
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, (सोर्स- वित्त मंत्रालय)
Ministry of External Affairs Budget Allocation: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज केंद्रीय बजट पेश किया है। भारत का बजट अपनी विदेश नीति और क्षेत्रीय प्रभाव को आकार देने में भी एक बड़ी भूमिका निभाता है। हर साल विदेश मंत्रालय के तहत किए गए आवंटन यह बताते हैं कि भारत किन देशों को विकास सहयोग, इंफ्रास्ट्रक्चर सहायता और मानवीय सहायता के लिए प्राथमिकता देता है. आइए जानते हैं कि भारत के बजट से किन-किन देशों को फायदा होता है।
पिछले बजट में सरकार ने अपनी पड़ोसी पहले नीति को काफी मजबूत किया। इससे कुल विदेशी सहायता में वृद्धि हुई। विदेश मंत्रालय के कुल 20,516 करोड़ रुपये के आवंटन में से लगभग 5,483 करोड़ रुपये विदेशी देशों को सहायता देने के लिए रखे गए थे।
आपको बता दें कि भूटान भारत की विदेशी सहायता सूची में सबसे ऊपर बना हुआ है। इसे 2,150 करोड़ रुपये मिले थे। यह सहायता मुख्य रूप से पनबिजली परियोजनाओं, सड़क कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग की तरफ देखने को मिली है। इसी के साथ नेपाल को 700 करोड़ रुपये दिए गए थे। आवंटन पिछले साल की तुलना में स्थिर रखा गया जो द्विपक्षीय विकास सहयोग में निरंतर को दर्शाता है।
मालदीव को दी जाने वाली सहायता में वृद्धि करके 600 करोड़ रुपये कर दिया गया था। यह पहले के स्तर से काफी ज्यादा थी। इसी के साथ श्रीलंका के लिए सहायता को बढ़ाकर 300 करोड़ रुपये कर दी गई थी। ऐसा इसलिए क्योंकि यह द्वीप राष्ट्र गंभीर आर्थिक संकट से उबर रहा है।
वहीं, म्यांमार को दी जाने वाली सहायता 250 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 350 करोड़ रुपये कर दी गई थी। इसका उद्देश्य चल रहे हैं आधुनिक संघर्षों के बीच मानवीय जरूरत और इंफ्रास्ट्रक्चर चुनौतियों का समाधान करना है। बांग्लादेश को ₹120 करोड़ मिले और अफगानिस्तान को दी जाने वाली सहायता ₹200 करोड़ से घटाकर ₹100 करोड़ कर दी गई। भारत ने अपना जुड़ाव मानवीय सहायता तक सीमित कर दिया है।
इसी के साथ भारत ने दक्षिण एशिया से भी परे अपनी पहुंच का विस्तार किया है। अफ्रीकी देशों को कुल मिलाकर 225 करोड़ रुपये मिले। यूरेशिया और लैटिन अमेरिका के लिए कुल 100 करोड़ रुपये का (बजट 2026) आवंटन किया गया था। वहीं लैटिन अमेरिका को पहले के प्रावधानों में अलग 60 करोड़ रुपये मिले थे।
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ईरान के लिए 100 करोड़ रुपये का खास आवंटन रखा गया था। इसी के साथ मॉरीशस को दी जाने वाली सहायता थोड़ी कम करके 500 करोड़ रुपये कर दी गई और सेशेल्स आवंटन घटाकर 19 करोड़ कर दिया गया।






