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Budget 2026: मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री की मांग, आयात शुल्क बढ़ाकर 10-15% करने की अपील

Medical Device Budget: बजट 2026 से मेडिकल डिवाइस सेक्टर को बड़ी उम्मीदें हैं। इंडस्ट्री ने आयात पर निर्भरता घटाने के लिए कस्टम ड्यूटी को 7.5% से बढ़ाकर 10-15% करने और GST रिफंड तेज करने की मांग की है।

  • Written By: प्रिया सिंह
Updated On: Jan 31, 2026 | 11:10 AM

बजट 2026 से मेडिकल डिवाइस सेक्टर को उम्मीदें (सोर्स-सोशल मीडिया)

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Budget 2026 Medical Device Industry Expectations: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को बजट पेश करने वाली हैं और मेडिकल डिवाइस सेक्टर को इससे काफी उम्मीदें हैं। वर्तमान में भारत अपनी जरूरत के लगभग 70 प्रतिशत मेडिकल उपकरणों के लिए विदेशों से होने वाले आयात पर निर्भर है। उद्योग जगत का मानना है कि सही नीतियों और टैरिफ सुरक्षा के जरिए भारत जल्द ही एक वैश्विक मेडटेक हब बन सकता है।

आयात शुल्क बढ़ाने की मांग

ऑल इंडिया मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री (AiMeD) ने सरकार से बेसिक कस्टम ड्यूटी को 7.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 10-15 प्रतिशत करने का आग्रह किया है। राजीव नाथ के अनुसार स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग को ‘प्रोटेक्ट’ करने के लिए यह अनिवार्य शुल्क लगाना घरेलू उद्योगों के विकास के लिए बहुत आवश्यक है। उनका कहना है कि सालाना आयात में 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हो रही है जिसे रोकने के लिए स्थानीय सुरक्षा की जरूरत है।

मरीजों को सीधा लाभ

उद्योग का तर्क है कि सिर्फ कस्टम ड्यूटी कम करने से आम उपभोक्ताओं को कोई बड़ा आर्थिक लाभ नहीं मिलता है। सरकार को अधिकतम खुदरा मूल्य यानी MRP की निगरानी करनी चाहिए ताकि तर्कहीन कीमतों में कटौती कर मरीजों को सीधा लाभ पहुंचाया जा सके। यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि स्वास्थ्य सेवाओं की लागत कम हो और स्वदेशी उत्पादों को बाजार में उचित स्थान मिले।

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GST और टैक्स सुधार

वर्किंग कैपिटल की समस्या को हल करने के लिए GST रिफंड की प्रक्रिया को तेज करने की मांग की गई है। सरकार ने एक हफ्ते में रिफंड का वादा किया था लेकिन वर्तमान में इस प्रक्रिया में 3 से 4 महीने का समय लग रहा है। इसके अलावा सिंगापुर की तर्ज पर कैपिटल गुड्स पर दिए गए GST का रिफंड मिलना चाहिए ताकि निवेश को प्रोत्साहन मिल सके।

अंतरराष्ट्रीय चुनौतियां और व्यापार

यूरोप के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर चर्चा करते हुए उद्योग ने ‘नॉन-ड्यूटी’ बाधाओं और भारी रेगुलेटरी खर्चों पर चिंता जताई है। भारत चाहता है कि देश का ICMED सर्टिफिकेट यूरोप में मान्य हो ताकि वहां के भारी सर्टिफिकेशन खर्च को कम किया जा सके। साथ ही यह डर भी है कि अन्य देश यूरोप के रास्ते अपने उत्पाद भारत में न खपाने लगें जिससे घरेलू बाजार प्रभावित हो।

यह भी पढ़ें: रविवार को भी दलाल स्ट्रीट में मचेगा शोर! बजट के दिन होगी लाइव ट्रेडिंग, जानें MCX और NCDEX की टाइमिंग

रिसर्च और स्वदेशी तकनीक

डॉ. सुधीर श्रीवास्तव ने स्वदेशी रिसर्च और डेवलपमेंट को बढ़ावा देने के साथ AI आधारित हेल्थकेयर तकनीक अपनाने पर जोर दिया है। भारत के पास मजबूत इंजीनियरिंग क्षमता और कम लागत में समाधान देने की ताकत है जो उसे वैश्विक नेतृत्व दिला सकती है। घरेलू उपकरणों पर GST में राहत और R&D पर टैक्स छूट मिलने से भारत जल्द ही मेडटेक का ग्लोबल हब बन जाएगा।

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Frequently Asked Questions

  • Que: वर्तमान में भारत मेडिकल डिवाइस के लिए कितना आयात पर निर्भर है?

    Ans: भारत वर्तमान में अपनी चिकित्सा उपकरण जरूरतों के लिए लगभग 70 प्रतिशत आयात पर निर्भर है।

  • Que: बजट 2026 में कस्टम ड्यूटी को लेकर क्या मांग की गई है?

    Ans: उद्योग ने बेसिक कस्टम ड्यूटी को मौजूदा 7.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 10-15 प्रतिशत करने की मांग की है।

  • Que: GST रिफंड की प्रक्रिया में अभी कितना समय लग रहा है?

    Ans: वर्तमान में GST रिफंड में 3-4 महीने लग रहे हैं, जिसे उद्योग जगत एक हफ्ते में करने की मांग कर रहा है।

  • Que: ICMED सर्टिफिकेशन को लेकर उद्योग की क्या चिंता है?

    Ans: उद्योग चाहता है कि भारतीय ICMED सर्टिफिकेट को यूरोप में मान्यता मिले ताकि विदेशी सर्टिफिकेशन का भारी खर्च बचे।

  • Que: मेडटेक हब बनने के लिए किन अन्य सुधारों की जरूरत बताई गई है?

    Ans: इसके लिए स्वदेशी R&D को बढ़ावा, सस्ती पूंजी और घरेलू उपकरणों पर GST में राहत की आवश्यकता है।

Budget 2026 medical device industry import duty hike india

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Published On: Jan 31, 2026 | 11:10 AM

Topics:  

  • Budget 2026
  • budget expectations
  • Medical Sector

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