
होम लोन पर ब्याज (सोर्स-सोशल मीडिया)
Home Loan Interest Tax Deduction Budget 2026 India: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए जाने वाले आगामी केंद्रीय बजट 2026 से घर खरीदारों को बड़ी सौगात मिलने की उम्मीद है। बढ़ती संपत्ति की कीमतों और होम लोन की ऊंची ब्याज दरों को देखते हुए मध्यम वर्ग सरकार से टैक्स छूट की सीमा बढ़ाने की पुरजोर मांग कर रहा है। रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि धारा 24(b) के तहत मिलने वाली राहत को दोगुना करने से न केवल आम आदमी का बोझ कम होगा, बल्कि हाउसिंग सेक्टर में भी नई जान आएगी। इस बजट में किफायती आवास और पहली बार घर खरीदने वालों के लिए विशेष प्रावधानों पर सरकार का मुख्य फोकस रह सकता है।
वर्तमान में आयकर की धारा 24(b) के तहत होम लोन के ब्याज पर अधिकतम 2 लाख रुपये तक की ही टैक्स छूट मिलती है। उद्योग जगत और करदाताओं की मांग है कि इस सीमा को बढ़ाकर कम से कम 5 लाख रुपये किया जाना चाहिए ताकि बढ़ते EMI बोझ को कम किया जा सके। विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले एक दशक में मकानों की कीमतें 50% से ज्यादा बढ़ गई हैं, लेकिन टैक्स छूट की सीमा स्थिर बनी हुई है।
होम लोन के मूलधन (Principal) पुनर्भुगतान पर मिलने वाली 1.5 लाख की छूट धारा 80C के अंतर्गत आती है, जिसमें PPF और बीमा जैसे कई अन्य निवेश भी शामिल हैं। मांग की जा रही है कि होम लोन के मूलधन के लिए एक अलग सेक्शन बनाया जाए या 80C की कुल सीमा को बढ़ाकर 3 लाख रुपये किया जाए। इससे घर खरीदने वालों को अन्य निवेशों के साथ समझौता किए बिना पूरी टैक्स बचत करने का मौका मिलेगा।
वर्तमान में नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) चुनने वाले करदाताओं को होम लोन के ब्याज पर किसी भी प्रकार की छूट नहीं मिलती है। बजट 2026 में यह उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार नई व्यवस्था को आकर्षक बनाने के लिए इसमें भी होम लोन ब्याज कटौती का लाभ शामिल कर सकती है। अगर ऐसा होता है, तो लाखों वेतनभोगी कर्मचारी नई व्यवस्था की ओर रुख करेंगे, जिससे उनकी शुद्ध आय (Net Income) में इजाफा होगा।
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सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY 2.0) के माध्यम से किफायती आवास क्षेत्र को और अधिक वित्तीय सहायता और सब्सिडी प्रदान करने पर विचार कर रही है। पहली बार घर खरीदने वालों के लिए धारा 80EEA जैसे पुराने लाभों को फिर से शुरू करने या उनकी अवधि बढ़ाने की चर्चा भी जोरों पर है। इन कदमों से न केवल शहरों में घर खरीदना सस्ता होगा, बल्कि निर्माण क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।






