बेंचमार्क सेंसेक्स-निफ्टी (Sensex & Nifty) में जहां 15% का उछाल आया है, वहीं बाजार का व्यापक रूख दर्शाने वाले मिडकैप (Midcap) और स्मॉलकैप इंडेक्स (Smallcap) में 24 से 27% तक की जोरदार तेजी दर्ज हुई है, लेकिन तेजी कभी एकतरफा नहीं चल सकती है। बाजार में ऊंचे मूल्यों पर प्रॉफिट बुकिंग के कारण थोड़ी गिरावट आना तय है। ऐसा ही बीते शुक्रवार को हुआ।
जब चारों मुख्य सूचकांक नई ऊंचाइयां छूने के बाद करीब 1 प्रतिशत नीचे आ गए। सेंसेक्स 65,899 अंक के नए उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद 65,280 अंक रह गया। निफ्टी, मिडकैप और स्मॉलकैप का भी यही हाल रहा। पिछले दो दिनों में वैश्विक बाजारों में भी गिरावट आई है। इसका कारण है अमेरिका (US) में ब्याज दरों (Interest Rates) में फिर वृद्धि की आशंका पैदा होना। इस वजह से आम निवेशकों में यह सवाल पैदा हो गया है कि बुल रन जारी रहेगा या फिर ज्यादा गिरावट आएगी?
बुल रन जारी रहने के पूरे आसार
इस बारे में विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया के बड़े देशों में सबसे ज्यादा ग्रोथ (7% से अधिक) भारत में ही आ रही है। अन्य सभी फैक्टर भी पॉजिटिव हैं। इसीलिए विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 2023 में अब तक सबसे ज्यादा 12 अरब डॉलर का शुद्ध निवेश भारत में ही किया है, जो लगातार जारी है। इस कारण बाजार में थोड़ी गिरावट के साथ बुल रन जारी रहने के पूरे आसार हैं। यदि हालात और बेहतर हुए तो तेजी के इस दौर में घट-बढ़ के साथ सेंसेक्स 73,000 अंक और निफ्टी 22,000 अंक तक पहुंच सकते हैं।
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निचले स्तरों से किसमें कितना उछाल
| इंडेक्स | 20 मार्च, 2023 | 7 जुलाई, 2023 | बढ़त |
| सेंसेक्स | 57,084 | 65,280 अंक | +15% |
| निफ्टी | 16,828 | 19,332 अंक | +15% |
| मिडकैप | 23,387 | 28,999 अंक | +24% |
| स्मॉलकैप | 26,128 | 33,129 अंक | +27% |
22,000 अंक तक पहुंच सकता है निफ्टी: ताहेर बादशाह
इन्वेस्को म्यूचुअल फंड (Invesco Mutual Fund) के मुख्य निवेश अधिकारी ताहेर बादशाह (Taher Badshah) का कहना है कि यूएस में ब्याज दरें फिर बढ़ सकती हैं, लेकिन भारत में ब्याज दरों में और वृद्धि की संभावना न के बराबर है, हालांकि कटौती में समय लग सकता है। भारत में आर्थिक विकास, महंगाई और मानसून, तीनों से संबंधित चिंता दूर हो गयी है। साथ ही क्रूड ऑयल और अन्य कमोडिटी कीमतें भी कंट्रोल में हैं। इस साल चाइना में ग्रोथ उम्मीद से कम तथा भारत में अनुमान से ज्यादा होने से विदेशी निवेशकों यानी FII का झुकाव भारत की तरफ हो गया है। तभी पिछले दो महीनों में ही FII ने 15 बिलियन डॉलर का रिकॉर्ड निवेश कर डाला। यदि 10 साल का एवरेज देखें तों एफआईआई सालाना करीब 15 बिलियन डॉलर का निवेश करते हैं। आने वाले महीनों में भी इनका निवेश जारी रहने की उम्मीद है। महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि मार्केट के न्यू हाई होने के बावजूद इंडिया का वैल्यूएशन (Valuation) महंगा नहीं है। वित्त वर्ष 2024 की अर्निंग (Earning) के हिसाब से देखे तो निफ्टी 19 के पीई रेशियो (PE Ratio) पर ही है। जबकि 2025 की अनुमानित अर्निंग को देखे तो निफ्टी की ईपीएस (EPS) 1100 रुपए आ सकती है। इस हिसाब से अगले 12 से 18 महीनों में निफ्टी उतार-चढ़ाव के साथ 22,000 अंक तक पहुंच सकता है। भारत में आम चुनाव में नतीजों की अनिश्चितता को छोड़ लगभग अन्य सभी फैक्टर पॉजिटिव हैं।
