Budget 2024: टेक्सटाइल मार्केट में भारत को ग्लोबल प्लेयर बनाने के लिए AEPC ने रखी ये मांगें, होंगी पूरी या रहेंगी अधूरी?
केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 23 जुलाई को मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का पहला बजट पेश करेंगी। बजट से एक सप्ताह पहले होने वाली हलवा सेरेमनी भी हो चुकी है। इस बार के बजट से तकरीबन हर सेक्टर को ज्यादा की उम्मीदें हैं। क्योंकि कहा जाता है कि जब चुनाव में सत्ताधारी पार्ट की सीटें कम आती हैं तो बजट बढ़ जाता है।
- Written By: अभिषेक सिंह
APEC ने बजट 2024 से पहले रखी मांगें (कॉन्सेप्ट फोटो)
नई दिल्ली: केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 23 जुलाई को मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का पहला बजट पेश करेंगी। बजट से एक सप्ताह पहले होने वाली हलवा सेरेमनी भी हो चुकी है। इस बार के बजट से तकरीबन हर सेक्टर को ज्यादा की उम्मीदें हैं। क्योंकि कहा जाता है कि जब चुनाव में सत्ताधारी पार्ट की सीटें कम आती हैं तो बजट बढ़ जाता है।
22 जुलाई को संसद का बजट सत्र शुरू होने वाला है। उससे पहले 21 जुलाई को संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने सर्वदलीय बैठक बुलाई है। बजट सत्र के दूसरे दिन यानी 23 जुलाई को केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण मोदी 3.0 का पहला बजट पेश करेंगी। इस बजट से आयात-निर्यात पर सकारात्मक असर के लिए सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं।
कस्टम ड्यूटी में राहत दे सरकार
अपैरल एक्सपोर्ट प्रोमोशन काउंसिल यानी एईपीसी ने सरकार के सामन मांग रखी है कि बजट 2024 में निर्यात पर कस्टम ड्यूटी में थोड़ी राहत दे जिससे निर्यात को बढ़ावा और सहूलियत मिल सके। काउंसिल ने सुझाव दिया है कि सरकार को कपड़ा निर्यातकों के लिए ‘इंटरेस्ट इक्वलाइजेशन स्कीम’ आधार पर दरों को पांच प्रतिशत पांच साल के लिए बढ़ाना चाहिए।
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एपीईसी के अध्यक्ष सुधीर सेखरी ने एक बयान में कहा है कि इससे इंटरनेशनल मार्केट में अपैरल इंडस्ट्री को ढ़ावा मिलेगा। जिसके चलते निर्यात भी बढ़ेगा और रोजगार के ज्यादा अवसर उत्पन्न होंगे। इसके अलावा सुधीर सेखरी ने गुड्स के इंपोर्ट में भी छूट की मांग की है।
एपीईसी ने रखी ये मांगें
सुधीर सेखरी ने कहा की भारत को टेक्सटाइल मार्केट में ग्लोबल प्लेयर बनाने के लिए सराकर को हाई क्वालिटी की टेक्सटाइल मशीनरी पर कस्टम ड्यूटी कम करनी चाहिए। इसके साथ ही टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन को और अधिक सक्षम बनाने के लिए कस्टम ड्यूटी 3 साल के लिए शून्य प्रतिशत कर दी जाए तो इंडस्ट्री को सहूलियत मिलेगी।
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वहीं उन्होंने एनवायरमेंटल सोशल और गवर्नेंस और गुणवत्ता नियमों पर ध्यान देने वाले मैन्युफैक्चर्स को डायरेक्ट टैक्स में छूट दिए जाने की भी मांग की है। इसके अलावा एपीईसी ने मेड-इन-इंडिया उत्पादों की ब्रैंडिंग और मार्केटिंग के लिए वित्तीय सहायता की भी मांग की है। अब देखना अहम होगा कि सरकार इसमें से कितनी मांगें पूरी करती है।
