श्याम रजक: बिहार की दलित राजनीति का एक सशक्त चेहरा, जानिए अबतक का राजनीतिक सफर
Shyam Rajak Profile: श्याम रजक का नाम बिहार की राजनीति में एक ऐसे नेता के रूप में लिया जाता है, जिन्होंने छात्र राजनीति से लेकर राज्य सरकार में मंत्री पद तक का लंबा और संघर्षपूर्ण सफर तय किया है।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
श्याम रजक, फोटो- सोशल मीडिया
Bihar Assembly Election 2025: श्याम रजक 22 जुलाई 1954 को पटना के सब्जीबाग में जन्मे रजक ने वाणिज्य में स्नातक की पढ़ाई पूरी की और युवावस्था में ही सामाजिक आंदोलनों से जुड़ गए।
श्याम रजक ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से की। 1974 में जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में हुए ऐतिहासिक जेपी आंदोलन में उन्होंने सक्रिय भागीदारी निभाई। आपातकाल के दौरान उन्होंने सरकार के खिलाफ आवाज उठाई और जेल भी गए, जिससे उनकी छवि एक संघर्षशील नेता के रूप में उभरी।
आरजेडी से जेडीयू तक का सफर
1995 में श्याम रजक पहली बार राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के टिकट पर विधायक बने। इसके बाद 2000, फरवरी 2005 और नवंबर 2005 में भी वे आरजेडी से ही विधायक चुने गए। लालू यादव के करीबी माने जाने वाले रजक को राबड़ी देवी सरकार में ऊर्जा, जनसंपर्क और कानून मंत्री जैसे अहम विभागों की जिम्मेदारी मिली।
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2009 में उन्होंने जेडीयू का दामन थामा और 2010 तथा 2015 में पार्टी के टिकट पर विधायक बने। नीतीश कुमार की सरकार में उन्होंने खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री और बाद में उद्योग मंत्री के रूप में कार्य किया। 2016 में उन्हें बिहार विधानसभा में गृहस्पीठ का उपनेता भी नियुक्त किया गया।
फुलवारी शरीफ से फिर चुनावी मैदान में
2025 के विधानसभा चुनाव में श्याम रजक एक बार फिर फुलवारी शरीफ से चुनावी मैदान में हैं। दलित राजनीति में उनकी मजबूत पकड़ और जमीनी कार्यशैली उन्हें एक प्रभावशाली उम्मीदवार बनाती है। वे सामाजिक न्याय और विकास के मुद्दों को लेकर जनता के बीच लोकप्रिय हैं।
सामाजिक आंदोलनों में सक्रिय भूमिका
श्याम रजक ने पंजाब में आतंकवाद के खिलाफ अमृतसर से दिल्ली तक पदयात्रा की थी। इसके अलावा, ओडिशा के कालाहांडी में भूख से मौत के मुद्दे पर भी उन्होंने पदयात्रा कर सहायता कार्यों में भाग लिया। उनकी छवि एक संवेदनशील और जनसेवी नेता की रही है।
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प्रेम विवाह की कहानी
श्याम रजक की निजी जिंदगी भी चर्चा में रही है। उन्होंने मुंबई की पत्रकार अलका से प्रेम विवाह किया, जो सात वर्षों के लंबे इंतजार के बाद संभव हुआ। यह उनकी दृढ़ता और प्रतिबद्धता का एक और उदाहरण है।