US में फिर ब्याज दरें बढ़ने की आशंका: आलोक रंजन
आईडीबीआई म्यूचुअल फंड (IDBI Mutual Fund) के मुख्य निवेश अधिकारी आलोक रंजन (Alok Ranjan) का कहना है कि इंडियन इकोनॉमी के फंडामेंटल काफी मजबूत हैं। इसलिए मार्केट में बुल रन कायम रहने की उम्मीद है, लेकिन पिछले कुछ महीनों के दौरान आई इतनी लंबी तेजी के बाद अब कुछ करेक्शन (Technical Correction) संभव है। इन्वेस्टर्स (Investors) को यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि मार्केट में हमेशा पैसा नहीं बनता है। यानी लगातार तेजी नहीं रह सकती है। किसी न किसी कारण से गिरावट भी आती है और यह जरूरी भी है। तभी निवेश के नए अवसर मिलते हैं। अब यूएस में फिर ब्याज दरें बढ़ने की आशंका पैदा हो गयी है। जिसके कारण पिछले दो दिनों से ग्लोबल मार्केट (Global Market) में गिरावट देखने को मिली। इसका असर शुक्रवार को यहां भी हुआ। यूएस में इन्फ्लेशन रेट (Inflation Rate) कम तो हुई है, परंतु अब भी फेडरल रिजर्व (Federal reserve) की आशा से अधिक है। लिहाजा अपनी 19 जुलाई की बैठक में फेडरल रिजर्व ब्याज दर में 25 बेसिस पॉइंट (BPS) की वृद्धि कर सकता है। इसके बाद अगली बैठक में भी 25 बेसिस पॉइंट की वृद्धि होने की संभावना है। इस वजह से ग्लोबल मार्केट में तेजी पर ब्रेक लग सकता है। हालांकि भारत में ज्यादा गिरावट की आशंका नहीं है। यदि 3 से 5 प्रतिशत तक की गिरावट आती है तो यह हेल्दी करेक्शन होगा और निवेश अवसर प्रदान करेगी।
अब निवेशकों की निगाहें पहली तिमाही के नतीजों पर: प्रशांत तापसे
मेहता इक्विटीज लिमिटेड (Mehta Equities Ltd.) के रिसर्च हैड प्रशांत तापसे (Prashanth Tapse) का कहना है कि भारतीय बाजार में ज्यादा गिरावट की आशंका तो कतई नहीं है, लेकिन सेंसेक्स-निफ्टी के नई ऊंचाइयों पर पहुंचने के बाद फिलहाल ज्यादा अपसाइड भी नहीं दिख रहा है। ऊंचे मूल्यों पर प्रॉफिट बुकिंग (Profit Booking) अवश्य होगी। दूसरे अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की खबरों से वैश्विक बाजार दबाव में आ रहे हैं। जिससे भारत में भी कुछ गिरावट आ सकती है, हालांकि वह ज्यादा नहीं होगी क्योंकि इंडिया ग्रोथ स्टोरी (India Growth Story) से आकर्षित होकर विदेशी निवेशक यहां भारी निवेश कर रहे हैं लेकिन अब निवेशकों को कार्पोरेट इंडिया (Corporate India) के पहली तिमाही के नतीजों (Q1 Results) का इंतजार है। यदि रिजल्ट अच्छे रहे तो निश्चित ही तेजी बनी रहेगी। इसके अलावा यदि पूरे जुलाई देश भर में मानसून अच्छा रहा तो महंगाई नियंत्रण में रहेगी। इस पर भी निवेशकों की निगाहें है। अधिक ग्रोथ वाले सेक्टर की बात करें तो ऑटो, ऑटो एंसिलरी, प्राइवेट बैंक, रेलवे, डिफेंस, कैपिटल गुडस, रियल इस्टेट और मिडकैप आईटी में हम पॉजिटिव हैं और इनके रिजल्ट अच्छे आने की उम्मीद है। जबकि केमिकल, स्टील, इंफ्रा, लार्ज आईटी में ग्रोथ की चिंता दिख रही है।
टॉप पिक : टाटा मोटर्स, HDFC बैंक, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स, कुमिंस इंडिया, इंडसइंड बैंक, रेल विकास निगम, IRFC, टीटागढ़ रेल, उषा मार्टिन, लोढ़ा डेवलपर्स, ओबेरॉय रियल्टी।
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