Budget 2026: पति-पत्नी को मिल सकता है ज्वाइंट टैक्स रिटर्न का विकल्प, टैक्स देनदारी होगी कम

Joint Income Tax Return: ICAI ने बजट 2026 में पति-पत्नी के लिए ज्वाइंट टैक्स रिटर्न का सुझाव दिया है। इससे 8 लाख रुपये तक की आय टैक्स फ्री हो सकती है और अमेरिका की तर्ज पर टैक्स देनदारी भी कम होगी।
Budget 2026: ICAI Proposes Joint Income Tax Return for Couples to Reduce Tax Liability
कपल्स ज्वाइंट इनकम टैक्स रिटर्न (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Joint tax filing benefits for couples India: इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) ने वित्त मंत्रालय को आगामी बजट 2026 के लिए एक क्रांतिकारी सुझाव दिया है। इस प्रस्ताव के तहत पति-पत्नी को अलग-अलग टैक्स भरने के बजाय एक संयुक्त या 'ज्वाइंट इनकम टैक्स रिटर्न' फाइल करने का विकल्प देने की वकालत की गई है। वर्तमान में भारत में प्रति व्यक्ति आधार पर टैक्स वसूला जाता है, जिससे उन परिवारों पर बोझ बढ़ता है जहां केवल एक सदस्य कमाता है। इस बदलाव से न केवल मध्यम वर्ग को बड़ी राहत मिलेगी, बल्कि भारत का टैक्स ढांचा अमेरिका और जर्मनी जैसे विकसित देशों के समकक्ष आ जाएगा।

मौजूदा टैक्स नियमों की सीमाएं

वर्तमान में नई टैक्स रीजीम के तहत पति और पत्नी दोनों अलग-अलग 4 लाख रुपये के बेसिक टैक्स एग्जेम्प्शन के हकदार होते हैं। अगर परिवार में केवल पति कमाता है, तो वह केवल अपने हिस्से की छूट का लाभ उठा पाता है और पत्नी के नाम की छूट बेकार चली जाती है। आईसीएआई का तर्क है कि इससे कई परिवार टैक्स बचाने के लिए कागजों पर दूसरे सदस्यों के नाम इनकम दिखाने पर मजबूर होते हैं।

वैश्विक स्तर पर ज्वाइंट फाइलिंग

अमेरिका, जर्मनी और पुर्तगाल जैसे देशों में विवाहित जोड़ों को 'मैरिड फाइलिंग ज्वाइंटली' (MFJ) की सुविधा पहले से ही उपलब्ध है। इन देशों में ज्वाइंट रिटर्न फाइल करने पर टैक्स स्लैब की सीमा भी दोगुनी हो जाती है, जिससे परिवार उच्च टैक्स ब्रैकेट में आने से बच जाता है। इससे परिवारों की बचत बढ़ती है और टैक्स चोरी की संभावनाओं में भी कमी आती है क्योंकि आय का वितरण स्पष्ट रहता है।

8 लाख तक शून्य टैक्स का लाभ

अगर सरकार इस सुझाव को बजट 2026 में मान लेती है, तो बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट भी पति-पत्नी के लिए दोगुनी होकर 8 लाख रुपये हो सकती है। इसका मतलब है कि 8 लाख रुपये तक की सालाना आय वाले परिवारों को कोई टैक्स नहीं चुकाना पड़ेगा, जिससे उनकी खर्च करने योग्य आय बढ़ेगी। आईसीएआई के सुझाव के अनुसार 30 फीसदी वाला उच्चतम टैक्स रेट केवल 48 लाख रुपये से अधिक की आय पर लगेगा।

ज्वाइंट प्रॉपर्टी और कंप्लायंस

विशेषज्ञों का मानना है कि ज्वाइंट टैक्सेशन शुरू होने से उन मामलों में बहुत आसानी होगी जहां प्रॉपर्टी पति-पत्नी के नाम पर ज्वाइंट होती है। अक्सर ऐसी संपत्तियों की फंडिंग एक ही व्यक्ति करता है, जिससे आयकर विभाग की जांच और नोटिस का खतरा बना रहता है। एकल रिटर्न फाइलिंग से कागजी कार्रवाई और कंप्लायंस का बोझ कम होगा, जिससे करदाताओं और विभाग दोनों का समय बचेगा।

टैक्सपेयर्स के लिए वैकल्पिक व्यवस्था

आईसीएआई ने अपने प्रस्ताव में यह भी स्पष्ट किया है कि ज्वाइंट फाइलिंग का विकल्प अनिवार्य नहीं बल्कि वैकल्पिक होना चाहिए। जो करदाता पुरानी या वर्तमान व्यक्तिगत फाइलिंग प्रणाली में रहना चाहते हैं, उन्हें वैसा करने की अनुमति दी जानी चाहिए। एक वैध पैन (PAN) कार्ड के साथ पति-पत्नी अपनी आय को क्लब कर सकेंगे, जिससे मध्यम वर्गीय परिवारों की वित्तीय स्थिति में बड़ा सुधार होने की उम्मीद है।

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