बिहार में राज्यसभा की वोटिंग से गायब RJD विधायक फैसल रहमान का बयान आया सामने, जानें क्या कहा
Bihar Rajyasabha Election: बिहार में राज्यसभा चुनाव में एनडीए का क्लीन स्वीप देखने को मिला। महागठबंधन को बड़ा झटका लगा है। इस बीच वोटिंग से नदारद रहे RJD विधायक का बयान सामने आया है।
- Written By: सजल रघुवंशी
फैसल रहमान (सोर्स- नवभारत डिजाइन)
RJD MLA Faisal Rahman Statement: राष्ट्रीय जनता दल के विधायक फैसल रहमान ने हाल ही में हुए बिहार राज्यसभा चुनाव में भाग नहीं लिया। उन्होंने अपनी माँ के स्वास्थ्य को इसका कारण बताया है। एक इंटरव्यू के दौरान रहमान ने बताया कि उनकी माँ का इलाज दिल्ली में चल रहा है वह अस्वस्थ हैं, जिसकी वजह से उन्हें उनकी देखभाल करनी पड़ी। इस कारण से वह वोटिंग में नहीं आ पाए।
साथ ही फैसल रहमान ने बताया कि वह वोट डालने के लिए कल पटना गए थे लेकिन माँ की तबीयत बिगड़ने की खबर मिलने के बाद उन्हें तुरंत दिल्ली आना पड़ा। उन्होंने बताया कि इस बारे में उनके नेता को भी जानकारी दे दी गई है। फैसल रहमान ने कहा कि मां से बढ़कर कुछ भी नहीं है।
तीन कांग्रेसी विधायक भी रहे वोटिंग से नदारद
बिहार राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के तीन विधायक मनोहर प्रसाद, सुरेंद्र कुशवाहा और मनोज विश्वास ने भी मतदान नहीं किया। जिसके चलते महागठबंधन के वोट 37 पर ही रुक गए। वहीं एनडीए के सभी विधायकों ने वोट डाला। जिसके चलते ही इस चुनाव में एनडीए के सभी पांचो उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। जानकारी के मुताबिक राज्यसभा चुनाव में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और नितिन नवीन को 44-44 वोट मिले। केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर और उपेंद्र कुशवाहा को 42-42 वोट प्राप्त हुए। वहीं भाजपा के पांचवे उम्मीदवार शिवेश राम ने भी जीत दर्ज की, जबकि आरजेडी समर्थित उम्मीदवार ए.डी सिंह को केवल 37 वोट मिल सके।
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एक भी सीट क्यों नहीं निकाल पाई विपक्ष
राज्यसभा चुनाव में एक सीट जीतने के लिए 41 वोट की जरूरत थी लेकिन महागठबंधन के चार विधायक मतदान में शामिल ही नहीं हुए। इनमें कांग्रेस के तीन और आरजेडी के एक विधायक का नाम है। इस अनुपस्थिति ने चुनावी गणित को पूरी तरह बदल दिया। अब इस घटनाक्रम को लेकर चर्चा तेज हो गई।
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तेजस्वी यादव की रणनीति को झटका
महागठबंधन को एआईएमआईएम का समर्थन मिलने की चर्चा के बावजूद भी विपक्षी उम्मीदवार जीत हासिल नहीं कर सका। इस नतीजे को आरजेडी नेता तेजस्वी यादव की रणनीति के लिए झटका माना जा रहा है। पांचवीं सीट का मुकाबला कड़ा बताया जा रहा था लेकिन अंत में एनडीए का पलड़ा भारी रहा।
