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Budget 2026: उद्योग जगत की मांग, निर्यात प्रोत्साहन और पूंजीगत खर्च में हो भारी बढ़ोतरी
Union Budget 2026: केंद्रीय बजट 2026 से उद्योग जगत को मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात में बड़े सुधारों की उम्मीद है। अमृत आचार्य ने पूंजीगत खर्च बढ़ाने और निर्यातकों के लिए बीमा योजनाओं का सुझाव दिया है।
- Written By: प्रिया सिंह

केंद्रीय बजट 2026 (सोर्स-सोशल मीडिया)
Industrial Growth In India Budget: केंद्रीय बजट 2026 की तैयारियों के बीच उद्योग जगत ने सरकार से अपनी विशेष मांगों को स्रोतों के माध्यम से साझा किया है। देश के चहुंमुखी आर्थिक विकास के लिए भारत के बजट में औद्योगिक विकास पर विशेष ध्यान देने की बहुत जरूरत है। विशेषज्ञों का मानना है कि मैन्युफैक्चरिंग और बुनियादी ढांचे में निवेश से ही रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं। स्रोतों के अनुसार, आगामी बजट में निर्यातकों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना सरकार की एक बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।
मैन्युफैक्चरिंग पर विशेष ध्यान
जेटवर्क के को-फाउंडर अमृत आचार्य ने स्रोतों के माध्यम से सुझाव दिया है कि सरकार को सार्वजनिक पूंजीगत खर्च लगातार बढ़ाना चाहिए। रेलवे, सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर और सोलर जैसी बड़ी परियोजनाओं पर भारी खर्च होने से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में मांग को काफी बढ़ावा मिलता है। सरकार स्वयं एक बहुत बड़ी खरीदार है, जिसके कारण उसके निवेश से घरेलू उद्योगों को सीधे तौर पर बड़ा आर्थिक लाभ प्राप्त होता है।
बुनियादी ढांचे में निवेश का लाभ
स्रोतों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में सरकार द्वारा सार्वजनिक निवेश में की गई वृद्धि की रफ्तार आगे भी इसी तरह बनी रहनी चाहिए। इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में निवेश करने से न केवल उद्योगों को नए ऑर्डर मिलते हैं, बल्कि रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिलती है। सरकार का मुख्य फोकस हमेशा से प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव जैसी महत्वपूर्ण नीतियों पर रहा है जिससे घरेलू उत्पादन को काफी बल मिला है।
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PLI योजना की सफलता
इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर सेक्टर और ऑटो कंपोनेंट्स के क्षेत्र में PLI योजना ने भारतीय विनिर्माण को एक बहुत ही नई और सकारात्मक दिशा दी है। स्रोतों के अनुसार इस योजना के सकारात्मक परिणाम अब बाजार में दिखने लगे हैं और भारत कई उत्पादों का बड़ा उत्पादक बन गया है। यही कारण है कि आज भारत आईफोन समेत कई प्रमुख मोबाइल फोनों का दुनिया के बड़े निर्यातक देशों की सूची में शामिल हो चुका है।
वैश्विक बाजार के लिए विनिर्माण
अमृत आचार्य का मानना है कि अब हमें केवल ‘मेक इन इंडिया फॉर इंडिया‘ तक सीमित न रहकर ‘मेक इन इंडिया फॉर ग्लोबल’ सोचना होगा। सरकार को निर्यात को बढ़ावा देने के लिए ऐसी विशेष प्रोत्साहन योजनाएं लानी चाहिए जो भारतीय कंपनियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बना सकें। चीन की तर्ज पर भारत में भी निर्यातकों के लिए सरकार समर्थित बीमा और क्रेडिट स्कीम्स की व्यवस्था होना आज समय की मांग है।
निर्यातकों के लिए सुरक्षा चक्र
स्रोतों के अनुसार निर्यातकों को अमेरिका और अन्य देशों में सामान भेजते समय जोखिम से सुरक्षा के लिए एक मजबूत सरकारी तंत्र चाहिए। ऐसी व्यवस्था होने से भारतीय उद्यमियों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अधिक निडर होकर अपने व्यापार का विस्तार कर सकेंगे। निर्यात के लिए विशेष प्रोत्साहन देने से भारतीय उत्पादों की पहुंच वैश्विक बाजारों में पहले के मुकाबले और अधिक आसान और सुलभ हो जाएगी।
