
बजट 2026 में 'मेक इन इंडिया 2.0' (सोर्स-सोशल मीडिया)
PLI scheme expansion Budget 2026 details: केंद्रीय बजट 2026 में ‘मेक इन इंडिया 2.0’ के माध्यम से भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में एक बड़ा रोडमैप पेश किया गया है। वित्त मंत्री ने चीन और अन्य देशों पर आयात निर्भरता कम करने के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना के दायरे को बढ़ाते हुए ₹23,000 करोड़ के नए प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा की है। इस रणनीतिक पहल का मुख्य उद्देश्य उच्च तकनीक वाले क्षेत्रों जैसे सेमीकंडक्टर, ऑटो कलपुर्जे और कैपिटल गुड्स में घरेलू उत्पादन को सशक्त बनाना है। सरकार की इस दूरदर्शी योजना से न केवल स्वदेशी उद्योगों को नई ऊर्जा मिलेगी, बल्कि लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
भारत ने विनिर्माण के क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भरता’ की ओर कदम बढ़ाते हुए विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया है जहां आयात की हिस्सेदारी अधिक है। नए बजटीय प्रावधानों के तहत कंस्ट्रक्शन मशीनरी और हाई-एंड कैपिटल गुड्स के निर्माण के लिए 16,000 करोड़ तक का फंड आवंटित किया गया है। इसका सीधा उद्देश्य टनल बोरिंग मशीन और क्रेन जैसे भारी उपकरणों के मामले में चीन पर निर्भरता को 50% तक कम करना है।
ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए बजट में 7,000 करोड़ की एक विशेष ग्लोबल वैल्यू चेन (GVC) स्कीम का प्रस्ताव है जो आधुनिक तकनीक पर केंद्रित है। इसके तहत एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS), सेंसर और 360-डिग्री कैमरों जैसे पुर्जों का निर्माण अब भारत में ही संभव हो सकेगा। इससे न केवल वाहनों की लागत कम होगी बल्कि भारत भविष्य की कारों के निर्माण के लिए एक सुरक्षित ग्लोबल सप्लाई चेन के रूप में उभरेगा।
मेक इन इंडिया 2.0 केवल पारंपरिक विनिर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी (Space Tech) को भी शामिल किया गया है। उद्योग जगत की सिफारिशों को मानते हुए सरकार ने नए तकनीकी क्षेत्रों में नवाचार और अनुसंधान (R&D) के लिए पीएलआई स्कीम का विस्तार किया है। यह कदम भारत को चौथी औद्योगिक क्रांति का नेतृत्व करने और वैश्विक तकनीक बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद करेगा।
विनिर्माण को किफायती बनाने के लिए सरकार ने लॉजिस्टिक्स लागत को वर्तमान के 13% से घटाकर 8% के वैश्विक स्तर पर लाने का लक्ष्य रखा है। बजट 2026 में बुनियादी ढांचे के विकास और पीएम गतिशक्ति योजना के एकीकरण पर जोर दिया गया है जिससे माल की ढुलाई तेज और सस्ती होगी। उत्पादन की लागत में कमी आने से भारतीय उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चीन और वियतनाम जैसे देशों को कड़ी टक्कर दे सकेंगे।
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PLI योजना के इस व्यापक विस्तार से अगले पांच वर्षों में लगभग 15 लाख नए रोजगार सृजित होने का अनुमान लगाया गया है। सरकार ने एमएसएमई (MSME) इकाइयों को मुख्य सप्लाई चेन से जोड़ने के लिए विशेष इंसेंटिव और सॉफ्ट लोन की सुविधा भी प्रदान की है। यह समावेशी दृष्टिकोण छोटे उद्यमियों को बड़े उद्योगों का हिस्सा बनने का मौका देगा और ग्रामीण क्षेत्रों में भी औद्योगिक विकास की नई लहर पैदा करेगा।






