सम्राट चौधरी (सोर्स- सोशल मीडिया)
Samrat Choudhary Political Journey: बिहार की राजनीति में लंबे समय से चल रही उठापटक के बाद अब एक निर्णायक मोड़ आ चुका है। सम्राट चौधरी को राज्य का अगला मुख्यमंत्री बनाए जाने का फैसला न सिर्फ सत्ता परिवर्तन का संकेत है बल्कि यह उनके लंबे और उतार-चढ़ाव भरे राजनीतिक सफर का चरम भी है। नीतीश कुमार के पद छोड़ने के बाद सम्राट चौधरी का नाम तेजी से उभरा और आखिरकार पार्टी नेतृत्व ने उन पर भरोसा जताया। हालांकि, उनका यह सफर जितना तेज रहा है उतना ही विवादों से भी घिरा रहा है।
दरअसल, सम्राट चौधरी की राजनीतिक यात्रा छात्र राजनीति से शुरू हुई, जहां उन्होंने शुरुआती दौर में लालू प्रसाद यादव की पार्टी आरजेडी के साथ काम किया। उस समय आरजेडी बिहार की प्रमुख ताकत थी और इसी मंच से उन्हें पहचान मिली। बाद में उन्होंने जेडीयू का रुख किया और मंत्री पद तक पहुंचे लेकिन बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच उन्होंने 2017 में बीजेपी का दामन थाम लिया जो उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।
सम्राट चौधरी का संबंध एक मजबूत राजनीतिक परिवार से है। उनके पिता शकुनि चौधरी सात बार विधायक और सांसद रह चुके हैं, जबकि उनकी मां पार्वती देवी भी विधायक रह चुकी हैं। इस पारिवारिक पृष्ठभूमि ने उन्हें राजनीति में शुरुआती बढ़त जरूर दी लेकिन पार्टी संगठन में उनकी पकड़ और ओबीसी समीकरणों में उनकी भूमिका ने उन्हें अलग पहचान दिलाई। बीजेपी में प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने का काम किया।
बीजेपी में शामिल होने के बाद सम्राट चौधरी का कद तेजी से बढ़ा। उन्हें संगठन में अहम जिम्मेदारियां दी गईं और बाद में डिप्टी सीएम बनाया गया। 2024 के बाद बने नए राजनीतिक समीकरणों में वह बीजेपी के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए। विधानसभा चुनावों में भी उन्हें आगे रखकर पार्टी ने अपनी रणनीति तैयार की जिससे उनकी दावेदारी और मजबूत होती गई।
सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर विवादों से अछूता नहीं रहा है। उनका बार-बार दल बदलना विपक्ष के लिए बड़ा मुद्दा रहा है जिसके चलते उन्हें अवसरवादी नेता बताया जाता रहा है। इसके अलावा, जन सुराज के नेता प्रशांत किशोर ने उन पर गंभीर आरोप लगाए जिनमें उनकी शैक्षणिक योग्यता पर सवाल और आपराधिक आरोप भी शामिल थे। दरअसल, विधानसभा चुनाव के दौरान उनकी डिग्री को लेकर काफी विवाद हुआ था। जन सुराज पार्टी प्रमुख प्रशांत किशोर ने उनके ऊपर 10वी पास न होने का आरोप लगाया था। इसको लेकर सम्राट चौधरी ने सफाई दी थी। साथ ही सम्राट चौधरी के ऊपर हत्या करवाने का आरोप भी प्रशांत किशोर ने विधानसभा चुनाव के दौरान लगाया था।
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उनकी राजनीति का एक चर्चित पहलू पगड़ी संकल्प भी रहा, जिसमें उन्होंने ऐलान किया था कि जब तक नीतीश कुमार को सत्ता से हटाया नहीं जाएगा, वह पगड़ी नहीं उतारेंगे। हालांकि, जब नीतीश कुमार ने राजनीतिक समीकरण बदलते हुए बीजेपी के साथ फिर से गठबंधन किया तो उन्होंने अपना संकल्प खत्म कर दिया। इसके अलावा, उनके आक्रामक बयानों और तीखे राजनीतिक हमलों ने उन्हें लगातार सुर्खियों में बनाए रखा। सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना एक नई शुरुआत जरूर है लेकिन उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी छवि को स्थिर और भरोसेमंद बनाना होगी। विवादों और आरोपों से घिरे इस सफर के बाद अब उनकी असली परीक्षा शासन और प्रदर्शन के स्तर पर होगी जहां उन्हें खुद को साबित करना होगा।