पूंजी की लागत में कमी
स्रोतों में यह भी बताया गया है कि भारत में वर्तमान में लोन और फंडिंग की लागत कई अन्य प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले काफी ज्यादा है। अगर सरकार आने वाले वर्षों में इस लागत को कम करने के लिए कदम उठाती है, तो उद्यमियों का जोखिम उठाने का साहस बढ़ेगा। पूंजी सस्ती होने से देश में नए निवेश में तेजी आएगी और मध्यम व लघु उद्योगों को भी अपना विस्तार करने में मदद मिलेगी।
नीतिगत स्थिरता की प्रशंसा
स्रोतों के अनुसार वर्तमान सरकार का नीतिगत माहौल उद्योगों के लिए काफी सहयोगी, स्थिर और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखने वाला है। सरकार उद्योगों की समस्याओं को गंभीरता से सुनती है और एक बार लिए गए नीतिगत फैसलों को वापस न लेना इसकी सबसे बड़ी ताकत है। PLI इसका सबसे सटीक उदाहरण है, जहां शुरुआती वर्षों में भले ही नतीजे कम दिखे हों, लेकिन अब इसका बड़ा असर सामने आ रहा है।
कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग पर जोर
सरकार अब PLI 2.0 के माध्यम से केवल उत्पादों की असेंबली पर ही नहीं बल्कि उनके कंपोनेंट बनाने पर भी विशेष जोर दे रही है। इस दूरगामी नीति से सोलर और अन्य बड़े उद्योगों को भविष्य में बहुत लाभ मिलेगा और विदेशी आयात पर हमारी निर्भरता काफी कम होगी। कंपोनेंट का निर्माण भारत में होने से उत्पादन की कुल लागत में कमी आएगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा होंगे।
यह भी पढ़ें: Budget 2026: जानें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों का गणित और आम आदमी की जेब पर इनका असर
बजट 2026 की मुख्य अपेक्षाएं
केंद्रीय बजट 2026 से उद्योग जगत की पहली बड़ी अपेक्षा सार्वजनिक पूंजीगत खर्च में निरंतर और प्रभावी रूप से भारी बढ़ोतरी करना है। स्रोतों के अनुसार दूसरी बड़ी मांग निर्यातकों के लिए विशेष प्रोत्साहन और सुरक्षा योजनाएं शुरू करना है ताकि वे वैश्विक मंच पर टिक सकें। इन्हीं महत्वपूर्ण कदमों के माध्यम से भारत की मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को एक नई और बहुत तेज रफ्तार मिल सकती है।
Frequently Asked Questions
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Que: अमृत आचार्य ने बजट 2026 के लिए कौन सी दो मुख्य मांगें रखी हैं?
Ans: स्रोतों के अनुसार, उन्होंने सार्वजनिक पूंजीगत खर्च में निरंतर बढ़ोतरी और निर्यातकों के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाओं की मांग की है।
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Que: प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना का भारत पर क्या प्रभाव पड़ा है?
Ans: PLI योजना ने भारत में घरेलू उत्पादन को नई दिशा दी है, जिससे देश मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स का बड़ा निर्यातक बन गया है।
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Que: 'मेक इन इंडिया फॉर ग्लोबल मार्केट' का क्या उद्देश्य है?
Ans: इसका उद्देश्य केवल भारत के लिए नहीं, बल्कि वैश्विक बाजार की जरूरतों को पूरा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिस्पर्धी उत्पाद बनाना है।
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Que: निर्यातकों के लिए किस तरह की सुरक्षा व्यवस्था का सुझाव दिया गया है?
Ans: स्रोतों के अनुसार, निर्यातकों के लिए चीन की तरह सरकार समर्थित बीमा और क्रेडिट स्कीम्स की व्यवस्था करने का सुझाव दिया गया है।
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Que: PLI 2.0 में किस बात पर सबसे अधिक जोर दिया जा रहा है?
Ans: PLI 2.0 के तहत अब सरकार केवल उत्पादों की असेंबली पर नहीं, बल्कि उनके कलपुर्जों (कंपोनेंट) के निर्माण पर अधिक जोर दे रही है।
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