Bihar Electionc: जिन सीटों पर कटे हजारों वोट, वहां खिला कमल या चला ‘हाथ’? नतीजे जानकर चौंक जाएंगे आप
Bihar में विधानसभा के चुनाव संपन्न हो चुके हैं और सियासी हलचल अपने चरम पर है। नीतीश कुमार अब 10वीं बार मुख्यमंत्री बनने की शपथ 20 नवंबर को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में लेने जा रहे हैं।
- Written By: सौरभ शर्मा
जिन सीटों पर कटे हजारों वोट, वहां खिला कमल या चला 'हाथ'? नतीजे जानकर चौंक जाएंगे आप फोटो-एआई
SIR Voter Deletion Data Analysis: बिहार में विधानसभा के चुनाव संपन्न हो चुके हैं और सियासी हलचल अपने चरम पर है। नीतीश कुमार अब 10वीं बार मुख्यमंत्री बनने की शपथ 20 नवंबर को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में लेने जा रहे हैं। लेकिन, जीत के जश्न के बीच एक बड़े विवाद ने जन्म ले लिया है। विपक्षी दलों ने हार का ठीकरा विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया पर फोड़ा है। आरोप है कि बड़े पैमाने पर वोटरों के नाम काटे गए हैं। लेकिन चुनाव आयोग के आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। जिस गोपालगंज और पूर्णिया में सबसे ज्यादा वोट कटे, वहां के नतीजों ने सबको हैरान कर दिया है।
राज्य में हुए चुनाव के दौरान ऐतिहासिक 67.13 फीसदी मतदान दर्ज किया गया, जो बिहार के इतिहास में अब तक का सर्वाधिक है। महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और उनका मतदान प्रतिशत 71.78 रहा, जबकि पुरुषों का 62.98 प्रतिशत रहा। इस भारी मतदान के बावजूद, विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची से नाम हटाकर वोट चोरी की गई है। लेकिन आंकड़ों पर गौर करें तो जिन पांच सीटों पर एसआईआर प्रक्रिया में सबसे ज्यादा नाम डिलीट किए गए, उनमें से तीन पर भाजपा ने जीत का परचम लहराया है। वहीं, एक सीट जेडीयू और एक कांग्रेस के खाते में गई है। यह डेटा विपक्ष के आरोपों और जमीनी हकीकत के बीच एक दिलचस्प पहेली पेश कर रहा है।
गोपालगंज में सबसे ज्यादा नाम गायब, फिर भी भाजपा की जय
आंकड़ों की गहराई में जाएं तो पता चलता है कि गोपालगंज विधानसभा सीट पर सबसे ज्यादा 56,793 वोट डिलीट किए गए हैं। इसके बाद पूर्णिया में 50,767 और मोतिहारी में 49,747 नाम हटाए गए हैं। दिलचस्प बात यह है कि इन तीनों ही सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों ने शानदार जीत दर्ज की है। इसके अलावा कुचायकोट सीट पर 43,226 नाम हटे, जहां नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू जीती है। सर्वाधिक नाम कटने वाली पांचवीं सीट किशनगंज है, जहां 42,940 नाम हटाए गए और वहां कांग्रेस जीती। यानी, ज्यादा नाम कटने का सीधा नुकसान किसी एक पक्ष को नहीं हुआ। गौरतलब है कि गोपालगंज, मोतिहारी और पूर्णिया पहले भी भाजपा के पास थीं और किशनगंज कांग्रेस के पास, यानी नतीजों में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया।
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जहां कम नाम कटे, वहां किसका पलड़ा भारी?
अब तस्वीर का दूसरा पहलू देखते हैं। जिन पांच सीटों पर सबसे कम वोटरों के नाम हटाए गए, वहां के नतीजे मिले-जुले रहे हैं। दरभंगा में सबसे कम 2859 वोट डिलीट हुए, वहां भाजपा जीती। चनपटिया में 6031 नाम कटे और वहां कांग्रेस ने बाजी मारी। वहीं, बेतिया में 6076 नाम हटने के बाद भी भाजपा जीती। डेहरी में 6219 और महुआ में 6302 वोट डिलीट हुए, इन दोनों जगहों पर चिराग पासवान की एलजेपीआर के उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। इन आंकड़ों से यह साफ है कि चाहे नाम ज्यादा कटे हों या कम, जनता ने अपना फैसला सुना दिया है और भाजपा समेत एनडीए ने उन जगहों पर भी अपनी पकड़ मजबूत रखी जहां वोटर लिस्ट में बड़े बदलाव हुए थे।
