नई सरकार का ‘पावर फॉर्मूला’ तय! राज्यसभा चुनाव के बाद बढ़ेगा सियासी तापमान, किसे मिलेगा कौन सा पद?
Bihar Government Formation: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संभावित तौर पर राज्यसभा जाने के बीच यह सवाल उठने लगा है कि राज्य में नई सरकार का गठन किस फार्मूले पर होगा।
- Written By: अर्पित शुक्ला
कॉन्सेप्ट फोटो (डिजाइन)
Bihar Politics: बिहार की राजनीति में इन दिनों बड़े बदलाव की चर्चा तेज हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की अटकलों ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठ रहा है कि यदि नीतीश कुमार दिल्ली की राजनीति में सक्रिय होते हैं, तो बिहार में नई सरकार का स्वरूप कैसा होगा और मुख्यमंत्री की कुर्सी किसे मिलेगी। फिलहाल सभी की नजर 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव पर टिकी हुई है।
बिहार से राज्यसभा की पांच सीटों के लिए चुनाव होना है और एनडीए की कोशिश है कि सभी सीटें उसके खाते में जाएं। माना जा रहा है कि इस चुनाव में नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना लगभग तय है। हालांकि असली राजनीतिक गतिविधियां उसके बाद ही तेज होंगी।
राज्यसभा चुनाव के बाद बढ़ सकती है सियासी हलचल
सूत्रों के मुताबिक नीतीश कुमार को राज्यसभा भेजने का फैसला उनकी सहमति से ही लिया गया है। ऐसे में आगे की राजनीतिक प्रक्रिया भी उनकी रणनीति और सहमति के अनुसार आगे बढ़ सकती है। संभावना है कि अप्रैल के दूसरे सप्ताह यानी 9 या 10 अप्रैल के आसपास नए राज्यसभा सदस्यों को शपथ दिलाई जाए।
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ऐसे में माना जा रहा है कि राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के बाद ही नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद और विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे सकते हैं। यदि ऐसा होता है, तो बिहार में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया अप्रैल के दूसरे या तीसरे सप्ताह में शुरू हो सकती है।
मुख्यमंत्री पद बीजेपी को मिलने की चर्चा
राजनीतिक सूत्रों की मानें तो नई सरकार के गठन के लिए एक संभावित फार्मूला भी चर्चा में है। इसके तहत मुख्यमंत्री का पद भारतीय जनता पार्टी को मिल सकता है, जबकि जनता दल (यू) को दो उपमुख्यमंत्री पद दिए जा सकते हैं। फिलहाल बिहार में दो उपमुख्यमंत्री हैं और उनमें से एक सम्राट चौधरी को भाजपा के भविष्य के नेतृत्व के तौर पर भी देखा जा रहा है। हालांकि इस बारे में अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
विभागों के बंटवारे को लेकर भी चर्चा
नई सरकार बनने की संभावना के साथ ही विभागों के बंटवारे को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सूत्रों का कहना है कि गृह विभाग बीजेपी के पास ही रह सकता है, जबकि वित्त मंत्रालय जेडीयू को मिलने की संभावना है। अभी कई महत्वपूर्ण विभाग मुख्यमंत्री के पास हैं, लेकिन सत्ता में बदलाव होने की स्थिति में इन विभागों का पुनर्गठन किया जा सकता है। इससे सरकार के भीतर नई जिम्मेदारियों का बंटवारा भी तय होगा।
विधानसभा और परिषद में भी बदलाव संभव
राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि सरकार बनने के बाद सदन के अहम पदों में भी बदलाव हो सकते हैं। फिलहाल बिहार विधानसभा के अध्यक्ष का पद बीजेपी के पास है और संभावना है कि यह पद आगे भी उसी के पास रहे। वहीं बिहार विधान परिषद में सभापति का पद अभी बीजेपी के पास है, लेकिन नई व्यवस्था में इसे जेडीयू को दिए जाने की चर्चा है। इससे गठबंधन के भीतर संतुलन बनाए रखने की कोशिश की जा सकती है।
सहयोगी दलों को भी मिल सकता है प्रतिनिधित्व
संभावित मंत्रिमंडल गठन को लेकर भी एक फार्मूला सामने आ रहा है। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री समेत करीब 16 मंत्री पद बीजेपी के पास रह सकते हैं, जबकि दो उपमुख्यमंत्री सहित 16 मंत्री पद जेडीयू को मिल सकते हैं। इसके अलावा सहयोगी दलों को भी सरकार में प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना है। बताया जा रहा है कि चिराग पासवान की पार्टी को दो मंत्री पद मिल सकते हैं, जबकि उपेंद्र कुशवाहा और जीतनराम मांझी की पार्टी को एक-एक मंत्री पद दिया जा सकता है।
नीतीश कुमार की भूमिका बनी रह सकती है अहम
हालांकि एनडीए नेतृत्व इस पूरे मामले में सावधानी बरतता नजर आ रहा है। गठबंधन के नेता यह संदेश देने से बच रहे हैं कि नीतीश कुमार को पद से हटाया जा रहा है। इसी वजह से सार्वजनिक तौर पर यह कहा जा रहा है कि बिहार की राजनीति में आगे भी नीतीश कुमार की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहेगी और नई सरकार भी उनके मार्गदर्शन में काम करेगी।
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दरअसल, पिछले करीब दो दशकों से बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे नीतीश कुमार के संभावित राज्यसभा जाने की चर्चा ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। अब सबकी नजर आने वाले कुछ हफ्तों पर टिकी है, जब यह स्पष्ट हो सकता है कि बिहार में सत्ता का नया समीकरण क्या होगा और नेतृत्व की कमान किसके हाथ में जाएगी।
