बजट 2026 में 75,000 नई सीटों के लक्ष्य से स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांति (सोर्स-सोशल मीडिया)
Impact of 75000 new medical seats on budget: भारत सरकार ने स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए बजट 2026 के माध्यम से एक महत्वाकांक्षी खाका तैयार किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुसार, अगले पांच वर्षों में देश भर के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में कुल 75,000 नई मेडिकल सीटें जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए हाल ही में कैबिनेट ने 15,034 करोड़ रुपये के निवेश के साथ 10,023 नई सीटों को मंजूरी दी है। यह पहल न केवल डॉक्टरों की कमी को दूर करेगी, बल्कि ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच भी सुनिश्चित करेगी।
बजट 2026 में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए आवंटन 95,000 करोड़ रुपये को पार कर गया है, जिसमें चिकित्सा शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि 75,000 नई सीटों का लक्ष्य हासिल करने के लिए चरणबद्ध तरीके से बुनियादी ढांचे का विकास किया जाएगा। इसमें केंद्र सरकार 68.5% यानी लगभग 10,303.20 करोड़ रुपये का योगदान देगी, जबकि शेष 4,731.30 करोड़ रुपये राज्य सरकारों द्वारा वहन किए जाएंगे।
भारत में वर्तमान में डॉक्टर-आबादी अनुपात को सुधारने के लिए यह कदम अनिवार्य माना जा रहा है ताकि आम आदमी को समय पर इलाज मिल सके। इन नई सीटों में स्नातक (UG) और स्नातकोत्तर (PG) दोनों स्तरों पर विस्तार किया जाएगा, जिससे भविष्य में विशेषज्ञों की उपलब्धता बढ़ेगी। सरकार का लक्ष्य है कि मेडिकल कॉलेजों की संख्या जो 2013-14 में 387 थी, उसे और बढ़ाकर स्वास्थ्य प्रणाली को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाया जाए।
प्रति मेडिकल सीट लगभग 1.5 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित किया गया है, जो आधुनिक प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों और अस्पतालों के निर्माण में सहायक होगा। बजट 2026 में जिला अस्पतालों को मेडिकल कॉलेजों में अपग्रेड करने की योजना को भी विस्तार दिया गया है ताकि स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण मिल सके। यह निवेश न केवल शिक्षा की गुणवत्ता सुधारेगा, बल्कि टियर-2 और टियर-3 शहरों में चिकित्सा पर्यटन को भी बढ़ावा देगा।
इस विस्तार योजना का एक मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में तैनात डॉक्टरों की संख्या में वृद्धि करना है ताकि क्षेत्रीय विषमताएं समाप्त हों। नए नियमों के तहत अनुभवी सरकारी विशेषज्ञों को प्रोफेसर बनाने की अनुमति दी गई है, जिससे संकाय (फैकल्टी) की कमी को प्रभावी ढंग से दूर किया जा सकेगा। इससे दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले जनजातीय समुदायों को भी अब अपने पास ही बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और विशेषज्ञ डॉक्टर मिल सकेंगे।
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सीटों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता को बनाए रखना सरकार और नियामक निकायों के लिए एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल भौतिक ढांचे का निर्माण पर्याप्त नहीं है, बल्कि शोध और नवाचार के लिए 20,000 करोड़ रुपये का अलग फंड आवंटित किया गया है। बजट 2026 का यह दृष्टिकोण भारत को “मेक इन इंडिया” के साथ-साथ वैश्विक स्वास्थ्य सेवा का एक प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में अग्रसर है।