कभी विधायक, अब जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष, जानें उमेश कुशवाहा की जिंदगी के अनकहे किस्से और विवाद
Bihar Assembly Elections: बिहार की राजनीति में जनता दल (यू) के प्रदेश अध्यक्ष और महनार के पूर्व विधायक उमेश सिंह कुशवाहा अपने संपत्ति, निवेश और विवादों के कारण वे लगातार सुर्खियों में बने रहते हैं।
- Written By: अमन उपाध्याय
उमेश सिंह कुशवाहा, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Umesh Kushwaha Mahnar Assembly Constituency: उमेश सिंह कुशवाहा बिहार के महनार विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक हैं और वर्तमान में जनता दल (यूनाइटेड) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष के पद पर कार्यरत हैं। उनके पिता का नाम वासुदेव सिंह है और उनका पैतृक निवास वैशाली जिले के कजरी बुजुर्ग गांव में है।
उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा आचार्य नरेंद्र देव कॉलेज, शाहपुर पाटोरी से प्राप्त की और ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री हासिल की। राजनीति के साथ-साथ वह व्यापारिक क्षेत्र में भी सक्रिय हैं और लार्ड बुद्धा फूड प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड में हिस्सेदारी रखते हैं।
इस वजह से टूट गया गठबंधन
उमेश कुशवाहा बिहार के महनार विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो 2008 के परिसीमन प्रक्रिया के बाद दोबारा अस्तित्व में आया। इस सीट का राजनीतिक इतिहास काफी पुराना है 1957 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की बनारसी देवी यहां से विधायक चुनी गई थीं। हालांकि, 2008 में पुनर्गठन के बाद यह क्षेत्र राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का मजबूत गढ़ बन गया।
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2010 के विधानसभा चुनावों में, जब जनता दल (यूनाइटेड) एनडीए का हिस्सा था, तब भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार डॉ. अच्युतानंद ने महनार सीट पर जीत दर्ज की। लेकिन 2015 के चुनावों में, उमेश कुशवाहा ने उन्हें 27,000 वोटों के बड़े अंतर से पराजित कर दिया। उस समय कुशवाहा महागठबंधन (ग्रैंड अलायंस) के प्रत्याशी थे, जिसमें राष्ट्रीय जनता दल और जनता दल (यूनाइटेड) शामिल थे। बाद में इन दोनों प्रमुख दलों के बीच मतभेद उत्पन्न हुए, जिसके चलते गठबंधन टूट गया। 2020 के बिहार विधानसभा चुनावों में जनता दल (यूनाइटेड) ने एक बार फिर महनार सीट से उमेश कुशवाहा को अपना उम्मीदवार बनाया।
2020 में हार गए थे चुनाव
उमेश सिंह कुशवाहा 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में महनार सीट से चुनाव लड़े थे, लेकिन उन्हें आरजेडी की उम्मीदवार वीरना देवी ने हरा दिया। वीरना देवी, आरजेडी के वरिष्ठ नेता राम किशोर सिंह की पत्नी हैं। उस चुनाव में राज्य की सत्तारूढ़ जेडीयू को सत्ता-विरोधी लहर (एंटी-इंकम्बेंसी) का सामना करना पड़ा था। साथ ही, चिराग पासवान की रणनीति जिसमें उन्होंने जेडीयू उम्मीदवारों के खिलाफ प्रत्याशी उतारे लेकिन बीजेपी के खिलाफ नहीं खड़ा करने की पहल के कारण JD (U) के कई वर्तमान विधायक चुनाव हार गए।
चुनावों में पार्टी का कमजोर प्रदर्शन
जनवरी 2021 में, स्वास्थ्य कारणों से बशिष्ठ नारायण सिंह के इस्तीफे के बाद उमेश सिंह कुशवाहा को जनता दल (यूनाइटेड) का बिहार प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। माना गया कि यह फैसला कोइरी और कुर्मी समुदायों के पारंपरिक सामाजिक-राजनीतिक गठबंधन को फिर से मजबूत करने की कोशिश का हिस्सा था, जो 2020 के विधानसभा चुनावों में पार्टी के कमजोर प्रदर्शन के बाद आवश्यक समझा गया।
गाड़ी, गहने और हथियार पर चर्चा
नामांकन पत्र में उमेश कुशवाहा ने बताया है कि उनके पास ₹14 लाख की एक कार, ₹4.5 लाख मूल्य के आभूषण और लगभग ₹1.75 लाख कीमत की राइफल या पिस्टल है। इन सबको मिलाकर उनकी कुल संपत्ति करीब ₹59.16 लाख आंकी गई है। भले ही उन्होंने यह जानकारी सहज रूप से दी हो, लेकिन राजनीतिक गलियारों और आम जनता में यह आंकड़े चर्चा का विषय बने हुए हैं।
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चुनाव आयोग को सौंपे गए नामांकन दस्तावेज़ में उमेश कुशवाहा और उनकी पत्नी रेणुका कुमारी ने अपनी वित्तीय और निजी जानकारियाँ उजागर की हैं, जो कई दृष्टियों से ध्यान आकर्षित करती हैं। उमेश कुशवाहा की वार्षिक आय ₹12.82 लाख दर्ज की गई है, जबकि उनकी पत्नी की सालाना आय ₹14.54 लाख से अधिक बताई गई है। नामांकन में यह भी स्पष्ट हुआ कि उमेश कुशवाहा के खिलाफ किसी भी थाने में कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।
नामांकन पत्र के साथ दिए गए संपत्ति ब्योरे के अनुसार, उमेश कुशवाहा के पास ₹4.95 लाख नकद मौजूद हैं, जबकि उनकी पत्नी के पास ₹4.75 लाख कैश है। एसबीआई में उनके विभिन्न खातों में कुल लगभग ₹11.71 लाख जमा हैं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने करीब ₹22.25 लाख की राशि विभिन्न कंपनियों, डिबेंचरों और शेयरों में निवेश कर रखी है, जो उन्हें एक समझदार और दूरदर्शी निवेशक के रूप में प्रस्तुत करती है।
विवादों और आलोचनाओं का केंद्र
हालांकि, उमेश कुशवाहा का राजनीतिक सफर विवादों से अछूता नहीं रहा है। वे कई बार विवादों और आलोचनाओं के केंद्र में रहे हैं। एक बार जब वे अपने निर्वाचन क्षेत्र के बाघचौना-लवापुर गांव में सड़क निर्माण कार्य की आधारशिला रखने पहुंचे, तो स्थानीय लोगों ने ताली बजाकर उनका विरोध किया, जिससे उन्हें कार्यक्रम रद्द करना पड़ा।
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2018 में, जंदाहा के आरएलएसपी ब्लॉक अध्यक्ष मनीष साहनी की अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस मामले में दर्ज प्राथमिकी में नौ लोगों के नाम शामिल थे, जिनमें कुशवाहा का नाम मुख्य आरोपी के रूप में सामने आया। इसके अलावा, 2019 में कुशवाहा के नाम पर पंजीकृत एक कार से जुड़ा हादसा भी चर्चा में रहा, जिसमें दो बाइक सवारों की मौत हो गई थी। हालांकि, JD(U) नेता ने दावा किया कि वह वाहन उनका नहीं था। इस घटना के बाद पीड़ित परिवारों ने पटना में JD(U) कार्यालय के बाहर जमकर विरोध प्रदर्शन किया।
